लेखक~मुकेश सेठ
कोर्ट और संसद में देश का करोड़ों रुपया बर्बाद कराने वाले,वकीलों और विपक्ष से भरपाई करे सुप्रीम कोर्ट
♂÷एक बार फ़िर सुप्रीम कोर्ट में से अग्निपरीक्षा देकर तप कर निकली मोदी सरकार और अडानी कम्पनी।
मालूम हो कि कुछेक वर्षो से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी काँग्रेस व तमाम विपक्षी दल मोदी सरकार को अम्बानी-अडानी की सरकार बताकर जनता के बीच गरीबों, किसानों की विरोधी बताते नही थकती थी।उधर कांग्रेस, राहुल गांधी देश के साथ विदेशी मंचो पर भी भारत सरकार व उधोगपतियों का मनोबल तोड़ने और अर्थव्यवस्था पर प्रहार करने का कोई भी मौका नही चूकते थे।
पिछले 6 मई को सप्रे कमेटी नें चीफ़ जस्टिस के आदेश पर अडानी ग्रुप पर हिंडन बर्ग के आरोपो की जाँच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।
जाँच रिपोर्ट में जैसा आरोप राहुल गांधी,प्रियंका गांधी कांग्रेस व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनकी आप पार्टी समेत विपक्ष के कतिपय दिग्गज नेताओं द्वारा लगाए जा रहे थे वह सब निर्मूल मिले हैं और अडानी ग्रुप सेबी व नियामक के नियमानुसार ही कामधाम कर रही है।
ऐसे में राहुल गांधी काँग्रेस व विपक्षियों को एक बार फ़िर से मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए रची गयी झूठी साजिश बेनकाब हो गयी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई लोगों ने 24 जनवरी या उसके आसपास शॉर्ट सेलिंग जरूर की,लेकिन इसमें अडानी ग्रुप का हाथ नही है।इसमें नियामक की कोई नाकामी नही है।
हिंडनबर्ग का काम ही यही है कि शार्ट सेलिंग की जाए और सस्ते में शेयर खरीदकर मुनाफ़ा कमाया जाए।जांच में यह भी सामने आया है कि अडानी ग्रुप पर निवेशकों का भरोसा है और अडानी ग्रुप नें कई काम किये हैं जो निवेशकों के भरोसे के पक्ष में है,इसलिए चिंता की कोई वजह नही है।

मालूम हो कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रख अमेरिका समेत कुछेक देशों में ब्लैक लिस्टेड अमेरिकन कंपनी हिंडेनबर्ग की फर्जी रिपोर्ट को आधार बना कर कांग्रेस नेत्री जया ठाकुर व एमएल शर्मा व विशाल तिवारी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर माननीय चीफ़ जस्टिस चन्द्रचूड़,जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने रिटायर्ड जज अभय मनोहर स्प्रे की अध्यक्षता में एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन कर जांच का आदेश दिया की दो महीने में जाँच रिपोर्ट दी जाए सील्ड कवर में।
जबकि यहाँ गौर करने वाली बात है कि इसके पहले केंद्र सरकार को एक अन्य मामले में चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ साहब नें केंद्र सरकार के आग्रह की यह गोपनीय रिपोर्ट है सरकार सील्ड लिफ़ाफ़े में रिपोर्ट देगी तो साहब नें कहा था कि हम पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हैं हमे बगैर सील्ड लिफ़ाफ़े में रिपोर्ट पेश करें,आप देश से क्या छुपाना चाहते हैं।
ख़ैर मिलार्ड कब किस मूड में हो या क्या सोच विचार कर आदेश देते हो वह वो ही जाने।
मालूम हो कि ख़ुद अमेरिका में ही ब्लैक लिस्टेड हिंडनबर्ग जिसके सीईओ कई बार चीटिंग व फ़र्जी रिपोर्ट जारी करने के मुद्दे पर जेलयात्रा तक कर आये हैं उसकी रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने संसद को कई हफ्ते तक ठप करके करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया और देश की साख को कलंकित किया केवल मोदी को अडानी से जोड़ने के लिए और कई चुनावों में ग़रीब, किसान विरोधी और अडानी,अम्बानी की सरकार होने के नाम पर।
राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी नें लगभग अपने हर बयान सभाओं में कहा था कि अडानी अम्बानी के इशारे पर मोदी सरकार चल रही है और यह सरकार हम दो हमारे दो की तर्ज़ पर काम रही है।राहुल प्रियंका गाँधी समेत काँग्रेस के तमाम नेताओं ने ने तो पीएम मोदी,गृहमंत्री अमित शाह,अडानी-अम्बानी के तमाम कार्टून बनाकर अपने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट करते रहे,लिखते रहे “मोडानी”।

