लेखक-अरविंद जयतिलक
♂÷गोरखनाथ मंदिर पर हमले में फांसी की सजा पाने वाले अहमद मुर्तजा अब्बासी को अपने किए गए गुनाहों का तनिक भी पछतावा नहीं है। उसे फख्र है और पूछताछ में कहा भी है कि मुझे लगता है कि अल्लाह के करीब आने के लिए जेहाद का रास्ता सही है। उसे यकीन है कि जन्नत में टाॅप 100 दर्जे सिर्फ मुजाहिद्दीनों के लिए रिजर्व हैं। इसमें वहीं जा सकते हैं जो अल्लाह के लिए जेहाद करते हैं। मुर्तजा की मानें तो वह इसमें सफल हुआ है। मुर्तजा को मानसिक रुप से बीमार बताकर उसका बचाव करने वाले लोगों की आंखे खुल जानी चाहिए कि उसने स्वीकार किया है कि लोन वुल्फ अटैक के लिए वह आईएसआईएस के इग्नेमासी स्क्वाॅड से प्रभावित था और उसकी इच्छा सीरिया जाकर इस्तीशहादी दस्ते में शामिल होने की थी। जांच में पाया गया है कि उसने यूएई, कनाडा, यूके, जर्मनी, स्वीडन यानि जहां से भी फेसबुक, ट्विटर, एवं अन्य सोशल मीडिया अकाउंट से इस्लाम के नाम पर मदद मांगी गयी उसने उसे रकम भेजी है। गौर करें तो देश में अकेले मुर्तजा ही नहीं है जिसके जेहन और ख्वाब में जेहाद और जन्नत का नजारा तैर रहा है। इनकी संख्या हजारों-लाखें में हो सकती है। ये आतंकी संगठनों का मोहरा बनने को सहर्ष तैयार हैं। याद होगा गत वर्ष पहले जब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस्लामिक स्टेट समर्थक मुंबई के दो युवकों को गिरफ्तार किया था तो कहा गया कि वे बहकावे में आकर इस संगठन के प्रति आकर्षित हुए। लेकिन जब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने हैदराबाद षड़यंत्र का खुलासा किया तब भान हुआ कि इस्लामिक स्टेट को लेकर जेहादी व भ्रमित युवाओं के बीच कितना आकर्षण है। उस दौरान युवा इंजीनियर मोहम्मद इब्राहिम याजदानी की गिरफ्तारी हुई जो कि युवाओं को इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहा था। ध्यान दें तो पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, गुजरात, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और आंध्रपदेश सरीखे राज्यों से दर्जनों इस्लामिक स्टेट के समर्थकों की गिरफ्तारी हुई है। गत वर्ष पहले न्यूयार्क टाइम्स द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कहा भी गया कि हैदराबाद के इस्लामिक स्टेट से जुड़े समर्थक सीधे सीरिया स्थित आतंकियों से संचालित होते हैं। यह खुलासा इसलिए विश्वसनीय रहा कि विगत वर्षों में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अनेकों बार एयरपोर्ट पर इस्लामिक स्टेट में शामिल होने जा रहे युवाओं को गिरफ्तार किया गया। गत वर्ष पहले बेंगलुरु का रहने वाले मेंहदी मसूर के बारे में जानकारी मिली कि वह आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का समर्थक था और सीरिया जा रहे इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को बार्डर पार करने की जानकारी को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया था। गत वर्ष पहले तेलंगाना एटीएस की सूचनाओं के आधार पर रेल विस्फोट के जिम्मेदार आरोपियों को दबोचा गया। इसी तरह केरल पुलिस भी इस्लामिक स्टेट के प्रभाव में आने वाले युवाओं पर नजर गड़ाए हुए है। इन दोनों राज्यों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में पसरे खुरसान माॅड्यूल के आतंकियों तक पहुंच सकी। खुफिया जानकारी की बदौलत ही गत वर्ष मध्यप्रदेश राज्य से इस्लामिक स्टेट के संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्ताारी हुई। इन पर सेना की जानकारी पाकिस्तान को देने का आरोप था। जांच एजेंसियों की मानें तो देश के विभिन्न हिस्सों में युवा इस्लामिक स्टेट का हिस्सा बने हैं। अब तक अकेले केरल से ही दो दर्जन से अधिक युवा इस्लामिक स्टेट में शामिल हो चुके हैं। गत वर्ष पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस्लामिक स्टेट के संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह को मार गिराया गया। उसके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक एवं घातक हथियारों की बरामदगी हुई। सबसे खतरनाक बात यह कि आतंकी संगठनों का प्रभाव अब अशिक्षित और मजहबी उन्मादियों तक सीमित नहीं है। वह पढ़े-लिखे युवाओं को आसानी से अपनी ओर आकर्षित कर रहे हंै। यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए बेहद खतरनाक है। ध्यान देना होगा कि गत वर्ष पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) द्वारा जिन डेढ़ दर्जन स्थानों मसलन दिल्ली के सीलमपुर-जाफराबाद, लखनऊ, अमरोहा, मेरठ और हापुड़ में छापेमारी की गयी उसमें आइएसआइए से प्रेरित माॅड्यूल ‘हरकत उल हर्ब ए इस्लाम’ के संदिग्ध शामिल थे। इनमें ज्यादतर पढ़े-लिखे मध्यमवर्गीय परिवार के थे। यह तथ्य भी सामने आया है कि भारत के इस्लामिक स्टेट समर्थक युवा सीरिया और इराक की जंग में आईएसआईएस की तरफ से लड़ते हुए मारे गए। गत वर्ष पहले केरल के एक शख्स के मारे जाने की पुष्टि हुई। गौर करें तो इस्लामिक स्टेट पढ़े-लिखे और तकनीक से जुड़े युवाओं पर ज्यादा फोकस किए हुए है। दरअसल उसे लगता है कि वह पढ़े-लिखे लोगों के जरिए अपने संगठन का व्यापक विस्तार कर सकता है। पढ़े-लिखे जेहादी मानसिकता वाले स्काॅलर्स के बूते ही उसने गत वर्ष पहले भारत में नया प्रांत स्थापित करने का एलान किया था। तब उसने कहा था कि उसकी नई शाखा का अरबी नाम ‘विलायाह आॅफ हिंद’ (भारत प्रांत) है। याद होगा गत वर्ष पहले महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कई मुस्लिम युवाओं का इस्लामिक स्टेट आतंकी गिरोह में शामिल होने की खबरें आयी और साथ ही जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम युवाओं को इस्लामिक स्टेट का झंडा लहराते देखा गया। चूंकि जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठनों की कमर टूट चुकी है लिहाजा अब वे मुर्तजा जैसे लोगों को आगे कर अपनी विचारधारा का विस्तार करना चाहते हैं। भारत को सिर्फ आईएसआईएस और अलकायदा जैसे आतंकी संगठन से ही खतरा नहीं है। भारत को पीएफआई और इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे खतरनाक संगठनों से भी उतना ही खतरा हंै। अभी गत वर्ष ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संयुक्त कार्रवाई कर 15 राज्यों में पाॅपुलन फ्रंट आॅफ इंडिया (पीएफआई) के 93 ठिकानों पर छापेमारी कर एक सैकड़ा से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी इस मायने में महत्वपूर्ण रही कि इस संगठन का संबंध आतंकी संगठनों से जुड़ता दिखा। एनआईए के मुताबिक गिरफ्तारी और छापेमारी आतंकवादियों को धन मुहैया कराने, आतंक की टेªनिंग देने और लोगों को बरगलाने के मामले में हुई। एनआईए ने तेलंगाना और आंध्रपदेश के 32 जगहों पर भी छापेमारी की जहां जूडो-कराटे टेªनिंग के जरिए आतंकी टेªनिंग कैंप चलाया जा रहा था। उत्तर प्रदेश की जांच एजेंसियां उद्घाटित कर चुकी हैं कि इस संगठन के सदस्यों ने हाथरस में जातीय हिंसा फैलाने की भरपूर कोशिश की। इसके अलावा साल 2020 में नागरिकता कानून के विरोध में हुई हिंसा में भी इस संगठन का नाम सामने आया। याद होगा वर्ष 2012 में दक्षिण भारत में उत्तर भारतीयों के खिलाफ कैंपेन चलाकर पीएफआई और हरकत-उल-जिहाद-उल-इस्लामी द्वारा उत्तर भारतीयों को मैसेज भेजकर डराया गया। 2012 में केरल के तत्कालीन मुख्ण्मंत्री ओम्मन चांडी के नेतृत्व में कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया था कि पीएफआई प्रतिबंधित सिमी का ही स्वरुप है। यही नहीं तत्कालीन केरल सरकार ने एक शपथपत्र के जरिए उच्च न्यायालय के समक्ष यह भी उद्घाटित किया कि पीएफआई का असल मकसद समाज का इस्लामीकरण करना है। 2010 में भी पीएफआई के सिमी से कनेक्शन के आरोप लगे थे। 2017 में एक स्टिंग आॅपरेशन में पीएफआई के संस्थापक सदस्यों में से एक अहमद शरीफ ने स्वीकारा था कि उसके संगठन का मकसद भारत को इस्लामिक स्टेट बनाना है। चूंकि केरल के कई युवाओं का इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ाव है, ऐसे में आवश्यक है कि पीएफआई और आतंकी संगठनों की मिलीभगत की गहरी छानबीन हो। क्या पता पीएफआई के सदस्य इन आतंकी संगठनों के स्लीपर सेल के रुप में काम करते हों। पीएफआई के सदस्यों में अधिकांश युवा हैं और वे भारत का इस्लामीकरण मिशन को जेहाद के तौर पर लेते हैं। विचार करें तो जो लक्ष्य पीएफआई का है वहीं लक्ष्य इस्लामिक स्टेट और अलकायदा का भी है। अलकायदा पहले ही भारतीय उपमहाद्वीप में कायदात अल जिहाद बनाने, जिहाद का परचम लहराने और इस्लामिक शरीयत की बदौलत खलीफा राज लागू करने का एलान कर चुका है। मुर्तजा जैसे लोग उसी खलीफा राज के हिमायती हैं जिनके जेहन में जेहाद और जन्नत का कीड़ा कुलबुला रहा है।

÷लेखक राजनीतिक व सामाजिक विश्लेषक हैं÷




