★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
श्रावस्ती में 10 अगस्त 1962 में जन्मे अतीक ने 17 वर्ष की उम्र में 1979 में कर डाला इलाहाबाद में पहला क़त्ल
अतीक ने अपने आपराधिक उस्ताद चाँद बाबा की हत्या कर तेज़ी से चढ़ने लगा जरायम जगत की सीढ़ियां
इलाहाबाद में अतीक अहमद, गोरखपुर में हरिशंकर तिवारी-वीरेंद्र शाही-श्रीप्रकाश शुक्ल गाजीपुर मऊ में मुख्तार अंसारी तो जौनपुर में धनंजय सिंह,मुन्ना बजरंगी बनते गए”आतंक के आका”
मुलायम सिंह यादव,अखिलेश यादव,मायावती व अपना दल के वरदहस्त से अतीक बनता रहा विधायक-सांसद
योगी सरकार आने के बाद से दुर्दिन शुरू अब तक सैकड़ो करोड़ की सपत्तियों पर चल चुका बाबा का बुल्डोजर और गैंग को किया जा रहा नेस्तनाबूद
♂÷कभी देश विदेश में शिक्षा के केन्द्र के रूप में विख्यात रहा इलाहाबाद जो कि अब प्रयागराज बन चुका है इन दिनों पूरी उत्तरप्रदेश ही नही बल्कि देश विदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा कुख्यात माफियाओंको नेस्तनाबूद करने के क्रम में प्रयागराज में आतंक का पर्याय बने रक्तचरित्र माफ़िया अतीक अहमद के चलते काफ़ी दिनों से चर्चा में है।
वजह, 18 साल पहले 25 जनवरी 2005 को बसपा के विधायक रहे राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की 24 फरवरी को फिल्मी अंदाज में गोलियों और बमों से हमलाकर अतीक अहमद के हत्यारों द्वारा नृशंसता पूर्वक दिनदहाड़े लबे रोड क़त्ल कर जाता है।इस गोलीबारी, बमबारी में उमेश के सरकारी गनर की भी जान चली जाती है।

ये वारदात उस वक्त हुई है, जब यूपी में एक सख्त शासक के तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहचान देश दुनियां में प्रसिद्ध हो चुकी है।उनकी अपराधियों माफियाओं और भूमाफियाओं के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति देश के तमाम राज्यों में भी सराही जा रही है। ऐसे दौर में संगमनगरी में हुए इस हत्याकांड की गूंज पूरे उत्तर प्रदेश में सुनाई दे रही है। ठीक उसी तरह, जब 2005 में सपा शासनकाल में बसपा विधायक राजू पाल की हत्या हुई थी। इस दुस्साहसिक वारदात ने 18 साल पुरानी उन स्मृतियों को एक बार फिर आँखों के सम्मुख चलचित्र की भांति प्रस्तुत कर दिया,लेकिन शायद इस वारदात को अंजाम देने से पहले घटना में शामिल शूटरों को इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि ये बुलडोजर बाबा के नाम से कुख्यातों में विख्यात की सरकार है। यहां ईंट का जवाब पहाड़ से दिया जाता है।
वारदात के अगले दिन उत्तरप्रदेश विधानसभा के सत्र में सपा के मुखिया व नेता विपक्ष अखिलेश यादव प्रयागराज की घटना को लेकर योगी सरकार को घेरते, उससे पहले सीएम योगी ने उन्हें करारा जवाब देते हुए कहा कि यह सपा का पाला हुआ गुंडा और माफ़िया है और माफिया को मिट्टी को मिट्टी में मिला देंगे।
प्रयागराज पुलिस ने मामले में गुजरात के साबरमती जेल में बन्द अतीक अहमद, उसके बेटों समेत कईओं पर केस दर्ज कर लिया हैै। उधर, वारदात के 72 घंटे और विधानसभा में माफिया को मिट्टी में मिलाने की बात कहने के 60 घंटे के भीतर बीते सोमवार को प्रयागराज पुलिस ने अतीक के गुर्गे अरबाज का मुठभेड़ के दौरान जहन्नुम रवाना कर दिया। जिस प्रयागराज से लेकर पूरे यूपी में इन दिनों उमेश पाल की हत्या के बाद मॉफिया डॉन अतीक अहमद के नाम की चर्चाएं सियासत से लेकर पुलिस महकमे और जरायम की दुनिया से ताल्लुक रखने वालों के बीच तेज हैं।
