(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट के तहत गुजरात के मोरबी जिले में दशकों से रह रहे दो दलित परिवार के 13 सदस्यों को DM ने सौंपी इंडियन सिटीजनशिप
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के दलितों के साथ धार्मिक आधार पर किया जाता था अत्याचार
एक तरफ़ मोदी सरकार द्वारा पूरे देश में सिटीजन एमेंडमेंट एक्ट लागू करते ही विपक्षी दल भभक उठे और उन्होंने इल्जाम जड़ने शुरू कर दिए।

विपक्षी दल कह रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी हार को देखते हुए वोटों के ध्रुवीकरण के लिए CAA लाया गया है तो केन्द्र सरकार और बीजेपी ठसक के साथ कह रही है कि पाकिस्तान,अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर उत्पीड़ित होकर आए देश में दशकों से रह रहे गैर मुस्लिमों को हम हर हाल में नागरिकता देकर उन्हे सारी सरकारी सुविधा देंगे।
वहीं देश में सबसे पहले गुजरात के मोरबी ज़िले में पाकिस्तान से दो दशक पूर्व धार्मिक उत्पीड़न और अत्याचार के चलते यहां आकर रह रहे दो दलित परिवार के कुल तेरह सदस्यों को भारत की नागरिकता दी गई है ।
भारत की नागरिकता पाकर सभी के साथ विशेषकर बेटियों के चेहरों पर हर्षोल्लास और संतोष का भाव देखा गया, क्योंकि अब उन्हें सुरक्षा के साथ सम्मान,स्वाभिमान के साथ जीने का रास्ता मिल गया ।
CAA के तहत मिली भारतीय नागरिकता से इन तेरह सदस्य भी अब भारत सरकार और गुजरात सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ ले पाएँगे जिनसे यह दलित परिवार दशकों से वंचित रहे।
कहा जा सकता है कि विपक्षी दल जितना CAA कानून के खिलाफ़ बोलेंगे या एक ख़ास वर्ग को भड़का कर सियासी फ़ायदा उठाने की कोशिश करेंगे तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव में CAA कानून को लागू करने वाली मोदी सरकार का चट्टानी जिगरा साबित कर सबसे बड़े मुद्दे बनाकर वोटों को हलोरने में लगने जा रही है।

विदित हो कि सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट में यह प्राविधान किया गया है कि पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर उत्पीड़ित होकर दिसम्बर 2014 तक के पहले से देश में रह रहे हिन्दू,जैन, सिख, ईसाई,बौद्ध और पारसी लोगों को भारतीय नागरिकता देने वाली है जिससे वह भी भारतीय नागरिक बनकर सभी सरकारी सुविधाओं का समान रूप से लाभ ले सकें।




