लेखक~मुकेश सेठ
पिता की बहन को ही बुआ बोला जाता है,ऐसे में प्रोड्यूसर भूषण कुमार,ओम राउत,प्रसाद सुतार और मनोज मुंतशिर को जनभावना चकनाचूर करने के आरोप में अविलम्ब भेजा जाना चाहिए जेल में
♂÷मैं बहुत ही अश्रुपूरित और विदीर्ण हृदय से लिख रहा हूँ कि आप कथित बड़े लोग-बड़े ज्ञानी मुझे यह समझाने का कष्ट करिए कि अगर मैं आप सभी ख़ासकर मनोज मुंतशिर जो इस समय शुक्ला बनकर आड़ ले रहे हैं कि,जब महाबली व भगवान शंकर के अंशावतार चिरंजीवी महाबली हनुमानजी रावण के अशोक वाटिका में जाकर तहस नहस करना प्रारम्भ कर देते हैं।
तब रावण पुत्र मेघनाद दल बल के साथ आता है और आप उसके मुंह से हनुमानजी के लिए कहलवाते है कि-
अपने बुआ का बगीचा समझ रखा है क्या जो मुँह उठाकर चले आये हवा खाने
कोई मुझ समेत करोड़ो-करोड़ सनातनधर्मियों के आराध्य मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम भक्त हनुमानजी के भक्तों को समझायेगा की अगर रावण पुत्र मेघनाथ जिनको अपनी बुआ का बगीचा कहकर हवा खाने की बात कहेगा तो वह मेघनाथ का भाई यानी कि रावण का लड़का हुआ न ,तभी तो वह रावण की बहन को बुआ मानेगा, कहेगा।
कितना शातिर और मक्कारी भरा दिमाग लगाया है इन सनातन और राम-सीता-हनुमानजी द्रोहियों ने।
हनुमानजी को रावण की औलाद बना दिया इस एक डायलॉग से
बेहद आपत्तिजनक,घोर पापकृत्य,अशेष निंदनीय शब्द नही है, मनोज मुंतशिर जैसे टपोरी डायलॉग रायटर के शब्दों में कहूँ तो बेशक जेल भेजने का काम किया है इन राम द्रोहियों ने।
क्या इन सबो को यह ज्ञात नही कि प्रभु श्रीराम माता सीता हनुमानजी इस राष्ट्र की आत्मा हैं उनको केवल सनातन धर्मी हिन्दू ही नही बल्कि मुस्लिम समेत सभी रिलीज़न,पन्थ मत के लोग बेहद आदर सम्मान करते हैं।

फ़िल्म में माता सीताजी से भी अंगप्रदर्शन करवा दिया।
उधर पड़ोसी देश नेपाल ने आदिपुरुष फ़िल्म को इसलिये बैन कर दिया है क्योंकि कारण तो बहुत है किन्तु प्रमुख कारण यह है कि फिल्मकारों ने माता सीताजी का मायका जनकपुर न दिखाकर कहीं और बताया है।इससे क्रुद्ध नेपाल ने फ़िल्म को कई दिन पहले ही प्रतिबंधित कर दिया है।

