लेखक-सुभाष चंद्र
और कुछ मामलों में गोली की रफ़्तार से फैसले होते हैं
अभी कुछ दिन पहले CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट को तारीख पर तारीख देने वाला कोर्ट बनता नहीं देखना चाहते,उन्होंने बताया कि सितंबर और अक्टूबर के 2 महीनों में ही 3688 पर्चियां कोर्ट को दी गईं जिनमें केस स्थगित करने की मांग की गई थी ,इस तरह के स्थगन मांगने से शीघ्र सुनवाई का उद्देश्य निष्फल होता है।
तारीख पर तारीख देना तो हर कोर्ट में नियम जैसा हो गया है,अपनी सहूलियत के अनुसार। वकील लोग केस स्थगित करने की मांग करते हैं लेकिन स्थगन देने वाले तो जज ही होते हैं और इसलिए जिम्मेदारी तो जजों की भी बनती है।
देश की अदालतों में 5 करोड़ से ज्यादा केस लंबित हैं और यदि सुप्रीम कोर्ट अपने ही लंबित मुकदमों की लिस्ट निकाल लेगा तो पता चलेगा कि वर्षों से बहुत से केस लंबित हैं जिनमें तारीख ही नहीं दी जाती।
इसके विपरीत कुछ केस तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत के जैसे होते हैं जिनकी सुनवाई एक दिन में 2 – 2 बेंच बना कर गोली की रफ़्तार से फैसले कर दिए जाते हैं चाहे रात में ही कोर्ट को क्यों न बैठना पड़े,
ऐसे केस में एक दिन यदि सुनवाई न हो आसमान गिर जाता है।
कुछ मामले बता रहा हूं जिन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट समेत कई कोर्ट गहरी नींद में सो रहे हैं लेकिन सुनवाई के लिए तारीख नहीं दे रहे।
-रोहिंग्या घुसपैठियों ने 2017 में याचिका दायर की थी जिसमें 6 दिग्गज वकील खड़े थे उनके लिए लेकिन 6 साल से सुनवाई नहीं हो रही; वे लोग “अनधिकृत रूप से रह रहे हैं और अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं।
-ट्रिपल तलाक पर अगस्त, 2017 में फैसला होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई, 2018 में मुसलमानों में निकाह हलाला और बहुविवाह को गैरकानूनी करार देने के लिए संविधान पीठ से सुनवाई का फैसला किया था लेकिन 5 साल से सुनवाई तो क्या बेंच भी गठित नहीं हुई है।
-तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने 14 नवंबर, 2017 को आदेश दिया था कि 12 सप्ताह बाद फ़िल्म अभिनेता सलमान खान को हाई कोर्ट द्वारा Hit n Run केस में बरी करने के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की अपील पर सुनवाई की जाएगी लेकिन आज 6 साल बाद भी सुनवाई की तारीख तय नहीं की गई है।
-मार्च, 2018 में ED और CBI ने 2G केस में सभी आरोपियों को दिसंबर, 2017 के ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी करने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी।
- कोर्ट ने 5 अक्टूबर, 2020 से रोज सुनवाई के लिए कहा था लेकिन अभी तक केस सिरे नहीं चढ़ा है और A Raja एवं अन्य सभी मौज ले रहे हैं।
-बिहार राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को CBI अथक परिश्रम के बाद चारा घोटाले के 5 मुकदमों में साढ़े 32 साल की सजा दिलाने में सफल हुई लेकिन हर केस में लालू यादव जमानत पर मौज कर रहे हैं, जबकि अन्य आरोपी सजा भुगत रहे हैं।
सभी 5 मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की अपीलें झारखंड हाई कोर्ट में लंबित हैं जिनमे सबसे पहली अपील दिसंबर, 2013 में दायर की गई थी लेकिन आज तक सुनवाई की तारीख नहीं दी गई है, जबकि हाई कोर्ट में 6 चीफ जस्टिस आ चुके हैं जिनमें 2 तो सुप्रीम कोर्ट के जज बन गए थे।
-CWG घोटाले में सुरेश कलमाड़ी के खिलाफ केस 20 मई, 2011 को चार्ज शीट दायर हुई थी लेकिन आज 12 साल में भी फैसला नहीं हुआ है।
ऐसे बहुत केस होंगे जिनमे तारीख ही नहीं दी जाती लेकिन सिब्बल जैसे कुछ वकील भी हैं जो टेलीफोन पर ही अपने Clients को जमानत दिलवा देते हैं।
अदालतों को अपने आचरण पर गहन आत्मनिरीक्षण कर सुधार करना होगा और तभी न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा हो सकेगी।

(लेखक उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं)




