(आलोक तिवारी)
(मथुरा)
✓ बाढ़ स्टेयरिंग ग्रुप की मीटिंग मई में ही कर ली गई थीं, समीक्षा के लिए जल्द ही की जाएगी बैठक: डीएम
देश के कई हिस्सों में मानसूनी वर्षा के चलते बाढ़ आ जाने से उन स्थानों के निवासियों को भारी समस्याओं के साथ जनहानि, और पलायन की स्थिति देखते हुए प्रदेश सरकार सख़्त हो गई है।
कुछ दिनों से पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के कई जिलों में बाढ़ के हालात बन गए हैं, इसे देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अधिकारियों को बाढ़ से निपटने के लिए सख़्त निर्देश दिए हैं।
इधर मथुरा में भी संभावना जताई जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ेगा। यदि ऐसा हुआ तो मथुरा में पिछले साल की तरह हालात हो सकते हैं। डीएम ने बाढ़ से बचाव व राहत कार्य की तैयारियों के निर्देश एक माह पहले ही दिए थे मगर, अधिकारियों ने स्थानीय स्तर पर कोई इंतजाम अभी तक नहीं किया है। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि एक से दो घंटे की बारिश में जलभराव होने वाले शहर को अधिकारी बाढ़ से कैसे बचाएंगे।
यमुना का जलस्तर बढ़ने पर वृंदावन और मथुरा सहित मांट क्षेत्र के निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आते हैं और लोगों के घरों में पानी भर जाता है जिससे उनको पलायन करना पड़ता है। पिछले साल 15 दिनों तक बाढ़ की स्थिति मथुरा जिले में रही थी। उस स्थिति से सबक लेते हुए भी अधिकारियों ने अभी तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किया है। अस्थाई संरक्षण केंद्र तक नहीं बनाए गए हैं तो नालों की सफाई भी पूरी तरह से नहीं हो पाई है। नतीजतन बारिश में शहर जलभराव का दंश झेलने लगता है। वहीं, देहात इलाकों के जलाशयों और नहरों की सफाई भी अभी तक पूरी तरह नहीं हुई है। यमुना किनारे के डूब क्षेत्रों का सर्वे भी नहीं कराया गया है। उधर इस बाबत जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ स्टेयरिंग ग्रुप की बैठक मई में ही कर ली थी। बैठक में दिए आदेशों का कितना पालन हुआ है इसकी समीक्षा के लिए जल्द ही बैठक में की जाएगी।




