लेखक~डॉ.के. विक्रम राव
♂÷ ठीक छः दशक बीते आज (19 नवंबर 2022) ही पुर्तगाली दासता से गोवा को मुक्त हुए। मगर श्रेय गया भारतीय सेना को, न कि स्वाधीनता-संग्राम सेनानियों को। अतः संदेह भी व्यक्त किया जाता रहा कि महात्मा गांधी ने तीन दशकों में बत्तीस लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल के समूचे भारत को स्वतंत्र करा लिया, मगर पौने चार सौ वर्ग किलोमीटर के गोवा से यूरोपीय साम्राज्यवादियों को खदेड़ने में सत्तासीन जवाहरलाल नेहरू ने इतने साल क्यों लगा दिए ? वह भी प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार ऐलान करने के बावजूद भी कि गोवा में भारत सैनिक कार्यवाही कदापि नहीं करेगा। मगर वहीं बल प्रयोग किया गया। तीसरी लोकसभा के मतदान के ठीक दो माह पूर्व ही फौजी कार्यवाही क्यों ? लोहिया पर शोधकर्ताओं, जिनमे संयोंजक श्री अभिरंजन सिंह प्रमुख हैं, के दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर अब सच की खोज हुई है। तब वीके कृष्ण मेनन, भारत के रक्षा मंत्री और नेहरू के अनन्य सखा, उत्तर बम्बई से कांग्रेस के प्रत्याशी थे। उनके प्रतिद्वंदी थे आचार्य जेबी कृपलानी, स्वाधीनता सेनानी और पूर्व राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष। वे निर्दलीय उम्मीदवार थे। उनकी जीत तय थी।

÷लेखक IFWJ के नेशनल प्रेसिडेंट व वरिष्ठ पत्रकार/स्तम्भकार हैं÷




