(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार
जिला पंजीयक कार्यालय बना दलाली का अड्डा
रिश्वत देकर हो रही है अवैध रजिस्ट्रियां
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला पंजीयन कार्यालय में पदस्थ उपपंजीयको के काले कारनामे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर जिन उपपंजीयको के खिलाफ थाने में एफआईआर तो कुछ के खिलाफ विभागीय जांच जारी होने के बाद भी आज सीट पर जमे हुए हैं और मोटा लेनदेन कर जमकर नियम विरुद्ध रजिस्ट्रियां संपादित कर रहे हैं
पहला मामला है सेवानिवृत हो चुके उप पंजीयक हरिओम शर्मा का जिन्होंने प्रतिबंधित जमीनों की चार रजिस्ट्रियां संपादित की थी मामला संज्ञान में आने पर उनके विरुद्ध लोकायुक्त में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है लेकिन हरिओम शर्मा के द्वारा की गई रजिस्ट्रियों को आज तक निरस्त या शून्य कराने की कार्यवाही विभाग या प्रशासन के द्वारा नहीं की गई है
दूसरा मामला उपपंजीयक के एन वर्मा का है केएन वर्मा के द्वारा भी चिटफंड कंपनी गरिमा रियल एस्टेट की रजिस्ट्री मोटा लेनदेन कर संपादित की गई थी मामला संज्ञान में आने पर उन्होंने तथ्यों को छुपाने का हवाला देकर गरिमा रियल एस्टेट के संचालक शिवराम कुशवाह के खिलाफ एफ आई आर तो करा दी लेकिन रजिस्ट्री निरस्त कराने की कोई कार्यवाही नहीं की है साथ ही विभाग द्वारा या प्रशासन के द्वारा वर्मा के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई इसी प्रकार बर्मा के द्वारा डबरा की तीन रजिस्ट्रियों के मामले में तीन एफ आई आर यूनिवर्सिटी थाने में दर्ज हैं इसकेबावजूद के एन वर्मा आज भी सीट पर धड़ल्ले से मोटा लेनदेन कर अवैध रूप से रजिस्ट्री संपादित कर रहे हैं गौरतलाव है कि इसी प्रकार उप पंजीयक मानवेंद्र भदोरिया के द्वारा भी प्रतिबंध करोडो की जमीन की रजिस्ट्री संपादित कर दी गई थी जिसकी शिकायत होने पर भदौरिया को निलंबित कर दिया गया था लेकिन कुछ ही समय में मोटा लेनदेन कर उपपंजीयक मानवेंद्र भदोरिया बहाल हो गए हैं और आज भी यहां कार्यरत है आज तक भदोरिया के द्वारा उक्त रजिस्ट्री को शून्य अथवा निरस्त कराने की कार्यवाही पूर्ण नहीं की गई है इसी प्रकार उपपंजीयक कपिल व्यास के द्वारा भी एक चिटफंड कंपनी की प्रतिबंध करोड़ों की संपत्ति की रजिस्ट्रियां संपादित की गई है लेकिन शिकायत के अभाव में उनकी भी जांच या कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है सूत्रों की माने तो उपपंजीयक अर्चना दिनकर के द्वारा भी मोटी रकम लेकर वसीयत के आधार पर रजिस्ट्री संपादित कर दी गई है तो कुल मिलाकर यह कहना गलत नहीं होगा कि ग्वालियर में पंजीयन कार्यालय भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का अड्डा बना हुआ है आखिरकार प्रशासन लोकायुक्त और ईओडब्लू क्यों मूकदर्शक बने हुए हैं
सवाल यह भी उठना लाजिमी है कि जिला पंजीयक और डीआईजी पंजीयन रावत भी भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल होकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं ग्वालियर विकास प्राधिकरण की अनुबंधित जमीन हो या किसी भी मामले में प्रतिबंधित जमीन हो अवैध कॉलोनी हो सभी प्रकार की रजिस्ट्रियां यहां मोटा लेनदेन करके संपादित की जा रही है और प्रशासन मूकदर्शक बनकर देख रहा है l अब देखना यह होगा कि उक्त मामले में कोई कार्यवाही की जाती है या नहीं l




