लेखक~मुकेश सेठ
नीम करौली बाबा के भक्तों में जवाहर लाल नेहरू, टाटा,बिड़ला,एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स,फेसबुक सीईओ मार्क जुकरबर्ग,हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स,विराट कोहली समेत अन्यान्य हस्तियों के नाम है
बाबा का जन्म वर्ष 1900 के लगभग यूपी के अकबरपुर में ब्राह्मण दुर्गा प्रसाद शर्मा के पुत्र के रूप में हुआ,उनका नाम लक्ष्मीनारायण और 11 वर्ष की अल्पायु में ही हुआ था विवाह
बाबा के कैंची धाम आश्रम के लिए कई सौ करोड़ की रकम से मोदी-धामी सरकार बनवाने जा रही है विशाल व भव्य मंदिर व तीर्थस्थल
♂÷भारत की पुण्यभूमि को यूँही नही देवभूमि कहा गया है, जहाँ इस धरा पर अनेकों अवतारों ने अवतरण लिया है तो ऐसे-ऐसे दिव्य व चमत्कारिक सन्त भी वक़्त-वक़्त पर जन्में जिन्होंने अपने अकल्पनीय आध्यात्मिक शक्ति व ईष्ट देव के आशीर्वाद से जनकल्याण कर देश-दुनियां में बेहद ही पूज्यनीय हो चुके हैं।

ऐसे ही एक नाम प्रातः स्मरणीय कैंची धाम वाले बाबा नीम करौली या नीब करौरी का भी है जिनके भक्त देश विदेश के प्रसिद्ध राजनेता,उधोगपतियों,फ़िल्म स्टारों, खिलाड़ियों सहित आमजन भी रहे।
वर्ष 1900 के लगभग उत्तरप्रदेश के अकबरपुर ज़िले के ब्राह्मण परिवार में दुर्गा प्रसाद शर्मा के पुत्र के रूप में बाबा नीम करौली का जन्म हुआ।बचपन मे इनका नाम लक्ष्मी नारायण था और उनके पिताजी ने 11 वर्ष की अल्पायु में ही इनका विवाह संस्कार कर दिया।बाबा वर्ष 1958 में गृहत्याग कर पूरे उत्तर भारत में घूमने लगे थे।
इस दौरान लोग उन्हें लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा,तिकोनिया वाले बाबा समेत कई नाम से बुलाने लगें।उन्होंने गुजरात के ववनिया मोरबी में तप शुरू तब वहाँ के लोग बाबा को तलइया बाबा के नाम से पुकारते थे।

कहा जाता है कि बाबा नीम करौली जी को 17 वर्ष की उम्र से ही आध्यात्मिक ज्ञान हो गया था।
बाबा नें अपना देहत्याग 10 सितम्बर वर्ष 1973 में उत्तरप्रदेश के कान्हा नगरी वृंदावन में कर अपने इष्टदेव संकटमोचन हनुमानजी के शरण में चले गए।
हमेशा एक साधारण सा कम्बल ओढ़े रहने वाले बाबा के भक्तों में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, उधोगपतियों टाटा,बिड़ला, फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग,एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स, हॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस जूलिया राबर्ट्स,क्रिकेटर विराट कोहली सहित जैसी देश विदेश की तमाम हस्तियां शुमार हैं।
बाबा के सम्पर्क में रहे लोग कहते हैं की बाबा अक्सर हवा में बात करते थे और ऐसा प्रतीत होता था की वहां कोई अदृश्य शक्ति मौजूद रहती है जिससे बाबा बात करते हैं।
हनुमान जी के अनन्य भक्त नीम करौरी बाबा ने हनुमान जी के करीब 108 मंदिर बनवाये जिनमे से कुछ अमेरिका के टेक्सास में भी मौजूद हैं।

