लेखक~मुकेश सेठ
ब्रिटिशराज के दौरान दिल्ली आए किंग जॉर्ज के सम्मान में गायन कर अतिथियों को किया था मंत्रमुग्ध
♂÷सङ्गीत की दुनियां ऐसी है कि वह स्रोताओं से सम्बंध स्थापित कर ही लेती है, सङ्गीत भाषा, धर्म,मज़हब, रिलीज़न के परे ख़ुद में एक सुर सागर है जिसके अथाह गहराईयों में डूबकर स्रोता सुधबुध खो बैठता है।
भारतीय सङ्गीत जगत ने ऐसे-ऐसे महान सुरों के महारथी दिए हैं कि उनके इतिहास से अवगत होकर लोग ख़ुद पर गर्व महसूस कर सकते हैं।
आज इतिहास के पन्नों को पलटते हुए हम बात करेंगे गौहर जान की। वही गौहर जान जिनको भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार कहा जाता है।
26 जून, 1873 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पैदा हुईं गौहर जान क्रिश्चियन थीं। उनका असली नाम एंजेलीना योवर्ड था और वह आर्मेनिया मूल की थीं। उनकी मां का नाम विक्टोरिया हेम्मिंग्स और पिता का नाम विलियम योवर्ड था।
गौहर जब 6 साल की थीं, तब उनके माता-पिता का तलाक़ हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने बेटी के साथ इस्लाम धर्म अपना लिया।
तकरीबन 20 से ज़्यादा भाषाओं में ठुमरी से लेकर भजन तक गाने वाली गौहर जान भारत की पहली गायिका थीं, जिन्होंने भारतीय संगीत के इतिहास में अपने गाए गानों की रिकॉर्डिंग कराई थी। यही वजह है कि उन्हें ‘भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार’ का दर्जा मिला है। 2 नवंबर, 1902 को गौहर जान का पहला गाना रिकॉर्ड हुआ था। इसके बाद उन्होंने करीब 600 गीत रिकॉर्ड किए। गौहर जान दक्षिण एशिया की पहली गायिका थीं, जिनके गाने ग्रामोफोन कंपनी ने रिकॉर्ड किए थे। 1902 से 1920 के बीच ‘द ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया’ ने गौहर के हिन्दुस्तानी, बांग्ला, गुजराती, मराठी, तमिल, अरबी, फारसी, पश्तो, अंग्रेजी और फ्रेंच गीतों के छह सौ डिस्क निकाले थे।
गौहर खान ने अपने हुनर के दम पर ऐसा दबदबा बनाया था कि रियासतों और संगीत सभाओं में उन्हें बुलाना प्रतिष्ठा की बात हुआ करता थी। और उस दौरान के लोग कहा करते थे- “गौहर के बिना महफ़िल, जैसे शादी के बिना दुल्हन।” 1903 में गौहर जान के रिकॉर्ड भारतीय बाजारों में दिखने लगे और इनकी काफी मांग थी।
वह बहुत मशहूरियत हासिल कर चुकी थी यहां तक कि जब ब्रिटिश साम्राज्य के किंग जॉर्ज भारत की राजकीय यात्रा के तहत दिल्ली आये तब उनके दरबार में आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों के लिए गौहर जान को उनके गाने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया गया था।
गौहर जान गायन के क्षेत्र में बेहद ही उम्दा व निष्णात गायिका मानी जाती थी।वह अपनी शर्तो व भारी कीमत लेकर ही गायन करती थीं।
ऐसे-ऐसे महान कलाकारों को भारतीय गीत संगीत की दुनियां भुला दे रही है जिन्होंने भारतीय सङ्गीत जगत को इतिहास के बीते दौर में एक ऊँचे मुक़ाम पर पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

÷लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं÷




