(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
“आओ संवारे यमुना किनारे” की थीम पर निरंकारी मिशन ने दिया स्वच्छ जल – स्वच्छ मन का संदेश
ना शिक्षा का गुमान, ना जाति – वर्ण का अभिमान।छोटा बड़ा हर कोई पद प्रतिष्ठा का भेद भुलाकर ब्रज के पौराणिक यमुना के घाटों की सफाई करने में उत्साहित होकर जुटा रहा। वह लगातार तीन घंटे स्वच्छ जल – स्वच्छ मन के भाव के साथ यमुना के घाट चमकाते रहे।
अवसर था संत निरंकारी मिशन द्वारा अमृत परियोजना के तहत रविवार को यमुना के प्रसिद्ध घाटों पर चलाए गए स्वच्छता अभियान का, जो सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज की प्रेरणा से देशभर के लगभग 1500 जल तटीय स्थलों पर आयोजित किया गया।
निरंकारी मीडिया सहायक किशोर स्वर्ण इसरानी ने बताया कि ‘आओ सवारें, यमुना किनारे’ थीम पर आधारित स्वच्छता अभियान की शुरूआत मथुरा में सुबह 7 बजे हुई, लगातार तीन घंटे तक तीन सौ से ज्यादा निरंकारी भक्तों ने समर्पण, भक्ति और सेवा का भाव लिए उत्साहित होकर यमुना के मुख्य स्थल विश्राम घाट से राजा घाट, प्रयाग घाट, दाऊजी घाट, श्रंगार घाट, श्याम घाट, रामघाट, तीनदुक घाट, बल्लभ घाट, चैंचाघाट, वसुदेव घाट, बंगाली घाट, कम्पू घाट के आसपास यमुना किनारे जमी काई, कीचड़, प्लास्टिक कचरा आदि गंदगी को साफ कर स्वच्छ जल स्वच्छ मन का संदेश दिया।

मथुरा के जोनल इंचार्ज एच के अरोड़ा ने बताया कि अमृत परियोजना का मुख्य उद्देश्य ‘जल संरक्षण’ तथा इसके बचाव हेतु जल निकायों की स्वच्छता एवं स्थानीय जनता के बीच ‘जागरूकता अभियान’ के माध्यम से उन्हें प्रोत्साहित करना है। निरंकारी भक्तों ने यमुना के घाटों से दस ट्रॉली से ज्यादा कचरा इक्कठा किया, जिसे मथुरा वृंदावन नगर निगम की गाड़ियों के माध्यम से निस्तारण हेतु भिजवाया गया, इसमें निगम की टीम का सहयोग रहा।
निरंकारी मिशन ने सहयोग हेतु मथुरा वृन्दावन नगर निगम प्रशासन तथा यमुना भक्तों का धन्यवाद किया, वहीं निरंकारी मिशन के स्वच्छता अभियान से प्रभावित होकर यमुनाभक्तों ने प्रशंसा करते हुए सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रति आभार जताया। विश्व सनातन धर्म रक्षक मथुरा के संरक्षक विपिन स्वामी ने कहा कि जो जागृति निरंकारी मिशन ने पैदा की है इससे युवा प्रेरणा लें।
संत निरंकारी सेवादल के संचालक अशोक दयालु ने बताया कि बाबा हरदेव सिंह जी द्वारा समाज कल्याण हेतु जीवनपर्यन्त अनेक कार्य किये गये जिसमें स्वच्छता एवं वृक्षारोपण अभियान का आरम्भ प्रमुख है। बाबा हरदेव जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी संत निरंकारी मिशन द्वारा निरंकारी सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के निर्देशन में ‘अमृत परियोजना’ के तहत स्वच्छ जल – स्वच्छ मन का आयोजन किया गया।
संत निरंकारी सेवादल के शिक्षक योगेश कुमार ने बताया कि मथुरा के मथुरा के यमुना घाटों के अलावा फरह के केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान स्थित मखदूम घाट पर मुखी घासीराम जी तथा कोसीकलां के गोमती कुंड बालाजी घाट पर मुखी शुशील मदान के साथ स्चच्छता अभियान चलाया गया।
अभियान की समाप्ति पर घाट किनारे हुए सत्संग में निरंकारी संत श्री एस के रावत जी ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का संदेश दिया। गीतों की मधुर प्रस्तुतियाँ, सामूहिक गान, जागरूकता संगोष्ठियाँ एवं सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जलजनित रोगों तथा स्वच्छता के महत्व पर जनचेतना को प्रोत्साहित किया गया। यह पहल यह स्मरण कराती है कि जब मन निर्मल होता है, तभी प्रकृति भी स्वच्छ होती है, और जब सेवा में समर्पण जुड़ जाता है, तब समाज का नव निर्माण होता है।
उन्होंने कहा कि नदियों, झीलों, तालाबों, कुओं एवं झरनों जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन हेतु समर्पित इस जनआंदोलन ने अपने प्रथम तीन चरणों में सेवा, समर्पण और सहभागिता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है। इन्हीं उपलब्धियों से प्रेरित होकर इस चरण को और अधिक विस्तृत, संगठित एवं दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ क्रियान्वित किया गया, जिससे समाज के हर वर्ग में प्रकृति के प्रति जागरूकता और सहभागिता की सुदृढ़ चेतना का विस्तार हो। इस व्यापक विस्तार के कारण इस प्रयास ने ऐतिहासिक स्वरूप धारण किया, जिसने जल संरक्षण तथा स्वच्छता के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावशाली रूप से पहुँचाने का प्रयास किया।
जब सेवा साधना बन जाए और प्रकृति के प्रति संवेदना जीवन का मूल मंत्र हो, तब पावन संकल्प जन्म लेते हैं। सतगुरु माता जी का संदेश सदैव यही रहा है कि हम इस धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए पहले से अधिक सुंदर, स्वच्छ और संतुलित रूप में संजोकर रखें। ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान उसी पावन संकल्प का सजीव प्रतीक है, जो मानव को प्रकृति, समाज और आत्मा से जोड़ते हुए करुणा, संतुलन और सौहार्द से परिपूर्ण भविष्य की ओर मार्गदर्शन करता है। इस परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है, ताकि भावी पीढ़ियों को निर्मल जल और स्वस्थ पर्यावरण का वरदान प्राप्त हो सके।




