★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
अंतिम दिनों में तारिक़ फ़तह सिंह कहलवाने वाले फ़तह साहब का कनाडा में किया गया था हिन्दू रीतिरिवाज से अंतिम दाहसंस्कार
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वा ने अपने मित्र का दाहसंस्कार के पश्चात काशी आकर विधिविधान से गंगाजी में मित्र ब्रायन की अस्थियां की विसर्जित
♂÷पिछले दिनों दुनियां के खबरी जगत में दो समाचार पढ़ सुनकर यह आस जगी कि प्रारम्भ ही सही मगर पहल बड़ी है।
पाकिस्तानी मूल के इस्लामी विद्वान व प्रख्यात लेखक जो कि आजीवन अपने को भारत का बेटा कहते रहे उनका बीमारी के पश्चात कनाडा में निधन हो गया।वह काफ़ी लंबे वक़्त से कनाडा में रहते थे और उनके पास कनाडा की नागरिकता थी।
उनकी अंतिम इच्छा थी कि मृत्यु के पश्चात उनके शव को दफन न करके सनातनी परम्परा के अनुसार शव का दाह संस्कार किया जाए और अस्थियों को विसर्जित किया जाए।
दूसरी ख़बर अभी कुछेक दिन पूर्व ही ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान स्टीव वा के अभिन्न मित्र ब्रायन का निधन हो गया था।ब्रायन कि अंतिम इच्छा थी कि शव को कब्रिस्तान में दफ़न करने के बजाय दाहसंस्कार किया जाय और अस्थियों को काशी ले जाकर पतितपावनी गंगाजी में विसर्जित कर दी जाये।
स्टीव वा नें अपने मित्र ब्रायन का ऑस्ट्रेलिया में दाहसंस्कार करवाने के पश्चात कुछेक दिन ही पूर्व अस्थियों को लेकर काशी पहुँचे और विधि विधान से गंगाजी में विसर्जन कर अपनी मित्र की आख़िरी इच्छा को पूर्ण कर उनकी आत्मा को शांति प्रदान की।
योरोप,अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से इस तरह के समाचार मीडिया जगत में नमूदार होते रहते हैं तो वहीं कई इस्लामिक खाड़ी मुल्कों से भी हिन्दू धर्म व देवी देवताओं के मंदिर निर्माण व कथा आयोजन के भी न्यूज़ आते रहे हैं।
यह एक शुभ सन्देश माना जा सकता है कि दुनियां में साम्प्रदयिक व धार्मिक सद्भाव के लिए अब इंसान खुले मन मस्तिष्क से एक दूसरे के हृदयस्थ होने लगे हैं।भले ही पहल न्यून हो किन्तु प्रारम्भ महत्वपूर्ण है जो विश्व को सर्वधर्म सद्भाव व वसुधैव कुटुम्बकम की राह पर अग्रेसित करेगी।
पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक और विचारक तारिक़ फ़तह की अन्तिम इच्छा थी कि उन्हें (पंचमहाभूत) पंचतत्व में विलीन किया जाए ताकि वे फिर से अपने पूर्वजों की पुण्यभूमि भारत में जन्म ले सकें।मालूम हो सोमवार 24 अप्रैल को उनका कनाडा में निधन हो गया था।
20 नवंबर 1949 को कराची के एक मुस्लिम परिवार में वो जन्मे लेकिन रक्त में पूर्वजों का प्रताप सदैव उन्हें भारत की ओर खींचता रहा। पिछले कुछ वर्षों से वो स्वयं को तारिक़ फ़तह सिंह कहलवाना पसंद करते थे। कुछ सदी पहले उनके पुरखे हिंदू राजपूतों से मुसलमान बने थे। मुस्लिम मजहब में पैदा हुए लेकिन अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए सत्य सनातन वैदिक धर्म को फिर से अपनाकर मृत्यु को प्राप्त हुए। कनाडा में उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज के साथ किया गया।

तारिक़ फ़तह पहले मुस्लिम बुद्धिजीवी नहीं थे जिन्होंने पंचभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) में विलीन होने की बात जीते जी कही हो, इससे पहले उर्दू साहित्य का सबसे बड़ा नाम “इस्मत चुग़ताई” ने भी जीते-जी अपनी वसीयत में यह लिखवाया था कि उन्हें मरने के बाद दफनाया न जाए बल्कि उनके शरीर को हिन्दू रीतिरिवाज से दाहसंस्कार किया जाए। अक्टूबर, 1991 में मृत्यु के पश्चात मौलवियों ने ऐतराज जताया और हंगामा होने ही वाला था, तभी उनके बच्चों ने अपनी मां की अंतिम इच्छा पूरी की और मुंबई में उनका अंतिम संस्कार किया गया।




