(राजेश बैरागी)
(गौतमबुद्ध नगर)
तीन सौ करोड़ की एफडी भी प्राधिकरण के खाते में
क्या यह महज संयोग है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन महत्वपूर्ण प्राधिकरण पिछले डेढ़ वर्ष में अपने ऊपर लदे कर्जों के जाल को तोड़कर न केवल बाहर निकल आए हैं बल्कि नयी योजनाओं और ढांचागत सुविधाओं को विकसित करने के साथ प्राधिकरणों को आर्थिक रूप से भी मजबूती मिली है।इन प्राधिकरणों में नया नाम गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का है जिसने न केवल डेढ़ हजार करोड़ रुपए का कर्ज चुकाने के साथ तीन सौ करोड़ रुपए की फिक्स डिपॉजिट भी कराई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कार्यरत नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) उत्तर प्रदेश के न केवल शो विंडो माने जाते हैं बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में इन चारों प्राधिकरणों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इनमें से नोएडा प्राधिकरण अपनी स्थापना के कुछ वर्षों के बाद ही समृद्ध हो गया था। ग्रेटर नोएडा और यीडा हाल के वर्षों तक भारी कर्ज के नीचे दबे हुए थे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में दो वर्ष पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त हुए रवि कुमार एनजी ने मात्र डेढ़ वर्ष में प्राधिकरण को नोएडा प्राधिकरण, एनसीआर प्लानिंग बोर्ड व विभिन्न बैंकों के कर्ज से मुक्त करने के साथ प्राधिकरण के कोष को स्थायित्व देने पर ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पास सात हजार करोड़ रुपए की फिक्स डिपॉजिट हैं और विकास कार्यों तथा ढांचागत सुविधाओं पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।इसी प्रकार यीडा के पूर्व सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह ने क्षेत्र में निरंतर निवेश आमंत्रित कर हजारों करोड़ रुपए के कर्ज से प्राधिकरण को मुक्त कराने के साथ दस हजारी बजट वाला प्राधिकरण बनाने में सफलता प्राप्त की।इसी कड़ी में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने भी अपना स्थान बनाया है।15 मार्च 2024 को उपाध्यक्ष का कार्यभार संभालने के समय आईएएस अतुल वत्स के समक्ष एक बड़ी चुनौती जीडीए की दीन-हीन आर्थिक स्थिति को वापस पटरी पर लाने की थी। जीडीए पर लगभग एक हजार करोड़ रुपए का कर्ज चल रहा था जबकि प्राधिकरण की वर्ष 2020-25 के दौरान 820.66 करोड़ रुपए औसत आय थी। उपाध्यक्ष अतुल वत्स के नेतृत्व और सचिव राजेश कुमार सिंह के निर्देशन में जीडीए ने 2024-25 वित्तीय वर्ष में 1653.24 करोड़ रुपए आय अर्जित की। इससे प्राधिकरण ने इंडियन बैंक का 800 करोड़ और एनसीआर प्लानिंग बोर्ड का 165 करोड़ रुपए का कर्ज वापस कर प्राधिकरण को कर्ज मुक्त करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। इसके साथ ही प्राधिकरण को आर्थिक रूप से स्थायित्व प्रदान करने के लिए तीन सौ करोड़ रुपए की एफडी भी कराई। उल्लेखनीय है कि पिछले पांच वर्षों में जीडीए के उपाध्यक्ष पद पर वाजपेई , कृष्णा करुणेश, राकेश कुमार सिंह व इंद्र विक्रम सिंह आदि अधिकारी आसीन रहे हैं। राकेश कुमार सिंह वर्तमान में यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यीडा के सीईओ हैं जबकि कृष्णा करुणेश नोएडा प्राधिकरण में बतौर एसीईओ नियुक्त किए गए हैं। वर्तमान जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने प्राधिकरण की आय और विकास कार्यों को बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 25 वर्षों बाद आवासीय भूखंडों की एक बड़ी योजना हरनंदीपुरम घोषित की है जबकि आवंटियों की सुविधा के लिए ‘पहल’ नामक पोर्टल शुरू किया गया है।