इन सनसनीखेज घटनाओं की खबरें पढ़ने से पहले अतीक अहमद के अतीत पर भी नजर डालना जरूरी हैं। अतीक के अतीत से जुड़े अपराध के हर उन पन्नों पर जिसमें हत्या, लूट, डकैती,ज़बरन भूमि कब्ज़ा,अपहरण, रंगदारी, अवैध वसूली, लोगों की चीख, लाचारी, बेबसी है। उन पन्नों के स्याह पक्ष यह भी है कि जिसमें पुलिस, नेता और बदमाशों के ‘कॉकटेल‘ से अतीक कैसे गुनाहों को ‘हमसाया’ बनता चला गया। उन पन्नों को पलटेंगे कि जिसमें कैसे एक गरीब तांगे वाले का बेटा”आतंक का अतीक” बन गया। कैसे वक्त के साथ अतीक अहमद ने आतंक और अपराध की नई-नई इबारत लिखी। कैसे देखते-देखते तांगेवाले का मुंडा यूपी का सबसे बड़ा गुंडा बन गया।यह जानना दिलचस्प होगा कि कैसे गरीब फिरोज तांगेवाले का औलाद अरबों, खरबों की अकूत संपत्ति का मालिक बन गया। कैसे अतीक का आतंक दिन पर दिन फलने फूलने गया।
अपने काले कारनामों से अपराध जगत में सफर शुरू करने के बाद कैसे अतीक उस वक्त की सरकारों में सत्ता के सरक्षण में सियासी चोला ओढ़कर माननीय तक बन गया, लेकिन अब बुलडोजर बाबा की सरकार में आतंक के अतीक का काला साम्राज्य ध्वस्त होना शुरू हो गया है। यूपी की एकाउंटर स्पेशलिस्ट बन चुकी पुलिस की गोलियों की गूंज से मॉफिया अतीक थर-थर कांप रहा है। दरअसल उत्तरप्रदेश में ऐसे कई खूंखार गैंगस्टर हुए जिन्होंने कई सालों तक अपने इलाके में किसी दबंग तानाशाह की तरह अपनी जरायम की हुकूमत चलाई किया। दबंगई के दम पर इन्होंने बाहुबली का तमगा हासिल किया और फिर माननीय सफेदपोश भी बने। उसी में अतीक अहदम का भी नाम जुड़ा है, जिसने कम उम्र में ही अपराध की काली दुनिया में अपना आतंक का साम्राज्य तैयार कर लिया। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में 10 अगस्त 1962 फिरोज खान के घर जन्मा अतीक पढ़ाई-लिखाई में अच्छा नहीं था या यूं कहे कि उसे जरा भी दिलचस्पी नहीं थी। हाई स्कूल में फेल होने के बाद अतीक ने पढ़ाई छोड़ दी। कच्ची उम्र में स्कूल छोड़ने वाला अतीक ढलती उम्र के साथ इतना बड़ा डॉन बन जाएगा, शायद किसी ने सोचा नहीं था। गरीब परिवार में जन्मा अतीक के पिता हाजी फिरोज अहमद रोजी रोटी की तलाश में देवरिया से इलाहाबाद आ गए। यहां फिरोज को फिरोज तांगावाला के नाम से लोग जानने लगे। कहते हैं कि वह अपने बेटे को पढ़ा-लिखा कर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे। लेकिन कम उम्र में पढ़ाई छोड़कर अतीक ने जरायम की काली दुनिया की ओर रूख कर लिया। बात 1979 की है, जब अतीक की उम्र महज 17 साल ही थी, तभी उस पर कत्ल जैसे संगीन जुर्म का इल्जाम लगा। फिर इसके बाद अतीक ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो 1980 का दौर था तब का इलाहाबाद और आज का प्रयागराज तेजी से बदल रहा था। नए उद्योग-धंधे लगाए जा रहा थे। स्कूल, कॉलेज बन रहे थे। संगम किनारे बसे शहर में जब बदलाव की धारा बहाई जा रही थी तब बड़े-बड़े सरकारी ठेके दिए जा रहे थे। उस दौर में शहर के छात्र नेता और दबंग हर कोई जल्द दौलतमंद होने के सपने संजोये अपने अपने रसूख का इस्तेमाल कर ठेके लेने का जुगाड़ कर रहा था। यही चाह शहर के चकिया मोहल्ले में रहने वाले फिरोज तांगेवाले के बेटे अतीक अहमद को लग गई, फिर क्या था साल दर साल उसके जुर्म की किताब अपराध के स्याह पन्नों से मोटी होनी शुरू हो गई। 