रावण को चमगादड़ पर उड़ना दिखा कर हमारे वैमानिक विज्ञानियों का घोर अपमान किया साथ ही उस दौर में लगभग सारी दुनियां पर राज करने वाले रावण को लुहार बना दिया जो हथियार को पीटकर धारदार बना रहा है।
रामजी के लुक को देखकर ऐसा लगता है कि फिल्मकार ईसा मसीह से प्रेरित थे,लक्ष्मण जी को देखिए,मेघनाथ को देखिए शरीर पर टैटुओं की भरमार, हनुमानजी के चेहरे को देखिए बिल्कुल निस्तेज व वहावी लुक दिया गया,प्रकांड पण्डित शिवभक्त रावण को ख़िलजी बना दिया और दशग्रीवा को ऐसा दिखाया कि जैसे दसों सिर किचन में एक दूसरे के ऊपर मसाले के डिब्बे की तरह रखे हो।
फ़िल्म कार जिस सीता राम नाम के ऊपर 600 करोड़ की फ़िल्म बनाकर हजारों करोड़ का मोटा माल पीटना चाहते थे उसमे आश्चर्यजनक रूप से राम-सीता का नाम ही नही है प्रभाष और कृति सैनन का।
इतना नफ़रत है इन फिल्मकारों को प्रभु श्रीराम-मातासीता जी के नाम से।
धन्य है बॉलीवुड ,सिर्फ़ आप लोग सनी लियोनी को लेकर जिस्म 2 ,मल्लिका शेरावत को लेकर मर्डर 2 जैसी फिल्में बनाओ जिसमें तुम लोगों को महारथ है।
बाकी इतिहास व धार्मिक फ़िल्मो के लिए साउथ की इंडस्ट्री हॉलीवुड पर भी भारी है।
और तो और कौन नही जानता कि जब यही निर्देशक ओम राउत अजय देवगन को लेकर तानाजी मालसुरे और बालासाहेब ठाकरे के जीवन पर आधारित फ़िल्म बनाते हैं तब तो ऐसे -ऐसे टपोरी छाप सम्वाद नही दिखाते।
यह बेहद गहरी साजिश है सनातन धर्मी हिंदुओ के खिलाफ, अयोध्या में राममंदिर का प्रथम तल बनकर तैयार होने की दिशा में है और वर्ष 2024 के जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी के हाथों से राममंदिर का शुभारंभ होने जा रहा है।ऐसे में कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि इस तरह की आपत्तिजनक व घटिया टपोरी छाप फ़िल्म आदिपुरुष बनाकर राममंदिर के उद्घाटन से राष्ट्र में उठने वाली रामभक्ति के ज्वार की लहर को बीजेपी खासकर प्रधानमंत्री मोदी के तरफ़ न जाने देने के लिए यह फ़िल्म एक गहरी साज़िश का संकेत देती है।
जिस तरह से काँग्रेस, शिवसेना समेत तमाम पार्टी फ़िल्म निर्माताओं,कलाकारों,सम्वाद लेखक के विरुद्ध न तो कोर्ट में गए न ही उन सभी का नाम लेकर विरोध कर रहे हैं बल्कि इसके लिए बीजेपी और पीएम मोदी पर हमलावर है, जो कि यह साबित कर देता है कि यह फ़िल्म इसी मक़सद से ही बनाई गई है।
ज्ञातव्य हो कि आदिपुरुष में रावण के साथ शराब पीते विभीषण को दिखाया जाता है फ़िल्म की अज्ञानी टीम को रामानन्द सागर के धारावाहिक रामायण की सभी कड़ी गहनता से देखनी चाहिए थी जिससे उनके मानसिक विकार ग्रस्त मस्तिष्क में रामायण कालीन मर्यादा,गरिमा और बड़ो के प्रति आदर सम्मान क्या होता है भेजे में कुछ घुस सकता था।
लोकसभा चुनाव के पहले राममंदिर के रामलहर उठने से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी इस मंदिर को 500 वर्षो के सैकड़ो झंझावात के बाद बनवाने का श्रेय न ले सके।लोगों के दिलो दिमाग मे प्रभु श्रीराम माता सीता हनुमानजी की छवि कार्टूनिक बना दो,डायलॉग टपोरी छाप कर दो।
इसके लिए सर्वाधिक रूप से कोई को मैं दोषी ही नही अक्षम्य अपराधी मानता हूँ तो वह सेंसर बोर्ड अध्यक्ष उसके सदस्यों को ,वह सब रीढ़ विहीन है फ़िल्म इंडस्ट्री के ताक़तवर बड़े नामों के आगे।
करोड़ो लिए गाने व सम्वाद लिखने के मनोज मुंतशिर ने और जिसने सैकड़ो करोड़ की फ़िल्म बनाई वह नही दिख रहे हैं,मुंतशिर अपने को धरती का सबसे बड़ा ज्ञानी बन ज्ञान बांट रहा है।
क्योंकि करोड़ो कमाने है उन्ही लोगो से तो बिल्ली के गले मे घण्टी कौन बांधे अपना व अपने बच्चों का कैरियर भी तो उनके जूते चाट-चाट कर बनाने है, मोदी योगी या रामभक्त थोड़े न बनाएंगे।
भाड़ में जाये धर्म-संस्कृति/सभ्यता-सँस्कार, माल पीटो।
रामायण व महाभारत पर आक्रमण होने शुरू हो चुके हैं।
इसके पहले सेक्सी दुर्गा भी इसी सेंसर बोर्ड ने पास की थी वह भी एक बड़ी साजिश थी।
मेरी गुज़ारिश है बॉलीवुड के स्वकथित विद्वानों से की आप लोगों का तो सबकुछ पैसा है वही धर्म है, मज़हब है, रिलीज़न है सबकुछ किन्तु किसी भी धर्म-मज़हब-रिलीज़न-पन्थ-मत के ईश्वर,महापुरुषों व समाजसेवियों के ऊपर फिल्में बनाना राष्ट्रहित, इतिहास हित और अपनी आने वाली पीढ़ियों के भले के लिए त्याग दीजिये।
ताज़ा समाचार यह है कि सोमवार से देश ही नही बल्कि दुनियां भर के हजारों स्क्रीन पर चल रही आदिपुरुष की कमाई औंधे मुँह गिरनी शुरू हो चुकी है और अभी तक यह भारी प्रचार प्रसार के बावजूद भी अपनी लागत नही निकाल पाई है।

÷लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं÷




