★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
तीन दिवसीय यात्रा पर देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई पहुँचे पद्मश्री नें जल संरक्षण अभियान को जनअभियान बनने की कामना से महालक्ष्मी माँ से की विनती
तमाम क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों नें पद्मश्री के पानी बचाओ अभियान को हर तरह से योगदान देने की पहल की
♂÷पूज्य संत नीम करौरी महाराज के आशीर्वाद से देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में वर्षा जल संरक्षण पेड़, पानी को बचाने के अभियान को लेकर आज मां महालक्ष्मी के मंदिर में जाकर माता महाकाली,महालक्ष्मी, महासरस्वती के चरणों में पूजन वन्दन किया।
मातारानी का दर्शन पाकर धन्य हुए हृदय से यही विन्यावत रहा कि माँ ,धरती माँ की कोख़ को पुरखों के जमानों की भांति हरी भरी कर दीजिए।
उक्त विचार प्रकट करते हुए पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय जी ने आगे दुःख जताते हुए कहा कि
दुनियां के तमाम देश अंधाधुंध पानी के दोहन,दुरुपयोग से बुरी तरह से जलसंकट के मुहाने पर जा खड़े हुए हैं, जिनमे वर्तमान में सबसे बड़ा उदाहरण दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े शहर केपटाउन का है।
यहाँ पर अब पानी के लिए नागरिकों को पुलिस फ़ोर्स के जरिये प्रति परिवार 50 लीटर लाइन में लगवाकर दिया जा रहा है।
कुछेक ही दिन में दक्षिण अफ्रीका से यह सुनने को भी मिल सकता है कि सरकार मिलिट्री लगाकर पानी की सुरक्षा करेंगी,लोग पानी के लिए तड़प उठेंगे।
अगर हम सब न चेतें तो अगले तृतीय विश्वयुद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा,क्योकि पानी को बनाया नही जा सकता,सिर्फ़ संरक्षण करके, बचाके ही मानवजाति बची रह सकती है।
पद्मश्री पाण्डेय जी ने आगे जानकारी दी कि मुम्बई के पवई झील से उद्गमित हुई 14 किलोमीटर तक कि अपनी जल यात्रा तय करने वाली मिठी नदी की खोज यात्रा ,सामाजिक सरोकारों के फिल्म निर्माताओं, निर्देशकों ,साहित्यकारों, कलमकारी का सानिध्य मिला। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण को लेकर कई फिल्मों के निर्देशक- पटकथा लेखक करण राजदान, फिल्म निर्माता संस्कृतिकर्मी पंकज नारायण, फिल्म निर्माता अभिषेक दूधैया, प्रसिद्ध बॉलीवुड लोक गायिका प्रिया मलिक, टीवी फिल्म निर्माता अपूर्व बजाज, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार अभिलाष अवस्थी आदि सभी गणमान्य व्यक्तियों नें जल संरक्षण की दिशा में कुछ अलग होगा ऐसा विश्वास जल संरक्षण अभियान को लेकर जताया।
ऐसी कोशिश है संपूर्ण देश में समुदाय के आधार पर जल संरक्षण की दिशा में जहां सूखा है, पुरखों की परंपरागत विधि से मेड़बंदी यज्ञ अभियान आगे बढ़ेगा, जल संरक्षण की दिशा में जो प्रयास होंगे, कहने की बजाय सामने दिखें ऐसा मेरी मां ने कहा था
पद्मश्री ने यह भी बताया कि यात्रा का पूरा विवरण बाद में साझा करूंगा, इन सब से मिलाने में समय दिलाने के लिए जिन साथियों ने सहयोग किया है उनके नाम आप सबके समक्ष साझा करूंगा। कुछ दिल के बड़े प्रतिष्ठित महानुभाव से मुलाकात हुई जिन्होंने जल संरक्षण की दिशा में साथ चलना सहयोग करने की बात कही लेकिन उनके नाम को सजाना किया जाए ऐसा अनुरोध किया है कि कुछ हम योगदान के साथ काम करें तब साझा करें,उनका यह विचार मुझे ठीक लगा।




