लेखक: मनोज श्रीवास्तव
भाजपा सरकार के लिये एक बार फिर संकटमोचक बने उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य!
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव की गर्मी सिर चढ़ कर बोल रही थी।काशी में भगवान विश्वनाथ के मंदिर की भव्यता के साथ श्रद्धालुओं को सकरी गलियों से निजात दिला कर शानदार कॉरिडोर के रास्ते मंदिर से गंगा जी के घाटों तक पहुंचाने की नियत से सरकार दिन-रात मार्ग, मंदिर, भवन आदि के पुनर्निर्माण करवा रही थी। एक शोर उठा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के नाम पर भाजपा सरकार प्राचीन मंदिरों को ध्वस्त करवा रही है। विपक्ष ने न आव देखा -न ताव देखा, पूरा ताकत लगा कर मुद्दा लेकर उड़ गया। भाजपा पर सब हमलावर हो गये। जो मंदिर निर्माण रोकने के लिये हजारों कारसेवकों की हत्या किये और जो उनकी हत्यारी नीतियों का समर्थन किये सब एक साथ आकर मुखर हो गये। भाजपा में भी बड़े-बड़े नेता तत्काल उस मुद्दे पर सटीक उत्तर नही दे पा रहे थे। मंदिर टूटने की बात उड़ाने में बहुत सारे स्थानीय लोग भी शामिल थे, जो समाचार चैनलों, समाचार पत्रों के माध्यम से यह संदेश दे रहे थे कि प्राचीन मंदिर ध्वस्त कर रही है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर काशी के स्थानीय लोग भी भाजपा को अपने शब्दों और तथ्यों से सही नहीं साबित कर पा रहे थे।फर्जी आरोपों में घिर कर पार्टी एकदम बैकफुट पर थी। उसी दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री केशव प्रसाद मौर्य का काशी दौरा लगा। केशव मौर्य काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान का रुद्राभिषेक करके ज्यों ही गंगा मइया में बाजरे ( जल पर्यटन वाली बड़ी नाव) पर किसी चैनल के कार्यक्रम के लिये निकले तभी एक नम्बर का दावा करने वाले चैनल के स्टेट हेड और उनके कैमरा मैन ने केशव मौर्य को रोक लिया। कैमरा मैन ने आस-पास के ऐसे मंदिरों को दिखाना चालू किया जो वर्षों से जमींदोज थे। इलेक्ट्रॉनिक चैनल के स्टेट हेड द्वारा उनके नेशनल ब्यूरो ने पुछवाया कि भाजपा कॉरिडोर के नाम पर सैकड़ो मंदिर को ध्वस्त कर रही है। यह कौन सा विकास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र होने के कारण पूरे देश में समर्थक व विरोधी सब स्थित पर नजर गड़ाये रहते थे। भगवान की ऐसी कृपा हुई कि लाइव कैमरे पर केशव मौर्य ने जो उत्तर दिया उससे पार्टी प्रायोजित हमले से उबर गयी। उसी लाइन को पकड़ कर भाजपा कार्यकर्ता मुखर हो गये। केशव मौर्य ने कहा “हम मंदिर बनाने वाले लोग हैं, मंदिर तोड़ने वाले नहीं”। उन्होंने कहा आप कैमरा लगाओ, वर्षों से जमीन में दबे मंदिर, भगवान के विग्रह ऊपर आ गये। यह भगवान की ही इच्छा है। हम सभी मंदिरों का जीर्णोद्धार करेंगे। अब श्रद्धालुओं को भगवान ने स्वयं दर्शन देने का मन बना लिया है। उसी समय यह रहस्योद्घाटन हुआ था कि उनमें अधिकांश वह मंदिर है जिन्हें उक्त संपत्ति के स्वामियों ने सरकार से मुआवजा लेकर छोड़ दिया। पीढ़ी दर पीढ़ी से बिना वैद्य कागज के किरायेदारी को आधार बना कर कब्जा किये थे। चैनल के रिपोर्टर ने पूछा आप जमीन से निकलने वाले इन मंदिरों में कितने का जीर्णोद्धार करायेंगे। केशव मौर्य ने पूरे आत्मविश्वास से बोला सभी मंदिरों का जीर्णोद्धार करेंगे।जिनके पास अपनी प्रॉपर्टी का कागज है वह सामने आवें। फिर क्या इसी के बाद भाजपा मुखर हो गयी और विपक्ष कहां दुबक गया पता नहीं चला।
माघ मेला 2026 में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद व स्थानीय प्रशासन के विवाद पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मुखर हिंदुत्ववादी नेता की तरह भाजपा की योगी आदित्यनाथ की सरकार को घेर रहे हैं। बता दें कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते यही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस ने काशी की सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। दर्जनों समर्थक बुरी तरह घायल हुये थे।आज अखिलेश यादव शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के सम्मान में योगी सरकार का मुखर विरोध कर प्रखर हिंदुत्व की राजनीति कर रहे हैं। बिकरु कांड के पुलिस मुठभेड़ में मारे गये बदमाश अमर दुबे की नवविवाहिता पत्नी खुशी दुबे ने अपनी माँ के इलाज के लिये आवाज उठा कर ब्राह्मणों में अपनी पैठ बनाने की हर कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच विधानसभा के शीत सत्र के दौरान ब्राह्मण विधायकों के बैठक का मुद्दा उठा। सपा की ओर से शिवपाल यादव ने कहा कि हम सबको टिकट देंगे, ब्राह्मण विधायक समाजवादी पार्टी में शामिल हो जांय। केशव मौर्य ने सभी ब्राह्मण विधायकों से संपर्क किया उसके बाद अखिलेश को करारा जवाब देते हुये कहा कि कई सपा विधायक हमारे संपर्क में हैं। अखिलेश यादव को हर बार यही दर्द होता है कि जब-जब वह पीडीए, पिछड़े व अन्य मुद्दों पर भाजपा को घेरते हैं केशव उनके हर वार को तार-तार करके ध्वस्त कर देते हैं। गुरुवार को माघ मेले में बसंत पंचमी के स्नान पर्व के पूर्व आजमगढ़ में गोरखपुर क्षेत्र के अध्यक्ष सहजानंद राय के कार्यक्रम में पहुंचे उपमुख्यमंत्री केशव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से त्रिवेणी स्नान के लिये विनती पूर्वक आग्रह किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम करता हूं और उनसे कहना चाहता हूं कि वह संगम स्नान करके अपना विरोध समाप्त करें। इसके अलावा मीडिया के सवाल पर डिप्टी सीएम ने यह भी आश्वासन दिया है कि उनके साथ हुई घटना की जांच की जायेगी और कार्रवाई होगी। माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर रोके जाने को लेकर विवाद हुआ था। जिसके बाद यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज उसी पर डिप्टी सीएम ने अविमुक्तेश्वरानंद से प्रणाम विवाद को खत्म करने की अपील की है।
बता दें कि माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से कथित तौर पर रोके जाने को लेकर शुरू हुआ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष का दावा है कि पुलिस ने स्वामी जी को पालकी से उतरकर स्नान घाट पर जाने को कहा। लेकिन ऐसा न करने पर पुलिस ने उनके समर्थकों को मारा-पीटा। उनके 15 लोग घायल हुए हैं। मेला क्षेत्र व स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थक बैरिकेट तोड़कर संगम नोज पर आए और भगदड़ की स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया। स्नान के लिए किसी ने किसी को नहीं रोका और किसी भी साधु संत का अपमान नहीं किया गया।”
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह उनके निजी विचार हैं)