दिव्यशक्ति धारी बाबा से जुड़े अनगिनत किस्सों में अगर इस किस्से का जिक्र ना किया जाए तो बात कुछ अधूरी सी लगती है। इस घटना के बाद से ही लोग बाबा को नीब करौरी या नीम करौली के नाम से जानने लगे थे। एक बार बाबा ट्रेन के फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट से सफर कर रहे थे। जब टिकट चेकर ने पाया की बाबा के पास टिकट नहीं है तो कुछ देर बाद नीब करौरी गांव के पास बाबा को ट्रेन से उतार दिया गया। बाबा ट्रेन से थोड़ी दूरी पर ही अपना चिमटा धरती में गाड़ कर बैठ गए।स्टेशन मास्टर द्वारा ट्रेन को चलाने का आर्डर दिया गया, लेकिन ट्रेन एक इंच भर भी अपनी जगह से न हिल पायी। जब बहुत प्रयास करने पर भी ट्रेन नहीं चल पायी तो एक लोकल मजिस्ट्रेट जो बाबा को जानता था ने बाबा से माफ़ी मांगने और उन्हें सम्मान पूर्वक अंदर लाने को कहा।ट्रेन में सवार अन्य लोगों ने भी मजिस्ट्रेट की बात का समर्थन किया। ऑफिसर ने बाबा से माफ़ी मांगी और सभी लोगों ने बाबा को ट्रेन में बैठने का आग्रह किया। कहा जाता है कि बाबा ने ट्रेन में बैठने की एक शर्त अंग्रेज अफ़सर से रखी कि ट्रेन में किसी भी साधू सन्यासियों का कभी भी टिकट नही लगेगा और न ही उनसे मांगा जाएगा।
मजिस्ट्रेट व अंग्रेज अफसर ने बाबा की इस शर्त को मान लिया तब बाबा के ट्रेन में बैठने के कुछ ही पलों में इंजन स्टार्ट हो गया और ट्रेन चल पड़ी।
बाबा के चमत्कार के चलते भारत देश के अन्य किसी भी साधारण से गांव जैसा ही ये गांव नीब करौरी पूरे विश्व में जाना जाने लगा और बाबा को लोग नीम करौली वाले बाबा के नाम से जानने लगे।
यूँ तो बाबा जी से जुड़े भक्तों के अनेक सुखद अनुभव हैं परन्तु सभी का जिक्र यहां सम्भव नहीं है। इनमे से एक सुखद अनुभव, एक किस्से का जिक्र बाबा के भक्त रामदास (रिचर्ड एलपर्ट) ने अपनी पुस्तक ‘मिरेकल ऑफ़ लव’ में किया, जिसके बाद बाबा को वर्ष 1960 के दशक में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर लोग जानने लगे। अपनी किताब में रिचर्ड ने ‘बुलेटप्रूफ कंबल’ नाम से एक घटना का जिक्र किया है।
बाबा के कई भक्तों में से एक बुजुर्ग दंपत्ति फतेहगढ़ में रहते थे। एक रात बाबा नीम करौली उनके घर आये और बुजुर्ग दंपत्ति से कहा की आज वे उनके घर पे ही रुकेंगे। बाबा पूरी रात कष्ट से कराहते रहे जैसे की उन्हें भारी कष्ट हो रहा हो। सुबह बाबा ने बुजुर्ग दंपत्ति को एक चादर लपेट कर दी और बिना देखे नदी में प्रवाहित करने को कहा। बुजुर्ग दंपत्ति ने वैसा ही किया भी। जाते हुए बाबा ने कहा कि चिंता मत करना महीने भर में आपका बेटा लौट आएगा।
लगभग एक माह के बाद बुजुर्ग दंपत्ति का इकलौता पुत्र बर्मा फ्रंट से लौट आया। वह ब्रिटिश फौज में सैनिक था और दूसरे विश्वयुद्ध के वक्त बर्मा फ्रंट पर तैनात था। उसे देखकर दोनों बुजुर्ग दंपत्ति खुश हो गए और उसने घर आकर कुछ ऐसी कहानी बताई जो किसी को समझ नहीं आई।
उसने बताया कि करीब महीने भर पहले एक दिन वह दुश्मन फौजों के साथ घिर गया था। रातभर गोलीबारी हुई। उसके सारे साथी मारे गए लेकिन वह अकेला बच गया। मैं कैसे बच गया यह मुझे पता नहीं। उस गोलीबारी में उसे एक भी गोली नहीं लगी। रातभर वह जापानी दुश्मनों के बीच जिन्दा बचा रहा। सुबह तड़के जब ब्रिटिश टुकड़ी आई तो उसकी जान में जान आई। यह वही रात थी जिस रात नीम करोली बाबा जी उस बुजुर्ग दंपत्ति के घर रुके थे।