1992 में इलाहाबाद पुलिस ने अतीक का काले कारनामों का चिट्ठा जारी कर बताया था कि उसके खिलाफ यूपी ही नहीं बल्कि बिहार में भी कई संगीन मामले दर्ज हैं। सबसे ज्यादा आपराधिक मामले इलाहाबाद में ही दर्ज थे। अब जुर्म की दुनिया में अतीक के कदम तेजी से बढ़ते जा रहे थे, लेकिन जरायम का बड़ा खिलाड़ी बनने के लिए अतीक को उस्ताद की जरुरत पड़ी।कुख्यात चांद बाबा को उसने अपना उस्ताद बनाया। इसके बाद वो उनकी सरपस्ती में जुर्म की काली दुनिया में धीरे-धीरे अपने उस्ताद से भी बड़ा बन गया। बात 80 के दशक से लेकर और उसके बाद की है। जब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हरिशंकर तिवारी और वीरेद्र शाही और इन दोनों से भी कुख्यात और निर्मम श्रीप्रकाश शुक्ला , गाजीपुर में मुख्तार अंसारी, जौनपुर में धनंजय सिंह ,मुन्ना बजरंगी और वाराणसी में ब्रजेश सिंह का खौफ चल रहा था तो तब के इलाहाबाद आज के प्रयागराज में अतीक का हुकूमत चल रहा था था। गैंगस्टर एक्ट के तहत सबसे पहले अतीक अहमद पर ही केस दर्ज हुआ था। यह केस साल 1986 में दर्ज हुआ। उधर, चांद बाबा का आंतक भी चरम पर भी था। पुलिस उससे खौफ आती थी। भूल से भी पुलिस वाले उसके इलाके में चले गए तो बिना पिटे नहीं आते थे। पुलिस उससे त्रस्त आ चुकी थी। ऐसे में पुलिस ने उसके चेले अतीक को शह दे दी। इस खेल में नेताओं और बदमाशों का भी अतीक को साथ मिल गया, फिर क्या था चांद बाबा से भी बड़ा गुंडा बनने के ख्वाब अतीक देखने लगा, इस बीच साल 1989 में चांद बाबा की हत्या हो जाती है। कहने वाले कहते हैं कि अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए अतीक अहमद ने ही अपने उस्ताद को ठिकाने लगाया और उसकी गद्दी पर सवार होकर पूरे इलाहाबाद में एक छत्र राज करने लगा। आलम ये था कि कुछ ही समय में अतीक ने अपने वर्चस्व को इतना बढ़ाया कि उसके गैंग में 120 से भी ज़्यादा शूटर शामिल हो गए। गुंडागर्दी के बल पर अतीक सबसे बड़ा डॉन बन बैठा।हालात ये हो चुका था जिस पुलिस ने उसे गुंडा बनाने के लिए शह दी, वही पुलिस उस पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी। अब अपराध की दुनिया में नाम कमा चुके अतीक को इस बात का पता चल चुका था कि सत्ता की ताकत क्या होती है। इसीलिए उसने जरायम की दुनिया के साथ सियायत के संसार में घुसने का मन बनाया। बाहुबल के दम पर अतीक ने राजनीति में भी एंट्री मारी। 1989 में पहली बार इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से वह विधायक बन गया। 1991, 1993 में निर्दलीय विधायक बना।फिर 1996 में इसी सीट पर सपा के टिकट से चुनाव लड़कर विजय हासिल की। 1999 में अपना दल का दामन थामा। प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार हार का मुंह देखना पड़ा। 2002 में इसी पार्टी से अतीक विधायक बन गया। 2003 में यूपी में सपा की सरकार बनने पर अतीक को मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का भरपूर आशीर्वाद मिल जाता है। 2004 के आम चुनाव में उस फूलपुर लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर अतीक सांसद बन जाता है जिस सीट पर कभी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने सदन में प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद इलाहाबाद पश्चिमी की सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर अतीक ने अपने भाई अशरफ को सपा के टिकट से उप चुनाव में उतारा। उधर, अशरफ के सामने खड़ा हुआ इलाहाबाद का एक और बड़ा अपराधी राजू पाल। 