लेखक-राजेश बैरागी
एक मौजूदा मंत्री की अपने राज्य में क्या हैसियत होती है?
राज्य और केंद्र में मंत्री पद संविधानिक होता है उस पर आसीन व्यक्ति की शक्तियां असाधारण होती हैं और वह शासन प्रशासन का नियंत्रण करता है।उसकी इच्छा और संकेत सरकार की इच्छा और संकेत माने जाते हैं।
फिर उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को सार्वजनिक मंच से क्यों कहना पड़ा कि लाल फीता शाही यानि नौकरशाही उनकी मंशा के कामों में अड़ंगा डाल रही है।
ग्रेटर नोएडा में तीन दिवसीय शिक्षा एक्सपो का उद्घाटन करने आए उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय अपने भाषण के दौरान एक शिक्षण संस्थान को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा भूमि उपलब्ध न कराने के मामले में उत्तेजित नजर आए। उन्होंने प्राधिकरण अधिकारियों पर शिक्षण संस्थान को जानबूझकर भूमि उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया। उस समय उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा से संबंधित वरिष्ठ अधिकारी तथा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अलावा शिक्षण संस्थान के संचालक भी वहीं बैठे हुए थे।
बताया गया है कि शिक्षण संस्थान की ओर से पैसा जमा कराने सहित सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं। परंतु प्राधिकरण उन्हें आवंटित भूमि को राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज न करा पाने के कारण उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। इस प्रक्रिया में लंबे समय से कोई तेजी नहीं आ रही है। संभवतः मंत्री जी ने भी शिक्षण संस्थान की पैरवी प्राधिकरण से की गई है परंतु इससे भी कोई अंतर नहीं आया है। मंत्री जी का जायज गुस्सा गलत अवसर और गलत स्थान पर प्रकट होने से चर्चाओं का बाजार गर्म है। योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के एक और मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी की इच्छा के विरुद्ध यहां के किसी प्राधिकरण में पत्ता भी नहीं हिलता है। उन्हीं की कैबिनेट के दूसरे मंत्री को चाहकर भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहा है। क्या मंत्री के गुस्से का कारण उनकी इसी हताशा का परिणाम है? हालांकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में मंत्री के कल इजहार किए गए गुस्से का आज कोई असर नजर नहीं आया।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)




