(आलोक तिवारी)
(मथुरा)
खेला करने में लेखाधिकारी से लेकर अनेकों पटल सहायको के जेब हुए हैं भारी
उच्च न्यायालय इलाहाबाद के द्वारा 27 जनवरी को एक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए आदेश दिया गया था कि प्रदेश भर के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय में जितने भी तदर्थ प्रिंसिपल कार्यरत है उनकी जांच होने के बाद ही वेतन दिया जाए।
उक्त आदेश के क्रम मे शिक्षा निदेशक माध्यमिक, अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने प्रदेश के सभी सयुक्त शिक्षा निदेशक एवं जिला विद्यालय निरीक्षक को जांच करने के आदेश निर्गत किए। उक्त आदेश मिलने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक रविन्द्र सिंह ने काफी दिनों बाद गत 21 फरवरी को सभी विद्यालयों के प्रबंधकों से 14 कालम में सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
उक्त आदेश की कॉपी लेखाधिकारी माध्यमिक शैलेन्द्र सिंह सहित अपने कार्यालय के समस्त पटल सहायक एवं लेखाकारों को भी उपलब्ध कराई गई। हाई कोर्ट के उक्त आदेश की जानकारी होने के बाद भी जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय के पटल सहायक ने बिना जांच हुए तदर्थ प्रिंसिपलो का पूरा वेतन लगाते हुए वेतन बिल बना दिए गए ओर लेखाकारों ने विधि विरुद्ध बनाए गए बिलों को चैक कर लेखाधिकारी के पास हस्ताक्षर होने के लिए भी भेज दिया।
जबकि लेखाधिकारी को अवैध रूप से निर्मित एवं चैक किए गए बिलों को रोकने की जिम्मेदारी थी। शैलेन्द्र सिंह का कहना है कि वेतन बिल जिला विद्यालय निरीक्षक की निगरानी मे बनाए जाते है और उनकी ही निगरानी में चैक किए जाते है ,उसके बाद ही मेरे पास अंतिम समय हस्ताक्षर के लिए आते है।
जिनको मैं विधिक प्रकिया मानते हुए पारित कर देता हूं ,यदि उच्च न्यायालय की अवमानना हो रही हैं तो इसमें जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा हो रही हैं क्योंकि स्पष्ट आदेश वेतन रोकने के नहीं दिए हैं । जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि जब सभी को उक्त की जानकारी है कि मेरे पास यूपी बोर्ड ओर संस्कृत बोर्ड परीक्षा की दोहरी जिम्मेदारी है, ऐसे में लेखाधिकारी द्वारा अवैध बिल पास किए जाने के प्रकरण लगातार सामने आ रहे हैं। कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि उक्त हाई कोर्ट के आदेश पारित होने के बाद अनेकों तदर्थ प्रिंसिपल ने जुगाड़ कर अवशेष बिल लेखाधिकारी से पास करवा लिए थे यदि उच्च स्तरीय जांच हो तो करोड़ो रुपए का खेल सामने आ सकता हैं।




