लेखक~जितेन्द्र सिंह
♂÷परीक्षा में प्रतिशत परिणाम सिर्फ एक इस बात का पैमाना होता है कि आप अपनी सिलेबस को रट सकते हैं या समझ सकते हैं और एक परीक्षा में अच्छा नंबर ला सकते हैं, लेकिन यह जिंदगी में सफल होने का मापदण्ड नहीं होता।
जिंदगी में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहां सफल होने के लिए परीक्षा के परिणाम प्रतिशत की जरूरत नहीं होती
मेरे एक मेमन मुस्लिम मित्र है , उनके दो जुड़वां बेटे है।
उनके जुड़वा बच्चे 12वीं में 50% अंक पाने के बाद उन्होंने कॉलेज में दाखिला ही नहीं लिया और जिंदगी की कड़वी सच्चाईयों से रूबरू होने निकल गए।
पहले इन्होंने एक टेंपो खरीदा और अहमदाबाद के कई गैरेज में गाड़ियों में से जो लुब्रिकेंट निकलता है, उस लुब्रिकेंट को खरीद कर उसे रिफाइन करने वाले लोगों को बेचा।
जी हां यह ऐसा बिजनेस है जिसमें खराब हो चुके लुब्रिकेंट को जो काला पड़ जाता है उसे रिफाइन किया जाता है उसमें कलर मिलाया जाता है और उसमें थोड़ा फ्रेश लुब्रिकेंट मिलाकर फिर उसे पैक करके बाजार में बेच दिया जाता है।
थोड़े समय यह बिजनेस करने के बाद दोनों भाइयों ने स्क्रैप यानी भंगार का काम किया और चूंकि वो भावनगर के मूल निवासी थे तो वह अलंग से स्क्रैप खरीद कर बेचने लगे।
फिर उन्होंने अलंग से कॉपर के स्क्रैप खरीद कर उसे कॉपर की फैक्ट्रियों को बेचना शुरू किया।
दोनों भाइयों ने कभी बारिश धूप ठंड नहीं देखी जी तोड़ मेहनत करते रहे फिर और अच्छा कमाने के बाद एक भाई दुबई चला गया और दुबई में ऑफिस शुरू करके दूसरे देशों से स्क्रैप के बड़े-बड़े कंटेनर खरीद कर भारत में बेचने लगे।
अभी पिछले फादर्स डे पर उन्होंने अपने पिता को एमजी हेक्टर गाड़ी गिफ्ट में दी और अहमदाबाद में वेजलपुर के पास एक तीन मंजिला बंगला बनवा लिया और अब दुबई में घर भी है।
उन दोनों भाइयों की सफलता की एक कहानी सिर्फ 10 साल की मेहनत से हुई है।
इसीलिए यदि आपके बच्चे का नंबर कम आया है तो इसका यह मतलब नहीं है कि आपका बच्चा अपनी जिंदगी में कुछ कर नहीं सकता,बस याद रखना होगा यह शेर कि”कौन कहता है आसमां में सुराख़ नही हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों”।
÷लेखक सुप्रसिद्ध ब्लॉगर हैं÷




