(मुकेश सेठ)
(मुंबई)
√ जल संकट न होने पाए इसके लिए सरकार पूरी ताकत से कर रही काम:रामकेश निषाद
√ जल संरक्षण की शिक्षा प्राथमिक स्तर से लेकर परास्नातक तक के छात्रों को दी जानी चाहिए:पद्मश्री उमाशंकर पांडेय
√ राज्य भूजल सप्ताह समापन समारोह में अतिथियों,वक्ताओ ने जल संरक्षण के उपायों और इसके संकट से निपटने की कार्य योजना पर किया विचार
आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट से बचाने के लिए प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रीय कर्तव्य समझ कर एक तरफ़ जल संरक्षण के लिए आगे आना होगा तो वहीं दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण भी करना होगा।

उक्त आह्वान मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश शासन के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने जलराज्य भूजल सप्ताह समापन समारोह के अवसर पर किया।
उन्होंने जलयोद्धा के रूप में प्रसिद्ध पद्मश्री उमाशंकर पांडेय की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि हम सभी को इनकी तरह पानी की बूँदों को बचाने और पौधरोपण की दिशा में दशकों से किये जा रहे अथक प्रयासों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने कहा कि प्रदेश में जल संकट न होने पाए इसके लिए प्रत्येक स्तर पर पूरी क्षमता से काम कर रही है।

पद्म श्री उमाशंकर पांडेय जी जैसे जल मनीषी, सामाजिक संस्थाओ को लेकर जल संरक्षण और पौधरोपण के वृहद अभियान में आम जनता को जागरूक करने और जोड़ने का अभियान चलाये हुए है।
नागरिकों को वर्तमान के इतर बेहतर भविष्य की दिशा में इस जल संरक्षण की मुहिम में साथ आना होगा।
प्रमुख वक्ता के रूप में लोगों को संबोधित करते हुए जलयोद्धा उमाशंकर पांडेय ने कहा कि पानी ही ऐसी चीज है जो कि बनाई नही जा सकती है, आज हम सभी ने आधुनिक बनने और दिखने की चाह में पुरखों के द्वारा अपनाये गए पानी बचाने और जल स्तर बनाये रखने के उपाय के तहत “खेत में मेङ- मेङ पर पेड़” का मंत्र भूलते गए। जिसका दुष्परिणाम हमें जल संकट, पर्यावरण पर संकट झेलना पड़ रहा है।

पद्मश्री पांडेय नें आगे कहा कि आज हमको आधुनिक होती जा रही दुनिया में रहते हुए भी एक बार फ़िर से पुरखों के बताये उपाय पर काम करने के साथ ही पानी के बूँदों को अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुखमय बनाने के लिए बचाने की दिशा में अभी से जुट जाना होगा।
पानी के पहरेदार पांडेय ने सरकार से मांग की कि वर्षा जल संरक्षण की शिक्षा प्राइमरी से दी जानी चाहिए क्योंकि भारत में 25 करोड़ से अधिक बच्चे प्राथमिक स्तर से लेकर परास्नातक तक की शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान प्राप्त कर रहे हैं। दुर्भाग्यवश हमारे प्राथमिक के पाठ्यक्रमों से लगाकर उच्च स्तर तक कोई भी पानी की पाठ शाला, पानी विश्वविद्यालय न तो भारत में है और न ही पूरी दुनिया में ।

कृषि का विश्वविद्यालय है, पेट्रोलियम विश्वविद्यालय है,विधि विश्वविद्यालय है लगभग कई प्रकार के विषयों पर विश्वविद्यालय हैं किन्तु दुर्भाग्यपूर्ण है कि पानी के बगैर कुछ भी नही हो सकता और उस पानी के लिए ही विश्वविद्यालय नहीं है।
जल योद्धा नें बताया कि पूरी दुनिया में में जल संकट है पानी बनाया नहीं जा सकता केवल बचाया जा सकता है ,हम अकेले नदी नहीं बना सकते, तालाब नहीं बना सकते, कुआं नहीं खोद सकते लेकिन दैनिक जीवन में जो भी उपलब्ध पानी है उसका कैसे इस्तेमाल किया जाए,कम से कम पानी में दैनिक क्रियाएं कैसे पूरी हो और भविष्य के लिए पानी सुरक्षित रहे इसकी शिक्षा जरूरी है इसका पाठ्यक्रम आवश्यक है ।
इसी उद्देश्य से पानी की पाठशाला जल शक्ति विद्यापीठ के माध्यम से स्थापित की जाएगी और उनमें केवल सामुदायिक आधार पर पुरखों
की परंपरागत तथा नवीन विधियों को ध्यान में रखते हुए पानी बचाने के परंपरागत और नवीन ज्ञान को युवा पीढ़ीको सिखाया जाएगा।
हमने राज्य भूजल तथा अटल भूजल योजना के सहयोग से बुंदेलखंड के महोबा जिले से तीन पानी की चलती फिरती पाठशालाओं के अनुभव के आधार पर पानी पाठशाला का एक साहित्य तैयार किया है।
जिसका लोकार्पण आज जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह तथा जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद जी ने किया।
राज्य भूजल सप्ताह समापन समारोह कार्यक्रम के अवसर उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव जल अनुराग श्रीवास्तव, विशेष सचिव अरुण कुमार, निदेशक भूजल डॉ राजेश कुमार प्रजापति,परमार्थ अपर निदेशक डॉ संजय सिंह, राज्य भूगर्भ जल विभाग अनुपम श्रीवास्तव,जल शक्ति विद्यापीठ के सचिव अंकित कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि निकट भविष्य में हम और सरल भाषा में पानी की पाठशाला का साहित्य तैयार करेंगे ।
इस अवसर दिलीप गुप्ता, साकेत श्रीवास्तव जी पूर्व निदेशक भूजल गर्भ विभाग उत्तर प्रदेश,बीके उपाध्याय,
जल क्षेत्र में काम करने वाली ग्राम प्रधान कानपुर देहात श्रीमती निधि कटियार,श्रीमती दिव्या त्रिपाठी चित्रकूट,श्रीमती रचना श्रीवास्तव बाराबंकी को राज्य स्तरीय सम्मान जल शक्ति मंत्री ने प्रदान किया।




