लेखक~सुभाषचंद्र
राहुल गांधी की सजा अदालत ने माफ़ नहीं की,भाजपा या सरकार का इसमें क्या दोष
♂÷ गुजरात हाई कोर्ट के निर्णय पर कांग्रेस के नेता बिलख रहे हैं, क्योंकि कोर्ट ने राहुल गांधी की 2 साल की सजा खत्म करने से मना कर दिया।लगता है अभिषेक मनु सिंघवी और जयराम रमेश जैसे नेता ही राहुल गांधी को जेल में देखना चाहते हैं।
राहुल गाँधी के अधिवक्ता पूर्व केंद्रीय क़ानून मन्त्री व वरिष्ठ काँग्रेस नेता सिंघवी ने वही पुराना घिसा पिटा राग अलापा है और कहा है कि “गुजरात हाई कोर्ट का निर्णय कानूनी रूप से गलत है और कांग्रेस कानूनी ही नहीं बल्कि पूरी ताकत से राजनीतिक लड़ाई भी लड़ेगी”।
सिंघवी ने आगे कहा कि “संसद के भीतर ही नहीं बल्कि बाहर भी राहुल गांधी की सच एवं निडर आवाज़ से परेशान केंद्र की भाजपा सरकार उनकी आवाज़ को दबाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोटने के लिए नए – नए तौर तरीके खोज रही है”,पार्टी अगला संसद सत्र शुरू होने से पहले सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी ।
राहुल के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को सिंघवी ने “कुटीर उद्योग” बताया है।
फैसले को सही ठहराने के लिए सावरकर के लिए दिए राहुल के बयान का भी सन्दर्भ लेना सबसे गलत है क्योंकि वह बयान मजिस्ट्रेट के फैसले के बाद दिया गया था।
कांग्रेस कितना बोलने की आज़ादी चाहती राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस के नेताओं के लिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यदि कांग्रेस समझती है कि किसी को भी गाली देकर अपमानित करने का अधिकार है तो पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखे कि उसने कांग्रेस में अपने लोगों को कितनी आज़ादी दी हुई है या दूसरों को कितनी स्वतंत्रता देती है?
मशहूर टीवी जर्नलिस्ट अर्नब गोस्वामी सोनिया गांधी का चैनल पर असली नाम ले लेता है तो कांग्रेस ने 100 से ज्यादा मुकदमे उसके खिलाफ ठोक दिए, कांग्रेस के लोग “हर हर महादेव” का नारा लगाते हैं तो पार्टी उन्हें सस्पेंड कर देती है,कर्नाटक के नेता केवल आपस में बात करते हैं कि DK Shivkumar के लोग पैसा खा रहे हैं तो आप उन्हें पार्टी से निकाल देते हैं, आपके नेता नारा लगाते हैं – “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” वो सब ठीक है ?
आपकी पार्टी की महिला नेता अंगकिता दत्ता आपके Youth Congress President Srinivas BV पर यौन शोषण का आरोप लगाती है तो आप उसे पार्टी से ही निकाल देते हैं और उसी श्रीनिवास की गिरफ़्तारी पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगा देता है। उधर पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ “अभद्र” भाषा बोलता है तो उसे भी मीलॉर्ड गिरफ्तार होने से रोक देते हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए इतना घटिया कांग्रेस का रिकॉर्ड होते हुए पार्टी सरकार से उम्मीद करती है कि राहुल गांधी को देश की राजनीति में अभद्रतापूर्ण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलती रहे।
गुजरात हाई कोर्ट ने अगर फैसले में मजिस्ट्रेट द्वारा सजा सुनाने के बाद के मामलों का जिक्र किया है तो वह केवल यह बताने के लिए कि राहुल गांधी में सजा मिलने के बाद भी कोई सुधार नहीं है और यदि उसने कोर्ट से क्षमा याचना कर ली होती तो भी शायद कुछ नरम रुख अपना सकता था परंतु राहुल गाँधी तो डंके की चोट पर वीर सावरकर का अपमान करने पर आमादा थे और जबसे सावरकर के पोते ने उनके खिलाफ केस दायर किया है, तब से राहुल ने सावरकर पुराण बंद किया हुआ है।अगर सत्य बोलने की इतनी हिम्मत है तो वीर सावरकर के खिलाफ अपनी बयानबाजी जारी रखते।
सुप्रीम कोर्ट से सिंघवी को बहुत उम्मीदें हैं क्योंकि उन्हें लगता है चीफ जस्टिस तो उनके कॉलेज के दिनों के सहपाठी है, लेकिन हो सकता है वह भी पूछ ले कि किसी सरनेम के सभी लोगों को चोर कैसे कह सकते हो और क्या अभी भी उस बयान पर कायम हो या माफ़ी मांगना चाहते हो , इसका जवाब ले कर जाना चाहिए सिंघवी को अदालत में।

(लेखक सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं)




