★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
झांसी में जल संरक्षण और छोटी नदियों को बचाने के लिए हुए राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श गोष्ठी,शामिल हुए पद्मश्री सहित कुलपति, जिलाधिकारी और महत्वपूर्ण कारकून
पद्मश्री ने आह्वान किया कि पुरखों की प्राचीन विधि से ही जलसंकट से निपटा जा सकता हैं,खेत में मेड़-मेड़ पर पेड़’ के मन्त्र को हम सभी को अपनाना होगा
♂÷हम मानते हैं नदिया हमारी मां है ऐसे में छोटी नदियों को बचाने के लिए,पुनर्जीवन के लिए राज-समाज- के साथ सभी लोगों को अभी से ही इस अभियान में लगना पड़ेगा।

उक्त आह्वान पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने नदियों के पुनर्जीवन विषय पर बुंदेलखंड के झाँसी में आयोजित राष्ट्रीय विमर्श में किया।
उन्होंने उपस्थित जनों को सम्बोधित करते हुए आगे कहा कि प्राचीन काल से लेकर अब तक जल संरक्षण के लिए पुरखों की विधियां ही कारगर है,पानी बचाने का मूल मन्त्र है”खेत पर मेड़-मेड़ पर पेड़” लोग अवश्य लगाए जिससे जलस्तर की वृद्धि हो साथ ही हमारी आने वाली पीढ़ियों को जलसंकट से न जूझना पड़े।जलयोद्धा के नाम से सुविख्यात देश-दुनियां में पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने आगे कहा कि जब तक छोटी नदियां साफ़ नही हो जाती हैं तब तक बड़ी नदियां जीवित नही हो सकती,प्रत्येक बड़ी नदी का निर्माण छोटी नदियों से ही होता है।

उन्होंने बात जारी रखी कि देश
के विकास में छोटी नदियों का बड़ा योगदान है, समाज को,किसान को छोटी नदियां अधिक मात्रा में पानी दे रही है और छोटी नदियां अधिकांश गांवों के पास ही होती है।रिद्धि-प्रसिद्धि-समृद्धि का रास्ता नदियों के तट से मिला है और साथ ही सभ्यता का जन्म भी नदी के किनारे हुआ।

जलयोद्धा ने कहा 40 वर्ष पहले नदी का नाम बदलकर नाला कर दिया गया है ऐसा बुंदेलखंड के कई जनपदों में हुआ है, ऐसे में छोटी नदियों में सर्वे होना चाहिए जो 10 से लेकर 100 किलोमीटर तक कि जलयात्रा करती हैं और अंत में किसी न किसी बड़ी नदी में जाकर समाहित हो जाती हैं।नदियों के पुनर्जीवन हेतु राष्ट्रीय विमर्श बुंदेलखंड झांसी में हुआ इस अवसर राष्ट्रीय विमर्श में मुख्य रूप से कुलपति डॉ. ए.के. सिंह, जिलाधिकारी झांसी जो कि एवरेस्ट विजेता भी है रविन्द्र कुमार,केन बेतवा प्राधिकरण के मुख्य कार्य अधिकारी प्रशांत कुमार दीक्षित, श्री संजय,श्री हर्ष सहसंगठन मंत्री इतिहास संकलन,सिक्योरिटी जनरल हुमन राइट्स कमिशन के भरतलाल, चेयरमैन हिमालयन रिवर वेशन काउंसिल डॉ. इंदिरा खुराना, चेयरमैन तेलंगना वाटर बोर्ड के प्रकाश राव सहित 15 राज्यों में जल संरक्षण पर काम करने वाले और नदियों को बचाने के अभियान चलाने वाले कई विश्वविद्यालयों,महाविद्यालयों के प्राध्यापक,प्राचार्य गण,कृषि विश्वविद्यालय के शिक्षक गण, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, शिक्षा विद, साहित्यकार, किसान, पानी के पैरोकार इस राष्ट्रीय विमर्श में शामिल होकर गम्भीरता पूर्वक जल संरक्षण के उपाय और छोटी नदियों की साफ सफ़ाई के साथ उनको पुनर्जीवित करने पर चर्चा हुई।




