लेखक~मुकेश सेठ
16 अप्रैल 1853 में बम्बई से ठाणे तक चलने वाली देश की पहली ट्रेन चालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नाना सेठ स्वर्णकार व्यवसाई घराना में जन्में होने के कारण वे धन संपदा से थे काफी संपन्न
♂÷आज भारतीयों को यही मालूम है कि भारत मे पहली ट्रेन अंग्रेजो ने लायी औऱ वह तत्कालीन बम्बई के विक्टोरिया स्टेशन से ठाणे के बीच चली थी।
भारत की पहली ट्रेन चलने का यह अर्धसत्य सबकों ज्ञात है किंतु पूर्ण सच यह है कि भारत की प्रथम “लौह पथ गामिनी वाहन” चलवाने की ऐतिहासिक योजना के पीछे का मस्तिष्क व योगदान बेहद सम्पन्न स्वर्णकार परिवार में जन्में नाना जगन्नाथ शंकर सेठ मुरकुटे का है जिनका जन्म 10 फ़रवरी वर्ष 1803 में व निधन 31 जुलाई वर्ष 1865 में हुआ था।
भारत के वह बेहद परोपकारी व शिक्षा के क्षेत्र में तमाम नामी शिक्षण संस्थानों के स्थापना में उनका योगदान रहा।
कहा जाता है कि इंग्लैंड में जब पहली बार ट्रेन चली तो ये पूरी दुनिया की हेडलाइन बन गयी, ये खबर जब नाना जगन्नाथ सेठ तक पहुंची तो उन्हे लगा ये ट्रेन उनके गांव, शहर में भी चलनी चाहिए।
अब नाना जी कोई आम व्यक्ति तो थे नहीं उनका व्यवसाय बहुत बड़ा था, उनका प्रभाव इससे समझ सकते है कि कई अंग्रेज अफसर उनके सानिध्य में रहते थे।
उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए कई विश्वविद्यालय खोले थे जिसमे कई महान क्रांतिकारियों ने बाद में इसमें शिक्षा को ग्रहण किया, उन्होंने लड़कियों के लिए मुंबई में पहला स्कूल खोला। नानाजी अपने स्कूलों में अंग्रेजी के साथ संस्कृत पढ़ाने की भी व्यवस्था की थी।
वर्ष 1843 में वे अपने पिता जी के मित्र जमशेद जीजोभोय उर्फ जेजे के पास गए और इंडियन रेलवे का अपना आइडिया उन्हे बताया, भारत में ट्रेन चलने के आइडिया से सुप्रीम कोर्ट के जज थॉमस और ब्रिटिश अधिकारी स्किन पैरी भी काफी प्रसन्न हुए।
सबको नाना सेठ का यह आइडिया शानदार लगा, इसके बाद तीनो हस्तियों ने मिलकर “इंडियन रेलवे एसोसिएशन”की बुनियाद रखी, उससे पहले अंग्रेजो का रेलवे के प्रति ऐसी कोई योजना नहीं थी।

(16 अप्रैल 1853 में बम्बई से ठाणे के बीच चलने वाली पहली ट्रेन की फ़ाइल फोटो)
जब नाना सेठ और जेजे जैसे लक्ष्मी पुत्रों व प्रभावशाली व्यक्तियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को अपना सुझाव दिया, तो उन्होंने काफी सोच विचार के बाद सरकार को इस योजना पर काम करने के लिए कहा।
इन्होंने मुंबई के बड़े बड़े व्यापारियों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ते हुए “ग्रेट इंडियन रेलवेज” नाम की कंपनी बनाई
नाना जगन्नाथ सेठ व साथियों का ये सपना वर्ग 1853 में पूरा हुआ, जब देश में पहली बार 16 अप्रैल वर्ष 1853 में बम्बई से थाणे तक ट्रेन चली, इसमें नाना जी और जेजे भी यात्री के रूप में सवार रहे।
वास्तव में हम दूसरो की एक एक बात जानते है पर अपनो के योगदान को जानने की दूर की बात है सुनना भी पसंद नही करते
क्योंकि कहीं न कहीं हमे मानसिक गुलामी की आदत हो गई है,जबकि भारतीय क्षमता, मेधा व संपन्नता पूरी दुनियां के लिए एक आदर्श के रूप में शताब्दियों से स्थापित है।

÷लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं÷




