लेखक: ओंकारेश्वर पाण्डेय
उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने कहा –
“जब संवैधानिक पदों ने रबर स्टैम्प बनना स्वीकार कर लिया था, सत्यपाल मलिक जी ने आज्ञाकारिता से ऊपर अपने शपथ को रखा।”
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने कहा – “उन पर तो छानबीन हुई, पर आरएसएस के 300 करोड़ के घूस प्रस्ताव की जाँच क्यों नहीं हुई? यह चयनात्मक न्याय व्यवस्था का पर्दाफाश करता है।”
राज्यपालों के लिए आदर्श उदाहरण
उनके जीवन का सन्देश इतिहास में संवैधानिक पदों पर बैठने वाले लोगों के लिए एक आदर्श के रूप में हमेशा प्रासंगिक रहेगा। उनकी समाधि के पत्थर पर लिखा जाना चाहिए – “यहाँ वो शख्स दफन है जो मानता था कि राज्यपालों को आदेश मानने से पहले संविधान पढ़ना चाहिए।
(लेखक यूनेस्को से सम्बद्ध सिग्नेचर्स थिंक टैंक के संस्थापक, राजनीतिक रणनीतिकार, प्रख्यात लेखक, विभिन्न समाचार पत्रों, टीवी चैनल व डिजिटल मीडिया के सम्पादक रहें हैं)