कहा जाता है कि एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स अपने बिजनेस में लगातार हो रहे घाटे से बुरी तरह से कर्ज़ में डूबते जा रहे थे,दुनियां में उनके एप्पल के उत्पाद की बिक्री न के बराबर होती जा रही थी।ऐसे में पाश्चात्य संस्कृति के आदी अमेरिकी उधोगपति स्टीव जॉब्स को किसी ने बाबा नीम करौली से जाकर आशीर्वाद लेने को कहा जिससे कि उनकी सारी मुसीबतें समाप्त हो सके।
स्टीव जॉब्स भारत आकर सीधे बाबा के कैंची धाम उत्तराखंड गए।उन्होंने अपनी सारी परेशानी बतानी चाही तो बाबा ने कहा कि उन्होंने ही जॉब्स को यहाँ बुलाया है और तुम कुछ दिन आश्रम में गुजारो तुम्हारा कल्याण होगा।
कुछ दिनों आश्रम में गुजारने व बाबा की सेवा में लगने के बाद निराश हो चुके स्टीव जॉब्स अपने अंदर एक अद्भुत शक्ति का अनुभव करने लगे।
बाबा ने स्टीव जॉब्स को आशीर्वाद देकर अमेरिका वापस जाने का आदेश दिया।बाबा के चरणों की रज माथे पर लगा आये एप्पल संस्थापक स्टीव जॉब्स की कम्पनी ने नित नए इतिहास रचने शुरू कर दिए।वह दुनियां के सबसे धनाढ्य अमीरों में से एक रहे तो वह जीवित रहते कई बार बाबा के आशीर्वाद हेतु कैंची धाम आये।
फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की भी ऐसी ही कहानी है तो अमेरिकी हॉलीवुड की टॉप हीरोइन जूलिया रॉबर्ट्स हज़ारों करोड़ की मालकिन और चमक दमक की दुनियां की रानी होने के बाद भी आध्यात्मिक शांति की खोज में बाबा के धाम आकर काफ़ी दिनों तक रहकर बाबा के आशीर्वाद को प्राप्त किया वह भी एक साधारण से भक्त की तरह।
सनातन धर्म व अध्यात्म से बेहद प्रभावित होकर जूलिया रॉबर्ट्स नें अपने क्रिश्चियन रिलीज़न को त्याग सनातन हिन्दू धर्म अपना लिया।
केंद्र की मोदी सरकार व उत्तराखंड की पुष्कर धामी सरकार कई सौ करोड़ की लागत से कैंची धाम आश्रम को विशाल व भव्य तीर्थस्थल का स्वरूप देने की घोषणा कर चुकी है, आने वाले कुछ ही वर्षो में यह हकीकत का रूप ले लेगी।
आज बाबा को दिवंगत हुए 50 वर्ष होने को हैं किंतु सारी दुनियां में उनके करोड़ो भक्त है।
कुल मिलाकर यह कहना कत्तई अतिश्योक्ति नही होगा कि भारत भूमि इतनी पावन है कि इस धरा पर जन्मनें के लिए देवता भी अवतार लेते आये हैं और उत्तराखंड को तो प्रारम्भ से ही देवभूमि का पुण्य स्थान, शास्त्रों, पुराणों में मिला है, तो यह भी कहा जाता है कि स्वर्ग का मार्ग भी इसी भूमि में है।
महाभारत में उल्लेख है कि जब पाण्डव बन्धु राजकाज करने के पश्चात उससे निवृत्त हुए तो वह सशरीर स्वर्ग जाने के लिए इसी देवभूमि से स्वर्ग मार्ग के जरिये जाना प्रारम्भ किये थे।
सिवाय सत्यनिष्ठ युधिष्ठिर व एक स्वान ही स्वर्गलोक पहुँच पाए थे,भीम,अर्जुन,नकुल,सहदेव व द्रौपदी राह ही में अपने प्राण को त्यागने पर मजबूर हुए थे।
÷लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं÷





