(संजय राय)
(नई दिल्ली)
चीफ़ जस्टिस ने अपने आदेश में कहा कि कम्पनी ने अपनी बिडिंग में लम्बित आपराधिक मामलों का नही किया था खुलासा
कितने रेलमंत्री आए,गए किन्तु आर के एसोसिएट्स एंड होटलियर्स प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी की सेटिंग होती थी सबसे
भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम लिमिटेड (आईआरसीटीसी) में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार लंबे समय से फल फूल रहा है। विभिन्न दलों के कई रेल मंत्री आए और कई चले गए, लेकिन एक ऐसी कंपनी है जिसके खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायत मिलने के बावजूद किसी न किसी तरह करोड़ों रुपये का खानपान का ठेका दे दिया जाता है। कंपनी का नाम आरके एसोसिएट्स एंड होटलियर्स प्राइवेट लिमिटेड है, जिसका 56 करोड़ रुपये का खानपान अनुबंध दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। इसके साथ ही हाइकोर्ट ने टेंडर नियमों की अनदेखी के लिए भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) को फटकार भी लगाई है।
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने आरके एसोसिएट्स को मिला 56 करोड़ रुपये का कैटरिंग अनुबंध रद्द करते हुए कहा कि कंपनी ने अपनी बिडिंग में लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया था और आईआरसीटीसी ने टेंडर देने में नियमों की अनदेखी की है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पाया कि इस कंपनी को ठेका देने में आईआरसीटीसी ने अपने टेंडर नियमों का ही उल्लंघन किया। अदालत ने आईआरसीटीसी को तीन महीने के भीतर टेंडर प्रक्रिया फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। तब तक आरके एसोसिएट्स नये अनुबंध के मिलने तक परिचालन जारी रखेगा।
बता दें कि कैंटरिंग टेंडर लेने के लिए कई कंपनियों ने बोली लगाई थी। इन कंपनियों में से एक दीपक एंड कंपनी ने 41 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। वहीं, आरके एसोसिएट्स ने 56 करोड़ की बोली लगाई और उसे यह टेंडर मिल गया। इसके बाद दीपक एंड कंपनी ने 17 अप्रैल 2024 को आरके एसोसिएट्स को दिए गए आशय पत्र को चुनौती दी। दीपक एंड कंपनी का कहना था कि आरके एसोसिएट्स ने रेलवे अधिकारियों और कुछ निजी लाइसेंसधारियों के खिलाफ 2015 में दर्ज एक लंबित मामले का खुलासा नहीं किया है। कंपनी ने दावा किया कि मामला भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच के दायरे में था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर रोक लगा दी थी, फिर भी यह आरके एसोसिएट्स को आईआरसीटीसी को इस मामले की जानकारी देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।
दिल्ली हाई कोर्ट ने बीते 22 अप्रैल 2024 को आरके एसोसिएट्स को दिए गए 56 करोड़ रुपये के कैटरिंग अनुबंध को लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं करने के चलते रद्द कर दिया। अदालत ने पाया कि बिडर द्वारा अपनी विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले उल्लंघनों का खुलासा न करना निविदा की शर्तों का उल्लंघन है और भ्रष्टाचार विरोधी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। साथ ही अदालत ने आईआरसीटीसी के इस दावे को खारिज कर दिया कि केवल पिछले तीन वर्षों के उल्लंघनों का खुलासा करना आवश्यक है।
अदालत ने यह कहते हुए कि सभी उल्लंघनों का खुलासा करना आवश्यक है, भले ही वे किसी भी समय हुए हों, कोलकाता हाई कोर्ट के दामोदर वैली कॉरपोरेशन बनाम बीएलए प्रोजेक्ट्स के निर्णय का भी हवाला दिया, जिसके मुताबिक पिछले तीन वर्षों से पहले के उल्लंघनों का खुलासा आवश्यक है जब विश्वसनीयता दांव पर हो। अदालत ने आगे कहा कि इस खुलासे के न होने से आईआरसीटीसी को आरके एसोसिएट्स की विश्वसनीयता का आकलन करने का अवसर नहीं मिला, क्योंकि आपराधिक पूर्ववृत्त का खुलासा नहीं किया गया था।
गौर करने वाली बात यह है कि आरके एसोसिएट्स के खिलाफ आईआरसीटीसी को सबसे अधिक अनियमितता की शिकायत मिली है। इस बात को खुद आईआरसीटीसी ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में स्वीकार किया है। इसके बावजूद आईआरसीटीसी के अधिकारी पिछले 30 वर्षों से इस कंपनी को खानपान का ठेका देते चले आ रहे हैं।




