(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
हाउसिंग बोर्ड के गालियारों में चर्चा, तृप्ती श्रीवास्तव को भेंट चढ़ाकर नियम विरुद्ध अपर आयुक्त बने हैं महेंद्र सिंह
पिता ओबीसी और पुत्र एसटी, सभी शिकायतों की जांच डस्टविन में!
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के अभिमत है अलग-अलग
मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मंडल वाकई में अजब गजब है, यहां शासन के नियम कायदे खूँटी पर टंगे रहते हैं।
सूत्र बताते हैं कि हाउसिंग बोर्ड में करीब एक दर्जन लोग फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे हैं वो भी उच्च पदों पर।
अभी हाल ही में “तहलका न्यूज वेबसाइट” ने प्रदेश के स्थापना बाबू उमाकांत बाथम के फर्जी जाति प्रमाण पत्र का खुलासा किया था कि बाथम ओबीसी हैं और एसटी के कोटे से नौकरी कर रहे हैं यानि बाथम का जाति प्रमाण फर्जी है।
आज तहलका न्यूज वेबसाइट महेन्द्र सिंह,प्रभारी अपर आयुक्त 1 के फर्जी अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र के बारे में बता रहा हैं।
महेंद्र सिंह कनासिया जाति से आते हैं कनासिया जाति मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग में आती है फिर महेंद्र सिंह भिलाला कैसे बन गए यह बड़ा सवाल है। महेंद्र सिंह द्वारा नौकरी पाने के लिए कूट रचना कर एसटी जाति का फर्जी जाति प्रमाण बनवाया और हाउसिंग बोर्ड में नौकरी हासिल कर अपर आयुक्त तक पहुंच गए जबकि इनको होना चाहिए था इस फर्जी कार्य के लिए जेल में।
महेन्द्र सिंह भिलाला पुत्र बालाराम कनासिया द्वारा नौकरी हेतु प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र दिनांक 05/05/1993 को बनवाया जो कि दण्डाधिकारी तहसील इन्दौर द्वारा जारी किया गया है। उक्त प्रमाण पत्र मतहसीलदार सिहोर के क्रमांक/आर/86 दिनांक 29/09/1986 को जारी किया है।

लोक सूचना अधिकारी एवं तहसीलदार,तहसीलदार इन्दौर द्वारा जारी पत्र कमांक 183 इन्दौर दिनांक 20/06/2013 की प्रति में उल्लेख है कि आवेदक द्वारा सूचना के अधिकार के अन्तर्गत आवेदन प्रस्तुत में महेन्द्र सिंह कनासिया के जाति प्रमाण पत्र के संबंध में जानकारी चाही गई। परंतु हमारे कार्यालय में आपके द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाण पत्र की छाया प्रति उपलब्ध की गई है उसकी जांच करने पर कार्यालय में उक्त प्रमाण उपलब्ध नहीं होने से आपको दिया जाना संभव नहीं है।
तहसीलदार ग्रामीण सिहोर द्वारा जारी पत्र कमांक 22 दिनांक 25/01/2023 की प्रति में उल्लेख है कि आवेदक द्वारा पुनःसूचना के अधिकार के तहत पत्र दिनांक 23/01/2023 लगाकर इसी संबंध में जानकारी चाही गई और आवेदन पत्र के साथ जाति प्रमाण पत्र की फोटो कॉपी लगाई जो तहसीलदार इन्दौर से दिनांक 05/05/1993 को जारी किया गया था।
लोक सूचना अधिकारी ने पुनः जबाब दिया कि इस कार्यालय की दायरा पंजी की जांच की गई ,इसमें प्रकरण क्रमांक 86/बी-121/86-87 पर ग्राम सोन्डा का ईमली फसल नीलामी का प्रकरण एवं वर्ष 85-86 में प्रकरण कमांक 86/बी-121/85-86 में श्रीमती करीना बी पत्नी अकबर खां ग्राम काहेरी कदीम का दर्ज होना पाया गया है ना कि जाति प्रमाण पत्र का सूचनार्थ प्रेषित है।
तहसील ग्रामीण सिहोर म.प्र. द्वारा जारी पत्र 68 दिनांक 10/03/2023 में उल्लेखित है कि वर्ष 1985-86 एवं 1986-87 की बी-121 की दायरा पंजी की सत्यापित प्रति पत्र के साथ संलग्न कर प्रस्तुत है। उक्त पंजी दायरा वर्ष 1985-86 का 86 पर श्रीमती करीना बी का नाम अंकित है तथा दायरा पंजी नं. 1986-87 क्रमांक 86 ग्राम सोन्डा का ईमली फसल अंकित है। “न” कि श्री महेन्द्र सिंह पुत्र बालारांम कन्नासिया का अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र इन पत्रों से स्पष्ट है कि महेंद्र सिंह का अनुसूचित जन जाति का प्रमाण पत्र फर्जी है!
सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट जूनी इंदौर द्वारा जारी पत्र क्रमांक 3208 दिनांक 27/03/2024 के द्वारा आवेदक ने महेन्द्र सिंह पुत्र बालाराम कनासिया का भिलाला जाति प्रमाण पत्र माँगा जिसका प्रकरण कमांक/86/ दिनांक 29/09/86 जो तहसीलदार सिहोर द्वारा पूर्व में जारी होना बताया गया । एवं तहसीलदार तहसील इन्दौर द्वारा जारी दिनांक 05/05/93 का जाति प्रमाण पत्र इस कार्यालय से जारी नहीं किया है इसलिए जानकारी दिया जाना संभव नहीं है।
इसलिए लोक सूचना अधिकारी ने आवेदक को बताया कि कि म.प्र. राजपत्र दिनांक 28/04/2017 म.प्र. गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल संगठनात्मक संरचना एवं भर्ती विनियम, 2016 क्रमांक 376-क.प्र. 1-मण्डल-2017 भोपाल, दिनांक 12 अप्रैल 2017 अनुसूची-एक विनियम- 5 में पदों का वर्गीकरण, वेतनमान एवं पदस्थापना अनुक्रमांक 2 अपर सिविल स्वीकृत पदों की संख्या 3 है। सोचने की बात कि जब शासन द्वारा अपर आयुक्तों के 3 पद ही मंडल में स्वीकृत हैं तो उपायुक्त महेंद्र सिंह के लिए चौथा पद बगैर पैसे के तो बनाया नहीं होगा।
सूत्र बताते हैं कि उपायुक्त महेन्द्र सिंह ने अपर आयुक्त बनने के लिए 10 लाख की भेंट श्रीमती तृप्ति श्रीवास्तव मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को चढ़ाई तथा तत्कालीन आयुक्त मनीष सिंह को गुमराह कर आदेश क्रमांक जी-269/का.प्र. 1/ मण्डल / 2024 भोपाल दिनांक 11/11/2024 जारी कराया गया है। जिसके अनुसार महेन्द्र सिंह को उपायुक्त से अपर आयुक्त 1 का प्रभार दिया गया जो कि नियम विरुद्ध है।
तृप्ति श्रीवास्तव मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एवं महेन्द्र सिंह उपायुक्त के द्वारा अपर आयुक्त के पद का नियमितीकरण करने हेतु मण्डल के 265वें सम्मेलन में विभागीय मंत्री सह-अध्यक्ष म.प्र. गृह निर्माण अधोसंरचना विकास मण्डल से दिनांक 14/07/2025 को नियम विरूद्ध कार्यवाही कराई गई।
शासन से प्राप्त दस्तावेजों की जानकारी से स्पष्ट है कि इन्दौर एवं सिहोर के तहसीलदार एवं कार्यपालन दण्डाधिकारी ने महेन्द्र सिंह का अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र जारी ही नहीं किया है।
अब सोचने बाली बात यह है कि मंडल या मुख्य प्रसानिक अधिकारी तृप्ती श्रीवास्तव महेन्द्र सिंह पर इतनी मेहरबान क्यों है आखिर महेंद्र सिंह को मण्डल की सेवा से अबतक बर्खास्त कर एफ.आई.आर. दर्ज क्यों नहीं कराई गई।जबकि ग्वालियर में फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी पाने वाले 25 से लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है।
इस मामले में शिकायत कर्ता जीवी वर्ती से उनके मोबाइल पर दो बार संपर्क कर बात करने की कोशिश की गई पर दोनों बार यही जबाब मिला कि आपसे दो घंटे बाद बात करता हूं किन्तु श्री वर्ती का का जबाब नहीं आया।
इस संदर्भ में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मण्डल भोपाल तृप्ति श्रीवास्तव ने कहा कि मंडल स्तर पर जो जांच होनी थी बो होचुकी है जांच करके जांच प्रतिवेदन शासन को भेज दिया है.अब आगे की कार्रवाई छनवीन समिति करेगी।
इस बाबत प्रभारी डिप्टी कलेक्टर/पीआरओ/भू अर्जन अधिकारी व मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधो संरचना विकास मण्डल भोपाल महेन्द्र सिंह किराड़ ने कहा कि इस प्रकरण की जांच हमारे विधि अधिकारी कर रहे हैं इसलिये वो ही आपको सही जानकारी दे सकते हैं।



