(राजेश बैरागी)
(गौतम बुद्ध नगर)
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई) के संबंध में मैं इतना ही जानता हूं कि यह मशीन द्वारा मानव मस्तिष्क जैसा व्यवहार करने की कोई प्रोद्योगिकी है जो आने वाले समय में मानवीय क्षमताओं पर भी राज कर सकती है। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता अभियान के बाद ए आई ऐसा तीसरा सर्वव्यापी मामला है जिसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और दिखावा मात्र से मोटा धन उलीचा जा सकता है। देश की राजधानी दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय ए आई समिट चल रहा है जिसकी चारों गूंज है।जब कानफोड़ू ढोल बज रहे हों तो ऐसे में कोई बेसुरा राग अलाप कर भी वाहवाही लूट सकता है। परंतु ए आई की यही विशेषता है जिसने चीनी कंपनी द्वारा कथित तौर पर निर्मित रोब डॉग को अपनी खोज बताने वाले गलगोटिया यूनिवर्सिटी के तथाकथित वैज्ञानिकों की फर्जी मेधा को उजागर कर दिया है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि वह ए आई के शोध और विकास पर साढ़े तीन अरब रुपए खर्च कर रही है। तो फिर किराए या चोरी के रोब डॉग को अपनी फर्जी उपलब्धि के तौर पर पेश करने की क्या आवश्यकता थी? इससे न केवल स्वयं उसका बल्कि देश के नाम को भी बट्टा लग गया है। दरअसल साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए के खर्च से ए आई के शोध एवं विकास का दावा एक तरफा है।असल मामला निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा अधिक से अधिक छात्रों को प्रवेश के लिए आकर्षित करने का होता है।मोटा शुल्क वसूल कर शिक्षा उद्योग चला रहे निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा नेक,नभ,एन ए बी एल जैसे प्रमाण पत्र हासिल करने पर पूरा जोर लगाया जाता है। ये प्रमाण पत्र जारी करने वाले सरकारी संस्थानों की सत्यनिष्ठा स्वयं सवालों के घेरे में है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा में स्थित है। निजी शिक्षण संस्थानों के हब के तौर पर जाने पहचाने ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क में गलगोटिया कॉलेज भी है जिसकी अच्छी साख है। यहीं के जीएल बजाज कॉलेज को भी उत्तम श्रेणी का निजी प्रोद्योगिकी संस्थान माना जाता है। इनके अतिरिक्त कितने निजी संस्थान हैं जिनकी शैक्षिक गुणवत्ता को लेकर शपथ उठाई जा सकती है। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क -1 व 2 में चल रहे अधिकांश निजी शिक्षण संस्थान बी टेक,लॉ और मैनेजमेंट की डिग्री बेचने वाले संस्थानों के तौर पर कुख्यात हैं। उनमें योग्य फैकल्टी तक का अता-पता नहीं मिलता। सरकारी छात्रवृत्ति को हासिल करने के लिए दलित छात्रों को दूरदराज से तलाश कर लाने के लिए एजेंटों को रखा जाता है। अध्यापकों की नौकरी उनके द्वारा कराए जाने वाले दाखिलों पर निर्भर करती है। प्राधिकरण से टोकन दर पर हेक्टेयरों में भूमि हासिल कर व्यवसायिक गतिविधियां की जा रही हैं।दो दिन पहले मैंने शारदा केयर के संचालन को लेकर पोस्ट प्रकाशित की थी। गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ए आई समिट में चीनी कंपनी द्वारा निर्मित रोब डॉग को प्रदर्शित करना शिक्षा के धंधे का ही हिस्सा है। क्यों नहीं ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्कों में चल रहे सभी शिक्षण संस्थानों में चल रही गतिविधियों की एक स्वतंत्र तथा ईमानदार एजेंसी से जांच कराई जाए? हालांकि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी की खोज भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ही की जा सकती है।



