(मुकेश शर्मा)
(भोपाल)
√ तमाम सक्षम न्यायालयों के आदेशों के बाद एसडीएम ने कंप्यूटर में दर्ज करने के लिए किस आधार पर बनाया जांच दल?
√ मामला मौ में बसी पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम कॉलोनी का
मध्यप्रदेश के भिंड जिले की मौ तहसील में पटवारी और एसडीएम की मिली भगत का अजीबो गरीब मामला सामने आया है जहा मौ नगर परिषद में बसी भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम के नाम की वर्षों पुरानी कॉलोनी का खसरा कंप्यूटर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पटवारी के यहां अटक गया। तमाम सक्षम न्यायलयों के आदेश के बाद पटवारी अखिलेश राजावत ने एसडीएम पराग जैन से सांठ गांठ कर खसरे को कंप्यूटर में दर्ज करवाने के लिए जांच कमेटी गठित करवादी जो राजस्व विभाग कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। बतादें भूमि सर्वे क. 995/1 रकवा 2.163 हे. बांके मौजा तहसील मौ में भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम के नाम पर बसी बाबू जगजीवन राम कॉलोनी वर्षो से कंप्यूटर में दर्ज होने की वाट जोह रही है।पुराने रिकॉर्ड में आवेदकों के नाम निरंतर भूमि स्वामित्व पर अंकित हैं।

लेकिन वर्तमान खसरा कंप्यूटर में दर्ज नहीं हैं।आवेदकों ने बताया कि पटवारी अखलेश राजावत ने कॉलोनी का खसरा कंप्यूटर में दर्ज करना छोड़ दिया है।वर्तमान में पटवारी रिपोर्ट के अनुसार भूमि का प्रकार कृषि बताया है जो रिक्त है।उक्त भूमि पर आवेदकों के नाम दर्ज न होने से दुरूस्ती अभियान के दौरान आवेदकों ने न्यायलय तहसीलदार मौ के यहाँ आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जिस पर तहसीलदार मौ ने प्र.क्र. 17/2023-24 बी-121 दर्ज कर आदेश दिनांक 12/10/2023 में कार्यवाही कर पटवारी अखिलेश राजावत की रिपोर्ट एवं राजस्व निरीक्षक मौ की रिपोर्ट के आधार पुराने खसराओं अन्य दस्तावेजो में उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को दृष्टिगत रखते हुए तहसीलदार मौ ने उक्त आदेश पारित कर दिया उक्त आदेश का पटवारी अखिलेश राजावत द्वारा कम्प्यूटर में जानबूझ कर दर्ज नहीं किया जा रहा है।

जबकि आदेश में पटवारी अखिलेश राजावत की स्वयं एवम राजस्व निरीक्षक की जांच रिपोर्ट लगी हुई है।प्रकरण में कलेक्टर द्वारा पारित आदेश दिनांक 26/03/1971 के प्र. क्र 40/1970-71/237 द्वारा शासन द्वारा आबादी घोषित कर भवन निर्माण स्वीकृति के संबंध में कार्यवाही हेतु लिखा गया। कलेक्टर के पत्र दिनांक 26.07.1973 कलेक्टर जिला पंचायत एवं सेवा अधिकारी के पत्र दिनांक 08.08.1973 एस.डी.ओ.गोहद के पत्र दिनांक 28.07.1973 एवम कलेक्टर भिण्ड आदिम जाति कल्याण विभाग के पत्रों के पालन में ग्राम पंचायत मौ के ठहराव प्रस्ताव क्र. 12 दिनांक 06.08.1973 के द्वारा 06.09.1973 को 34 लोगो को म.प्र. भू-राजस्व सहिता की धारा 244 के अंतर्गत ले-आउट के मुताबिक 2025 वर्गफीट के भूखण्ड भूमि स्वामी स्वत्व पर पट्टे आवंटित किये गये थे शेष भूमि खेल का मैदान शाला भवन कूप निर्माण पार्क हेतु सुरक्षित रखी गई है जो निरंतर खसराओं में अंकित है मात्र कम्प्यूटर मे दर्ज करना छूट गया है।मौ निवासी एक व्यक्ति हरदयाल पुत्र अयोध्या प्रसाद ने उक्त भूमि हडपने की नियत से वर्ष 1974 से 1997 तक न्यायालयो में मुकदमा भी लड़ा।
जो माननीय हाईकोर्ट में 20.12.1996 को सुप्रीम कोर्ट में 08.09.1997 में हार चुका है। न्यायालयो के आदेश के पालन में तहसीलदार ने प्र.क्र.165/1996-97 बी 121 आदेश दिनांक 01.03.1997 स्वावदेको के नाम खसरा मे दर्ज किये गये थे जो निरंतर खसराओ मे अंकित हैं केवल कम्प्यूटर मे छोड दिये गये हैं।
इसके अलावा कलेक्टर द्वारा तहसीलदार के प्र.क्र.438/1997-98 बी 121 आदेश दिनांक 01.01.1999 को तहसीलदार गोहद नगर पंचायत मौ पुलिस मौ द्वारा आवेदकों को पत्र लिखकर मौके पर कब्जा दिलाया गया और मौके पर आवेदक उक्त भूमि पर काबिज हैं।नगर पंचायत मौ से भवन निर्माण की स्वीकृति लेकर मकान बनाकर स्थायीरूप से निवास कर रहे है। आवेदक किशनलाल,उदयप्रताप,कृपालदास, कल्यानदास,जगजीवन राम निवासी बाबू जगजीवनराम कालोनी ने कलेक्टर से शिकायती आवेदन देकर कंप्यूटर में दर्ज करवाने का आदेश देने एवम पटवारी अखिलेश राजावत के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है।