25 मुकदमों का ठप्पा लिए अमन पाल उर्फ राजू पाल को दलितों की मसीहा कही जाने वाली सुश्री मायावती ने अपनी पार्टी बसपा से टिकट दी और राजू पाल ने अतीक अहमद के भाई अशरफ अहमद को शिकस्त दे डाली।कहते हैं कि राजू पाल कभी अतीक के लिए भी काम करता था और अब वो अतीक के वर्चस्व को ही चुनौती दे रहा था। कहते हैं कि ये हार अशरफ को इतनी असहनीय लगी कि उसने घर में खाना-पीना तक छोड़ दिया, पर यही जीत राजू के लिए मौत का सबब बन गई। विधायक बनने के कुछ ही महीनों बाद 25 जनवरी 2005 को राजू पाल की हत्या कर दी गई। अब 2007 आ चुका था। उत्तर प्रदेश की सत्ता में फिर से बदलाव होता है।अब सीएम की कुर्सी पर मुलायम सिंह यादव की जगह पूर्ण बहुमत के साथ बसपा सुप्रीमो मायावती विराजमान हुईं। मायवती के राज में अतीक का सियासी रसूख ढलते सूरज की तरह अस्त होने लगा। सपा ने भी अब पार्टी पर बोझ बनते जा रहे अतीक अहमद को बाहर का रास्ता दिखा दिया। मुख्यमंत्री मायावती ने अतीक को सबक सिखाना शुरू कर दिया। मायावती ने अतीक को मोस्ट वांटेड घोषित करवा दिया। अतीक की करोड़ों की सम्पति सीज हो चुकी थी। काली कमाई से बनाई गई इमारतों को गिरा दिया गया। अतीक अहमद फरार घोषित कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर यूपी पुलिस को सौंप दिया, इसके बाद अतीक का ठिकाना जेल बन गई। समय बीता और फिर 2012 का वो दौर आ गया, जब यूपी में विधानसभा के चुनाव होने थे। चुनाव लड़ने के लिए अतीक ने जमानत अर्जी लगाई। उसे जमानत मिल गई। 2012 के चुनाव में अतीक ने एक बार फिर से चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उसे राजू पाल की विधवा और बसपा उम्मीदवार पूजा पाल से हार का सामना करना पड़ा। 2012 में सपा की पूर्ण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनने पर अतीक ने फिर से अपना रसूख दिखाना शुरू कर दिया। पांच सालों तक अतीक का रसूख चलता रहा, लेकिन 2017 के आते ही अतीक के दुर्दिन शुरू हो गए।
2017 के चुनाव में यूपी में भाजपा की प्रचण्ड बहुमत के साथ सरकार बनती है। योगी आदित्यनाथ सूबे की सत्ता की बागडोर संभालते हैं। इसी के साथ अतीक अहमद का राजनीतिक रसूख गिरता गया और अब उनके दिन गर्दिश में आ गए हैं। भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही उस पर लगातार क़ानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। सरकार ने अतीक की अब तक सैकड़ों करोड़ रूपये की सम्पति कुर्क कर ली है इमारतों पर बुलडोजर चल रहा है। फिलहाल 80 के दशक से शुरू हुआ अतीक का साम्राज्य अब ध्वस्त होने की कगार पर आ पहुंचा है। माफिया अतीक अहमद 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया गया है। मौजूदा समय में वह गुजरात की साबरमती जेल में है। अब पुलिस उमेश पाल हत्याकांड में पूछताछ के लिए उत्तरप्रदेश लाने की तैयारी में है तो वहीं उसके वक़ील यूपी न जाये इसके लिए कोर्ट जा पहुँचे हैं।उमेश पाल की हत्या में अतीक पर आरोप लग चुका है उसे नामजद मुजरिम पुलिस बना चुकी है।
देखना दिलचस्प रहेगा कि फ़िल्मी कहानी की तरह मामूली तांगेवाले के बेटे से पूर्वांचल और बिहार तक अपने नाम का आतंक फैला कुख्यात डॉन बन जाने वाले अतीक अहमद को कितना मिट्टी में मिला सकते हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नही बल्कि बुल्डोजर बाबा।
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