लेखक~मुकेश सेठ
♂÷राज्य के मुख्यमंत्री जैसे अति जिम्मेदार व उच्च पदों पर बैठे राजनेताओं की संवैधानिक जिम्मेदारी होती है कि वह जनता की गाढ़ी कमाई से मिले टैक्स के पैसे से चलने वाले राजकोष से ऊलजुलूल ख़र्चे अपने व्यक्तिगत सियासी लाभ व पार्टी की राजनीति चमकाने में न खर्च करे।
क्योंकि जब आप निजी राजनीतिक फ़ायदा उठाकर विरोधियों की छवि को धूल धूसरित कर ख़ुद की छवि चमकाने की राजनीति करते हैं जो कि जनता के लिए सरकारी कार्य में कत्तई नही आता तो नैतिकता व ईमानदारी की दुहाई देने वाले मुख्यमंत्री को भी इन्ही रास्ते पर चलना चाहिए और बेहद महँगे वकीलों की फ़ीस ख़ुद की जेब से या फ़िर पार्टी कोष से भुगतान करना चाहिए न कि सरकारी खजाने से।
मामला दो प्रदेश के मुख्यमंत्री यानी राजस्थान के अशोक गहलोत व दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से जुड़े हैं जो कि नैतिकता, ईमानदारी,लोकतंत्र व संविधान का राग जनता को सुनाते रहते हैं।
पहले बात करते हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल की।
याद होगा कि इन्होंने अपनी राजनीति की दुकान ही लगभग सभी दलों के प्रमुख क़द्दावर नेताओँ को भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के गम्भीर आरोप लगाकर ही चमकदार बनाई है।
मुख्यमंत्री केजरीवाल नें नरेन्द्र मोदी सरकार पार्ट वन में वित्त व कुछ महीनों के लिए रक्षा मंत्री व दिग्गज बीजेपी नेता व सुप्रीम कोर्ट के बड़े वक़ील रहे अरुण जेटली के ऊपर गम्भीर आरोप प्रेस कान्फ्रेंस के जरिये लगाए थे।इसी प्रकार केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ भी भ्रष्ट होने के आरोप सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए लगा दिए थे।

केजरीवाल से इन दोनों मंत्रियो के द्वारा कहा गया कि वह अपने आरोप व बयान पर माँफी मांगे नही तो कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा।
केजरीवाल ने फ़िर आरोप दोहराते हुए जवाब दिया कि उनके पास इसके सबूत है और वह माँफी नही मांगेंगे।
जिस पर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली नें कोर्ट के जरिये मानहानि का दावा कर नोटिस भिजवा दिया।अब केजरीवाल नें अपनी पैरवी के लिए देश के सबसे महंगे वक़ील माने जाने वाले रामजेठमलानी व दूसरे केस के लिए कपिल सिब्बल समेत कई वकीलों को हायर कर लिया।
दोनों दिग्गज वक़ील पूर्व केंद्रीय क़ानून मन्त्री भी रह चुके हैं।चर्चा है कि एक हियरिंग के 40-40 ,50-50 लाख तक ले लेते हैं।
उस दोनों मामलों कोई भी सबूत जेटली व गडकरी के खिलाफ कोर्ट में न पेश कर पाने के चलते जब आप नेता केजरीवाल को जेल जाने की नौबत आई तब उन्होंने कोर्ट में पेश होकर दोनों मंत्रियो से दोनों केस में लिखित रूप से माँफी मांगी थी।
इस मामले में उन्होंने दिल्ली राज्य सरकार के ख़ज़ाने से दोनों वकीलों समेत अन्य को करोड़ो रूपये की फ़ीस अदा की थी।
अब बात राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की।
मामला हाल के दिनों का ही है जब 2 बड़े वकीलों को राजकोष से करोड़ों रूपये भुगतान कर चुकी है और दोनों ही सिंघवी हैं।
एक हैं सुप्रीम कोर्ट के बेहद महंगे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी व दूसरे एडवोकेट एम एस सिंघवी जो कि महाधिवक्ता राजस्थान सरकार हैं।
भारत के जाने माने एडवोकेट व पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार में केंद्रीय क़ानून मन्त्री,कांग्रेसी नेता अभिषेक मनु सिंघवी और एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा, राजस्थान के जोधपुर हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तरफ़ से बीजेपी सांसद व केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के खिलाफ पैरवी करने के लिए वकीलों की एक बड़ी सी फौज के साथ उतरे थे।
एम एस सिंघवी को CM अशोक गहलोत साहब सरकारी वकील होने के नाते “हर महीने लगभग एक करोड़ रूपये का भुगतान” राजकोष से यानि जनता की जेब से करते हैं इसके अलावा अभिषेक मनु सिंघवी और सिद्धार्थ लूथरा को भी CM साहब करोड़ों रूपये का भुगतान अब तक कर चुके हैं।
कुछेक दिन पहले ही CM गहलोत साहब कह रहे थे कि उनके किसी भी वकील ने हाईकोर्ट में सही पक्ष नहीं रखा। यह लो साहब क्या मजाक करते हैं सीएम साहब भी…।
अगर सभी वकील सही पक्ष नहीं रख पाए तो आपने इनको आज तक हटाया क्यों नहीं…?
असली बात यह है कि किसी ढंग के वकील ने CM साहब को समझा दिया कि हाईकोर्ट वाले आदेश के कारण दिल्ली की कोर्ट CM साहब को मानहानि के केस में 2 साल की सजा कर सकती है जिसके चलते वह भी विधायक पद के अयोग्य हो जाते ही मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा साथ ही कई वर्षों तक वह चुनाव लड़ने के पात्र नही रह जाएंगे।
इस कारण तिलमिलाए हुए हैं CM साहब…
CM साहब ने अपने कई विरोधियों को निर्दोष होते हुए भी जेल दिखा दी, इस बार जेल जाने की बारी उनकी आई है, ग़ौरतलब है कि इसके पहले गहलोत साहब के नेता व कॉंग्रेस के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ राहुल गाँधी को भी मानहानि के केस में दो साल की सज़ा हो चुकी है और उनकी वायनाड लोकसभा सीट की सदस्यता भी रदद् हो चुकी है।
इसलिए….मुख्यमंत्री गहलोत साहब बेचैन हैं।
हालांकि इस तरीके के अपने व्यक्तिगत मुकदमों में जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग करने के उदाहरण मिल जाएंगे।

÷लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं÷




