(विक्रम सिंह करणोंत)
(सिरोही)
प्रभारी मंत्री केके बिश्नोई से IFWJ ने कहा कलेक्टर ने कोर्ट के आदेश के बावजूद भी वरिष्ठ पत्रकार का तोड़वाया रेस्टोरेंट
मंत्री को पत्रकारों ने बताया कि सवा करोड़ का किया गया नुकसान और कलेक्टर को किया जाए सस्पेंड
जैसलमेर कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) ने आज प्रभारी मंत्री केके बिश्नोई को मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर जैसलमेर कलेक्टर पर मनमानी, हठधर्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन के गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रभारी मंत्री को ज्ञापन देते हुए संगठन के प्रभारी सचिव विक्रमसिंह करणोत ने मंत्री केके बिश्नोई को दो टूक बातचीत करते हुए कहा कि किसी कंपनी विशेष का नुमाइंदा बनकर जैसलमेर कलेक्टर जो अनुचित कार्रवाई कर रहा है वो बर्दाश्त योग्य नहीं हैं और ये लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक विषय हैं। मामले में वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र सिंह राठौड़ के साथ कथित प्रशासनिक अन्याय को लेकर कलेक्टर के निलंबन की मांग तेज हो गई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि राठौड़ पिछले करीब 22 वर्षों से वैध अनुमति के साथ “स्वाद रेस्टोरेंट” का संचालन कर रहे थे, लेकिन नवंबर 2025 में बिना किसी लिखित आदेश के महज मौखिक रूप से तीन दिन में रेस्टोरेंट खाली करने के निर्देश दे दिए गए।
कोर्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई!
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया गया है कि न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी। 23 दिसंबर को प्रशासन ने भारी अमले के साथ पहुंचकर कमर्शियल गैस सिलेंडर जब्त किए। किचन को सील किया, लाइसेंस नवीनीकरण रोक दिया। पर्यटकों को हतोत्साहित किया। जिसे पत्रकार संगठन ने “दमनात्मक कार्रवाई” बताया है।
JCB से तोड़ा रेस्टोरेंट, करोड़ों का नुकसान
मामला 17 मार्च को उस समय और गंभीर हो गया जब आरोप है कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी में रेस्टोरेंट की दीवार तोड़कर दो JCB मशीनों से अंदर से ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई में करीब सवा करोड़ रुपए के नुकसान का दावा किया गया है। ज्ञापन में इसे “सुनियोजित तरीके से एक स्थापित व्यवसाय खत्म करने की साजिश” बताया गया है।
“पत्रकार की आवाज दबाने की कोशिश”
IFWJ का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम एक निर्भीक पत्रकार की आवाज दबाने और उन्हें आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की मंशा से किया गया। संगठन ने इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। मुख्यमंत्री से ये प्रमुख मांगें
ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो। जांच तक सभी कार्रवाई पर तुरंत रोक लगे। दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो। जैसलमेर कलेक्टर को तत्काल निलंबित किया जाए। उपेंद्र सिंह राठौड़ को आर्थिक नुकसान की भरपाई व आजीविका बहाली दी जाए।
इस मुद्दे ने अब प्रदेशभर में तूल पकड़ लिया है। पत्रकार संगठनों में आक्रोश बढ़ रहा है और इसे लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है। बड़ा सवाल ये हैं कि क्या प्रशासन कोर्ट आदेशों की भी अनदेखी कर रहा है? क्या एक पत्रकार को निशाना बनाकर कार्रवाई की गई? क्या लोकतंत्र में प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग हो रहा है? यह मामला अब सरकार के लिए परीक्षा बनता जा रहा है, अब देखना दिलचस्प होगा कि कार्रवाई होती है या विवाद और गहराता है।
सिरोही के प्रभारी मंत्री केके बिश्नोई को ज्ञापन देने के वक्त सिरोही जिलाध्यक्ष अशोक कुमावत, जितेश रावल, हरिपाल सिंह उखरड़ा, मगन प्रजापत, हडमत सिंह, हरीश गोयल आबूराज, प्रवीण पुरोहित, रमेश माली, राकेश कुमावत सहित कई पत्रकार मौजूद रहे।



