लेखक~मुकेश सेठ
♂÷अब तक इस क़ानून के तहत लगभग दो सौ लोकसभा सदस्य,विधानसभा सदस्य,राज्यसभा सदस्य और विधानपरिषद सदस्यों की सदस्यता दो साल या उससे ज्यादे की सज़ा होने पर स्वतः ख़त्म हो चुकी है।
राहुल गाँधी या फ़िर उनकी दादी रहीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की ही सदस्यता सिर्फ़ नही गयी है कोर्ट के आदेश पर सदन से।
याद होना चाहिए कि सोनिया-राहुल-प्रियंका गाँधी के उंगलियों पर चलने का आरोप सहने वाली मनमोहन सिंह सरकार ने अपने सहयोगी दल राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष व सांसद लालू प्रसाद यादव के ऊपर भ्रष्टाचार का मुकदमा चल रहा था चारा घोटाला में सज़ा होना तय माना जा रहा था तो उनको बचाने की कवायद मे एक क़ानून लेकर आई थी,उक्त अध्यादेश को सदन में राहुल गांधी नें फाड़ दिया था।मनमोहन सरकार ने कैबिनेट से पास करवा कर उसे सदन से पास करवाने के लिए लोकसभा में लायी थी,उसमें यह प्रस्ताव था कि पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई सरकार द्वारा बनाये गए क़ानून की दो साल की सज़ा होने पर सदन की सदस्यता स्वतः चली जायेगी की जगह अब 2 साल नही बल्कि 5 साल की सज़ा होने पर ही सदन के सदस्य अयोग्य घोषित किए जाएंगे।
राहुल गाँधी ने कैबिनेट से स्वीकृति और सदन के नेता व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा पेश अध्यादेश को सदन में फाड़ते हुए हुए कहा कि यह भरस्टाचारियो को बचाने के लिए लाया गया है और वह इसे स्वीकार नही कर सकते।
राहुल गांधी के तेवर देखकर मनमोहन सरकार नें अपने क़दम पीछे खींच लिए थे और काँग्रेस नें अपने युवराज़ की ख़ूब वाहवाही की थी।
यह भी याद रखें कि कई अधिकारी जो बिहार में जब लालू सरकार थी तो उनके साथ सैकड़ो करोड़ के चारे घोटाले में साथ थे और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने जेल भेज दिया था।
मज़ेदार यह है कि लालू प्रसाद यादव व उन अधिकारियों के ऊपर उस वक़्त बिहार में विपक्षी दल कांग्रेस ने ही इस चारा घोटाला को खोला था और ख़ूब हल्ला मचा बड़ा मुद्दा बना दिया था।जिसके चलते केंद्र की काँग्रेस सरकार ने सीबीआई में केस दर्ज करवा लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध जाँच करवाई थी।
सारा देश जानता है कि चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव की बड़ी भूमिका थी उनके खिलाफ सीबीआई के पास पुख़्ता सबूत जिसने कोर्ट में रखा।उसी सबूतों के मद्देनजर कोर्ट ने चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव को,जो आज काँग्रेस के साथी है को 6 साल की सज़ा सुनाते हुए लाखों रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया था।
सज़ायाफ़्ता होते ही सांसद लालू प्रसाद यादव की लोकसभा की सदस्यता स्वतः समाप्त हो गयी थी।
अब आगे मज़ेदार बात यह है कि राहुल गाँधी ने मनमोहन सरकार के दौरान एक ऐसी गलती की थी अपने को भ्र्ष्टाचार विरोधी छवि दिखाने के लिए की आज कहा जा सकता है कि राहुल गाँधी कुल्हाड़ी के ऊपर ख़ुद से पैर को दे मारा है।
ध्यान हो कि लालू यादव के समर्थन वाली मनमोहन सरकार ने चारा घोटाले में बुरी तरह से घिरे लालू प्रसाद यादव को बचाने के लिए अपनी कैबिनेट से एक प्रस्ताव मंजूर करा कर लोकसभा में पेश किया।
उस अध्यादेश में यह था कि पांच वर्ष से कम सजा होने पर किसी भी लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा व विधानपरिषद सदस्यों की सदस्यता रद्द नही होगी।
यह अध्यादेश वैसे तो सभी 5 साल से कम सजा पाने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए राजनीतिक जीवनदान के समान था,किन्तु ऐसे ख़ासकर अपने मजबूत सहयोगी लालू प्रसाद यादव को बचाने के लिए लाया गया।जिसे तत्कालीन सांसद व काँग्रेस व मनमोहन सरकार से भी ऊपर सुपर पॉवर सिद्ध करते रहने वाले राहुल गांधी नें सदन में कैबिनेट से पास मनमोहन सरकार के द्वारा पेश अध्यादेश को फाड़कर फेंकते हुए ललकारा था कि वह इस तरह के अध्यादेश के खिलाफ है जो भृष्टाचारियो का बचाव करे।
उस समय ख़ूब वाहवाही लूटने वाले राहुल गाँधी नें भले ही भारत के प्रधानमंत्री, लोकतांत्रिक ढंग से सहयोगी दलों के समर्थन से बहुमत वाली मनमोहन सिंह सरकार व उनकी कैबिनेट के फ़ैसले को फाड़कर फेंक देने से सदन के नेता प्रधानमंत्री की गरिमा,संविधान को कुचलने के कार्य करने के बावजूद भी काँग्रेस के बड़े बड़े मंत्रियों, नेताओँ की घिघ्घी बध गयी और ज़ुबान बेजुबान हो गयी।कहीं से भी लोकतंत्र की हत्या,तानाशाही, काला दिन,प्रधानमंत्री का अपमान यानी कुछ भी नही निकला।
आज उसी पहले के क़ानून का ही निवाला बने हैं राहुल गाँधी।मनमोहन सरकार के अध्यादेश न फाड़ते तो आज उनकी सांसदी बरकरार रहती और वह 6 वर्षो के लिए कोई भी चुनाव लड़ने के अयोग्य नही ठहराए जाते।
सूरत के सेशन्स कोर्ट में मोदी सरनेम वाले एक बीजेपी विधायक के द्वारा राहुल गांधी द्वारा मोदी सरनेम वालों को अपमानजनक तरीके से चुनावी रैली के दौरान टिप्पणी करने में कल सजा सुनाई गई और आज लोकसभा सचिवालय से उनकी सदस्यता रद्द करने का आदेश राहुल गांधी,अदालत,चुनाव आयोग,सभी लोकसभा सदस्यों,यूपी व केरल सरकार समेत तमाम जगहों पर लिखित रूप से भेज दी गयी है।
इतना तो अब तय है कि काँग्रेस के पीछे अब विपक्षी दल भी लामबंद होने शुरू हो गए हैं इस मद्दे पर,क्योकि तमाम नेताओं पर भ्रष्टाचार के संगीन मामलें चल रहे है तो एक दूसरे के राजनैतिक कंधे का सहारा लेना लाजिमी होता है।दूसरी तरफ़ काँग्रेस राहुल गांधी को शहीद करार देकर बीजेपी व मोदी सरकार को तानाशाही चलाने,लोकतंत्र की हत्या करने,संविधान को कुचलने जैसे बयानों के बूते मोदी को राजनीतिक चक्रव्यूह में फंसा कर सत्ता से बेदख़ली करना प्रमुख दांव चलेगी।
अब काँग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा गाँधी काँग्रेस के राजनीतिक पर्दे पर मुख्य भूमिका निभाते दिखे तो आश्चर्य नही होना चाहिए।




