लेखक~सुभाषचंद्र
जिनकी डिग्री फर्जी निकलें, उनके फैसले खारिज करने का ऐलान हो
♂÷जजों को Assignment देने का
विरोध करने वाले
जस्टिस दीपक गुप्ता को जांच का
काम क्यों दिया गया।
सबसे पहले बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज दीपक गुप्ता की जिन्होनें थोड़े दिन पहले 19 फरवरी, 2023 की Live Law की रिपोर्ट के अनुसार एक बयान दिया था कि –
”We can’t have Independent Judiciary If Judges Look For Post – Retirement Appointments”
इसका मतलब, उन्हें स्वयं भी सुप्रीम कोर्ट या सरकार से कोई Assignment नहीं लेना चाहिए लेकिन उन्होंने इसे लेने से मना भी नहीं किया – शायद उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने खुलेआम कॉलेजियम का समर्थन करने के लिए इनाम दिया गया है।
अब चलते हैं मुख्य मुद्दे पर – CJI चंद्रचूड़, जस्टिस पीवी नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने 10 अप्रैल, 2023 के फैसले में कहा कि 25 लाख वकीलों के Law Practice के Certificates और Educational Degrees की जांच करने और सत्यापन का काम किया जायेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 8 सदस्यों की कमेटी गठित कर दी जिसके अध्यक्ष होंगे रिटायर्ड जस्टिस दीपक गुप्ता – इनके अलावा अन्य सदस्य होंगे ➖
-दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज राजेंद्र मेनन;
-इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज अरुण टंडन;
-वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी;
-वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह
और 3 सदस्य Bar Council of India (BCI) नामित करेगी –
समिति को 31 अगस्त तक status report देने के लिए कहा गया है।
दरअसल वर्ष 2015 में BCI ने असली वकीलों की पहचान के लिए BCI Certificate and Place of Practice (Verification) Rules 2015 नियम जारी किये थे जिन्हें कोर्ट में चुनौती दी गई और सुप्रीम कोर्ट ने इस जांच के आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के अवलोकन के अनुसार वकीलों की संख्या Material Time पर 16 लाख होनी चाहिए जो इस समय 25.70 लाख है। BCI ने कोर्ट को बताया कि 25.70 लाख वकीलों में से 7.55 लाख के ही सत्यापन के forms प्राप्त हुए थे, इसके अलावा 1.99 लाख Senior Advocates और Advocates – on – Record से प्राप्त हुए कुल मिलाकर 9.22 लाख form प्राप्त हुए।
BCI ने सबसे बड़ी बात कही जिसे अदालत ने भी गंभीरता से नोट किया कि “बिना certificates और degrees के सत्यापन के वकील राज्यों की बार कौंसिल के सदस्य भी बनते रहे हैं और वे Judicial Officer के पद पर भी रहे हैं।
गहन मनन करिए यह बहुत ही खतरनाक बयान है, BCI क्योंकि Judicial Officers हाई कोर्ट में जज भी बनाए जाते हैं जिसका मतलब है कुछ फर्जी डिग्री वाले भी जज बने होंगे।
इसलिए सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट और हर हाई कोर्ट के वर्तमान एवं रिटायर्ड जज के Certificates और Degree की जांच होनी चाहिए और यदि कोई ऐसा जज मिले जिसके certificate और degree फर्जी मिले तो उनके दिए हुए फैसले रद्द करने की घोषणा आज ही सुप्रीम कोर्ट को कर देनी चाहिए।
BCI को भी बताना चाहिए कि जो 9.22 लाख फॉर्म सत्यापन के लिए प्राप्त हुए, उन्हें देख कर कितने वकील “फर्जी” मिले और उनकी लिस्ट जारी करनी चाहिए। जिससे लोग उन्हें अपने केस दे कर पैसा बर्बाद न करें जिनके दस्तावेज फर्जी पाए गए उन पर Criminal Case भी दर्ज होने चाहिए और ED से उनकी संपत्तियों की जांच भी होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं बताया है कि जस्टिस दीपक गुप्ता और जांच समिति के अन्य सदस्यों को कितना पैसा (Honorarium) मिलेगा और वह किस खाते से दिया जाएगा,क्या देश की मेहनकश जनता व टैक्सपेयर्स के पैसे बजरिये केन्द्र सरकार के ख़ज़ाने से दिया जाएगा या अन्य मद से यह भी जनहित में स्पष्ट होना आवश्यक है पारदर्शिता के लिए।
अब जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट में पैसे के लेनदेन का CAG से Forensic Audit कराया जाए।

(लेखक सुभाष चन्द्र के यह अपने विचार हैं)




