(आलोक तिवारी)
(मथुरा)
थाना छाता क्षेत्र की रहने वाली एक युवती को ब्लैकमेल करके बलात्कार करने आरोप में फंसाए गए किशोर को न्यायलय ने दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया है ।
आरोपी किशोर के अधिवक्ता ने न्यायलय में जिरह की तो अभियोजन के अधिवक्ता और युवती तथा उसके परिजन घटना होने के कोई ठोस गवाह या साक्ष्य नहीं दे सके। पीड़ित किशोर के अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने कहा कि न्यायलय में सुनवाई के दौरान हुई बहस में यह साबित हो गया कि किशोर ने कोई घटना नहीं की थी, बल्कि उसे आस-पास के लोगों ने रंजिशन मनगढंत आरोपों में फंसा दिया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने कहा कि निर्दोष लोगों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है तथा आगे भी वह निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करते रहेंगे । जानकारी के अनुसार कस्बा छाता के एक मोहल्ले की रहने वाली एक 20 वर्षीय युवती के पिता ने विगत अप्रैल माह में कस्बा छाता में अपनी ननिहाल में रह रहे एक 17 वर्षीय किशोर के खिलाफ बलात्कार और मारपीट करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।
उस समय पुलिस ने किशोर को पकड़ कर न्यायलय में पेश किया था । न्यायलय ने आरोपी किशोर को बाल सुधार गृह भेज दिया था । उस समय पुलिस ने युवती और उसके पिता के बयान दर्ज करने एवं जांच पूरी करने के बाद आरोप पत्र को किशोर न्यायलय में दाखिल कर दिया था । इसके बाद आरोपी किशोर के अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने न्यायलय से त्वरित सुनवाई पूरी करने का आग्रह किया था।
जिसे न्यायलय ने स्वीकार कर लिया था । इसके बाद किशोर न्यायलय की विद्वान न्यायधीश शुभांगी गुप्ता ने किशोर पर लगाए बलात्कार और मारपीट के आरोपों पर सुनवाई प्रारंभ कर दी थी। न्यायलय में युवती की ओर से अभियोजन के अधिवक्ता और आरोपी किशोर के अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर में बहस हुई। इसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने युवती और उसके पिता समेत अन्य के बयान दर्ज कराने के लिए बहस की तो पीड़ित युवती ने बताया कि उसके पास मोबाइल नहीं है और वह अपने पिता का मोबाइल प्रयोग करती है।
जब विद्वान अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने युवती से पूछा कि किशोर ने आपके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भेजकर कैसे ब्लैकमेल किया तो वह चुप्पी साध गई । इसके बाद उन्होंने युवती के पिता से बयान दर्ज कराते समय पुलिस रिपोर्ट के बारे में तर्क किए तो उसने न्यायलय को बताया कि वह अनपढ़ है तथा मोहल्ले के रहने वाले लोगों ने तहरीर लिखकर उससे दस्तखत करा लिए थे। बस इसी जगहा पर किशोर के अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने न्यायलय से कहा कि युवती और उसके पिता के बयानों तथा आधारहीन साक्ष्य से स्पष्ट हो रहा है कि किशोर निर्दोष है और उसे रंजिशन मनगढंत आरोपों में फंसाया गया है। किशोर के अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने न्यायलय से किशोर को दोष मुक्त करते हुए बरी करने की मांग की। वहीं अभियोजन के अधिवक्ता ने पुलिस रिपोर्ट और आरोप पत्र के आधार पर किशोर को सजा देने की मांग की। अभियोजन के अधिवक्ता की दलीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने गलत एवं मिथ्या बताते हुए न्यायलय में दिए गए युवती और उसके पिता के बयानों की ओर विद्वान न्यायधीश को अवलोकन करने का अनुरोध किया।
किशोर न्यायलय की विद्वान न्यायधीश शुभांगी गुप्ता ने युवती तथा उसके पिता के बयानों और बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर तथा अभियोजन के अधिवक्ता की दलीलों को गहनता से सुनने के बाद किशोर को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। किशोर के अधिवक्ता राजकुमार सिंह गुर्जर ने कहा कि न्यायलय ने बारीकी से सुनवाई करने के बाद निर्दोष किशोर को न्याय दिया है। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों को न्याय दिलाना ही उनकी प्राथमिकता है। उनका कहना है कि भविष्य में भी निर्दोष लोगों को वह न्याय दिलाने का पूरा प्रयास करते रहेंगे।




