★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
क़लमकार हाजी जियाउद्दीन ने जौनपुर के इतिहास के साथ अपनी क़लम को भी जिंदा रखा है जो आने वाली नस्लों के लिए होगा नजीर=डॉ. क़ादिर
जौनपुर की ज़मीन पर अनेकों शायर एवं इतिहासकारों की गुज़री है जिंदगी जिन्हें जानने की है जरूरत=फैजान
मोहम्मद हसन डिग्री कॉलेज के सौदागर हॉल में हाजी जियाउद्दीन द्वारा लिखित पुस्तक आशार-ए-शिराज-ए-हिन्द का अतिथियों नें किया विमोचन
♂÷जौनपुर-मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज के सौदागर हाल में आज आशार -ए- शिराजे-ए- हिंद पुस्तक का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट जेड के फैजान ने की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डॉ. निर्मला मौर्य रहीं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ अलाउद्दीन ,इंकलाब उर्दू रिजीडेन्ट एडिटर जिलानी खान रहे।
प्रारंभ में आये हुए अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर प्राचार्य डॉ. अब्दुल क़ादिर खान ने स्वागत एवं अभिनंदन किया।
इसके पश्चात आगत अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन किय
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. अब्दुल कादिर खान ने अपने संबोधन में कहा कि इस किताब से जौनपुर की तमाम धरोहर को याद रखा जा सकता है जौनपुर हमेशा में एक ऐतिहासिक दृष्टि से जाना एवं पहचाना जाता है ।हाजी जियाउद्दीन की इस कार्य की जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है,जिन्होंने जौनपुर के इतिहास के साथ अपनी कलम को भी जिंदा रखा और आने वाली नस्लों के लिए नजीर होगा।

मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. निर्मला मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि जौनपुर संस्कृति विरासत तहजीब एवं शिक्षा की एक मिसाल के रूप में देश में जाना जाता है जौनपुर में बड़े से बड़े ऐतिहासिक स्थल एवं जियाउद्दीन की किताब के विमोचन से जौनपुर के धरोहर एवं विलुप्त खेलो एवं स्मारकों की पहचान जिंदा हुई है मेरे सहयोग से इस किताब का हिन्दी अनुवाद जल्द जारी किया जाएगा हिंदी अनुवाद होने के बाद इस किताब के हिंदी विमोचन पूर्वांचल विश्वविद्यालय में मेरे द्वारा किया जाएगा ताकि जौनपुर के जनता इस किताब से अपनी धरोहर एवं विरासत की पहचान को जान सकें।
इंकलाब उर्दू एडिटर वादुद साजिद ने जौनपुर के कुछ ऐतिहासिक हिस्सों पर रोशनी डाली।
विशिष्ट अतिथि रिजीडेन्ट एडिटर जिलानी खान ने अपने संबोधन में कहा जौनपुर देश में ऐतिहासिक रूप में जाना जाता हैं
विशिष्ट अतिथि अलाउद्दीन ने जौनपुर के इतिहास के बारे में बातें साझा की।
कार्यक्रम अध्यक्ष एड. जेड.के.फैजान ने अपने संबोधन में कहा कि जौनपुर तहजीब का मरकज है जौनपुर एक समय में देश की राजधानी हुआ करता था जौनपुर की जमीन पर अनेकों शायर एवं इतिहासकारों की जिंदगी गुजरी है। जो आज के समय में जानने और पहचानने की जरूरत है, जिसको बाकी रखने के लिए इस किताब को हाजी जियाउद्दीन के द्वारा लिखी गई
अंत में आए हुए सभी अतिथियों का स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ देकर प्राचार्य डॉ. अब्दुल क़ादिर खान के द्वारा सम्मान किया गया।

इस मौके पर इंकलाब उर्दू का परिवार एवंम,दैनिक जागरण जौनपुर के ब्यूरो इन चीफ आनंद चतुर्वेदी, समाजसेवी जितेंद्र यादव, न्यूज एडिटर शाह आलम,डॉ जियाउद्दीन प्रधान,डॉ विजय सिंह,डॉ पी.सी विश्वकर्मा,नोमान खान, डॉ कमरुद्दीन शेख, डॉ ममता सिंह डॉ निलेश सिंह,प्रवीण यादव,मौजूद रही कार्यक्रम का संयुक्त संचालन आरिफ सिद्दीकी एवं अहमद अब्बास खान ने किया।




