(संजय राय)
(नई दिल्ली)
पैसा वापस पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं मूंगिपा इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के निवेशक
मध्यम वर्ग के लोग कम समय में ज्यादा पैसे की चाहत में मेहनत से हासिल की गई अपनी गाढ़ी को अवैध तरीके से शेयर बाजार के समांतर खड़े हो चुके डब्बा ट्रेडिंग के जाल में फंसकर पलभर में गंवा दे रहे हैं। मूंगिपा इन्वेस्टमेंट लिमिटेड में निवेश का ऐसा ही एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।
मूंगिपा इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के निदेशकों सुधीर, मधुर और शिवकुमार पर आरोप है कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों, मित्रों और सामाजिक दायरे के लोगों को शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ऑफ मार्केट, डिब्बा सिस्टम में फंसाया। जब पीड़ितों ने न्याय के लिए दरवाजा खटखटाया तो उन्हें हर स्तर पर विफलता का सामना करना पड़ा। यहां तक कि पुलिस ने दस्तावेजी सबूत नहीं होने का हवाला देकर एफआईआर तक दर्ज करने से इनकार कर दिया।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस मुद्दे को हालिया समाप्त हुए संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में भी उठाया गया था, जहां डिब्बा ट्रेडिंग के सन्दर्भ में मूंगिपा इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का नाम स्पष्ट रूप से सामने आया। इसके बावजूद आज तक यह स्पष्ट नहीं है कि सेबी ने क्या कार्रवाई की।
निवेशकों का आरोप है कि मूंगिपा इन्वेस्टमेंट लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, कोलकाता, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ सहित कई राज्यों से जुड़े रिश्तेदारों को अधिक धन का लालच देकर उनके पैसों को औपचारिक बैंकिंग और डीमैट चैनलों के बजाय नकद रूप में इकट्ठा किया। शिकायतों के अनुसार इस धन का उपयोग कथित रूप से शेयर बाज़ार निवेश के बजाय सट्टेबाज़ी, जुए और निजी खर्चों में किया गया, जबकि निवेशकों को फर्जी रिटर्न स्टेटमेंट दिखाकर गुमराह किया गया।
निवेशक पिछले लंबे समय से अपनी रकम वापस पाने के लिए निदेशकों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन संबंधित निदेशक अपने आवासों से गायब हैं और संपर्क से बचते फिर रहे हैं। यह भी आरोप है कि लेन-देन को जानबूझकर कैश और परतदार तरीकों से किया गया, जिससे नियामक एजेंसियों जैसे सेबी, ईडी और सीबीआई की निगरानी से बचा जा सके। बढ़ती शिकायतों के बीच अब निवेशकों और सामाजिक संगठनों द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग तेज़ हो गई है।




