★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
जंतर-मंतर पर न्याय के लिए संघर्ष कर रहे पहलवानों के समर्थन में सीटू व महिला समिति ने किया विरोध प्रदर्शन
भाजपा सरकार जघन्य आरोपी सांसद को बचाने में जुटी हुई है जनवादी महिला समिति की नेता आशा यादव नें सरकार पर लगाया आरोप
♂÷उत्तरप्रदेश के नोएडा में सीटू, किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन, डीवाईएफआई, एसएफआई, जनवादी महिला समिति और कई अन्य संगठनों ने गत 18 मई को पहलवानों के समर्थन में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया गया।
सीटू जिला कमेटी गौतम बुध नगर के नेता रामसागर, गंगेश्वर दत शर्मा, पूनम देवी, लता सिंह, राम स्वारथ, राजकरण सिंह, शंभू पेंटर, महेंद्र सिंह एवं जनवादी महिला समिति की नेता आशा यादव, रेखा चौहान, गुड़िया देवी, राखी आदि कार्यकर्ताओं ने सेक्टर- 8, नोएडा बांस बल्ली मार्केट तिराहे पर विरोध प्रदर्शन किया।
विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक स्थिति है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर पूरे देश का मान और सम्मान बढ़ाने वाले ओलम्पिक पदक विजेताओं समेत कई खिलाड़ियों को अपना कैरियर दांव पर लगाकर न्याय के लिए जंतर-मंतर पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है।प्रदर्शनकारी पहलवान बार-बार केवल निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं परन्तु आरोपों की जांच करने वाली जांच कमेटी की सदस्य बबीता फोगाट ने ही जांच पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच का समय बीतने के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा जांच के निष्कर्षों को भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जनवादी महिला समिति की नेता आशा यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार जहां एक तरफ ‘बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ, बेटी-खिलाओ’ अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ इस जघन्य अपराध में आरोपी भाजपा सांसद को बचाने में जुटी हुई है।
इसी तरह से हरियाणा की भाजपा सरकार ने यौन हिंसा आरोपी मंत्री संदीप सिंह बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है और पीड़िता जूनियर कोच व उसके परिवार को प्रताड़ित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रखी।
दोनों मामले इस बात की ताकीद कर रहे हैं कि भाजपा सरकार देश का नाम रोशन करने वाली महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा व चिंताओं को दूर करने को लेकर कितनी संवेदनहीन है।
भाजपा सरकार के इस महिला विरोधी रवैए के ख़िलाफ़ और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे पदक विजेता खिलाड़ियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए 18 मई को देश भर में विरोध प्रदर्शन किया गया। अगर सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांग नहीं मानी तो पूरे देश में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।




