(मनोज श्रीवास्तव)
(लखनऊ)
CJM विभांशु सुधीर ने सम्भल के तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत कई पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज करने का दिया था आदेश
प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट के मंगलवार के प्रशासनिक आदेश के अनुसार संभल हिंसा मामले में बीते सप्ताह तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का आदेश देने वाले जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया है। 20 नवंबर 2024 को संभल की स्थानीय जामा मस्जिद का सर्वे करने के दौरान घटित हिंसा के एक पीड़ित की याचिका पर सुनवाई करते हुए विभांशु शेखर ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी सहित 20 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। संभल कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस से एफ़आईआर दर्ज कर एक हफ़्ते में रिपोर्ट पेश करने को भी कहा गया। लेकिन संभल पुलिस द्वारा सीजेएम कोर्ट के आदेश को हाइकोर्ट की अदालत में चुनौती देने की बात भी कही गई है। संभल हिंसा और अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिस कर्मियों पर एफआईआर के आदेश के बाद सपा, भाजपा सरकार और पुलिस के बीच तीखी बयानबाजी चल रही थी और पुलिस राजनीतिक दलों और जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है, जज का तबादला अब बोनस रहेगा। पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी फिलहाल फिरोजाबाद में एडिशन एसपी के पद पर तैनात हैं और उनको योगी सरकार का ‘सिंघम’ कहा जाता था, और अब देखना यह है कि क्या वह ऊंची अदालत से राहत पाते हैं या नहीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा मंगलवार शाम को एक दर्जन से अधिक न्यायिक अधिकारियों के विभिन्न जनपदों में अलग अलग न्यायिक पदों पर तबादले किए गए। हाइकोर्ट की तबादला सूची में विभांशु सुधीर को संभल से सीनियर सिविल डिवीजन जज के पद पर सुल्तानपुर भेजा गया। वहीं चंदौसी कोर्ट के सीनियर डिवीजन सिविल जज आदित्य सिंह को संभल के नए सीजेएम की नियुक्ति मिली है। मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन जिला जज स्तर समेत 14 न्यायिक अधिकारियों के तबादले की सूची इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मंजीत सिंह श्योराण ने यह अधिसूचना जारी की है।
संभल पुलिस पहले ही स्पष्ट कह चुकी है कि अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिस कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश के खिलाफ संभल पुलिस ऊपरी अदालत में अपील करेगी। संभल हिंसा घटना से जुड़े क्रम में 24 नवंबर को पापड़ी बेचने गए युवक को गोली लगी थी। स्थानीय आलम के पिता ने पिछले दिनों संभल कोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से पुलिस कर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने कहा है कि उसका बेटा 24 नवंबर 2024 को ठेले पर बिस्किट बेचने निकला था, तभी पुलिस की मौजूदगी में फायरिंग हुई, जिसमें उसके बेटे आलम को गोली लगी। कई अस्पतालों में चोरी छिपे इलाज कराने से किसी तरह बेटे की जान बच सकी। याचिकाकर्ता का दावा है कि अपने घायल बेटे की जान बचाने के बाद उसने पुलिस की फायरिंग पर आपत्ति जताते हुए ज़िले के कप्तान से लेकर उच्चाधिकारियों तक के पास गया लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई शिकायत दर्ज नहीं की गई। बाद में सीधे कोर्ट जाने पर संभल जिला कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस से एफ़आईआर दर्ज कर एक हफ़्ते में रिपोर्ट पेश करने को कहा था, जिससे पुलिस विभाग में हड़कंप होने की स्थिति बन गई। हालांकि संभल पुलिस द्वारा साफ कहा गया कि गोली पुलिस ने नहीं चलाई थी।
सीजेएम के आदेश बाद अखिलेश यादव ने एक्स पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा पहले अफसरों का उपयोग करती है, फिर छोड़ देती है, और कोर्ट के आदेश को अवैध बताने पर सवाल उठाए हैं। बयानबाजी के बीच संभल से सपा सांसद एसटी हसन ने कहा कि पुलिस पर एफआईआर को चुनौती देना अपराधियों को बचाने जैसा है। नवंबर 2024 में एएसआई सर्वे के बाद भड़की थी हिंसा संभल ज़िले में जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने के दावे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए संभल कोर्ट ने 19 नवंबर 2024 को एएसआई से जामा मस्जिद का सर्वे करने का आदेश दिया था। एएसआई ने उसी दिन सर्वे शुरू किया लेकिन शाम होने की वजह से काम पूरा ना हो सका। इसके बाद 24 नवंबर 2024 को जब एएसआई की टीम सर्वे करने पहुंची तो बाहर अचानक भीड़ इकट्ठी हो गई और पथराव शुरू हो गया पुलिस प्रशासन को स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा था।