जबकि कोर्ट इस सनसनीखेज और देश दुनियाभर में राहुल गाँधी, काँग्रेस और तमाम विपक्षियों के दुष्प्रचार,अखबारों में लेख,टीवी चैनलों में डिबेट के मद्देनजर इसकी रिपोर्ट को भी बगैर सील्ड मांगना चाहिए था,खैर मिलार्ड की इच्छा।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान मोदी-अडानी-अम्बानी पर गम्भीर आरोप हिमाचल प्रदेश,गुजरात,पश्चिम बंगाल,केरल के चनाव हो या फ़िर उसके बाद कर्नाटक के बीते हुए चुनाव में भी इस मुद्दे को ख़ूब भुनाया।शायद यही रिपोर्ट कर्नाटक चुनाव के दौरान आयी होती तो काँग्रेस को इसका फ़ायदा मिलने की बजाय बीजेपी आक्रामक होकर फ़ायदा उठा सकती थी।
अब कर्नाटक चुनाव के बाद आये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कांग्रेस समेत विपक्षियों को घुटनों पर ला दिया है।
अब पिछले 6 मई को सौंपी गई रिपोर्ट सार्वजनिक हो गई है और विपक्ष एवं याचिकाकर्ताओं के हाथ आया है “बाबा जी का ठुल्लू” क्योंकि समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि “पहली नजर में अडानी मामले में कुछ भी अनियमितता नही मिला है याचिका में लगाये गए आरोपों के मद्देनजर।
कोर्ट और संसद में देश का करोड़ों रुपया बर्बाद कराने वाले ख़ास पार्टी के मोहरें बनकर उनकी झूठ की राजनीति चमकाने वाले कतिपय वकीलों और विपक्ष से भरपाई करे माननीय सुप्रीम कोर्ट।
माननीय चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ जी को यह कोशिश करनी चाहिए कि वह एक वसूल सिद्धांत सभी के लिए हो, इस पर दृष्टिगत होकर कार्य करने से पक्ष-विपक्ष उनको अपने सियासी फ़ायदे के लिए माध्यम न बना पाए।
अभी कुछ दिन पहले वह केंद्र सरकार नें उनसे आग्रह किया था कि यह गोपनीय रिपोर्ट है इसको सील्ड कवर में सरकार देगी तो चीफ़ जस्टिस महोदय ने कहा कि रिपोर्ट सील्ड कवर में नही सार्वजनिक रूप से चाहिए जिससे पारदर्शिता बनी रहे,अब हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के लिए कहे कि हिंडनबर्ग पर सप्रे कमिटी अपनी रिपोर्ट बंद लिफाफे में सौंपे।
सप्रे समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि “पहली नजर में अदाणी ग्रुप ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है, और SEBI ने भी अदाणी ग्रुप की ओर से दी गई जानकारी को गलत नहीं बताया है।
अडानी ग्रुप के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि “अदाणी ग्रुप ने किसी भी नियमों का उल्लंघन नहीं किया, कमेटी की जांच में अदाणी ग्रुप बेदाग साबित हुई है”
याद होना चाहिए कि पहले 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले फ्रांस से 36 अत्याधुनिक फायटर जेट रॉफेल को लेकर मोदी सरकार पर इस सौदे में भारी भ्र्ष्टाचार का मामला बताते हुए सनसनीखेज आरोप लगाकर चुनाव भर मुद्दा बनाकर सोनिया-राहुल-प्रियंका गांधी काँग्रेस व विपक्ष ने चुनाव लड़ा और इसकी जाँच के लिए कोर्ट में उनकी तरफ़ से बड़े बड़े वकीलों नें सौदे की जांच के लिए याचिका भी दाखिल की।
चुनाव बुरी तरह हारे तो वहीं सुप्रीम कोर्ट नें इस सौदे में कोई भी अनियमितता न पाते हुए मोदी सरकार को क्लीन चिट दी थी।
हर मामले में विपक्ष बखेड़ा खड़ा करता रहा है जैसे उस दौरान कुछ राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रख राहुल गाँधी व काँग्रेस के दिग्गज नेताओं की अगुवाई में विपक्ष नें पहले इजरायल की पेगासस सॉफ्टवेयर पर भी कई हफ्ते तक संसद को ठप करके करोड़ों रुपया देश का बर्बाद किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट की जांच में सरकार के खिलाफ कुछ नही तो तमाम विपक्षी नेताओं ने अपने फोंन ही नही दिए एक्सपर्ट कमेटी को की जाँच कर सके कि उनके फ़ोन में सरकार बातचीत सुनने के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर डाला हुआ है कि नही। तब भी सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी समेत कांग्रेसी,विपक्षी दिग्गजों व उनकी तरफ़ से पेश याचिका को सिर्फ़ ख़ारिज कर इतिश्री कर ली थी अगर उसी समय माननीय कोर्ट इस बड़े झूठ पर कठोर होकर याचिकर्ताओं पर संसद व कोर्ट का समय बर्बाद कर देश की सुचिता व करोड़ो रूपये बर्बाद करने में तगड़ा दण्ड दे दी होती तो आये दिन यह घृणित राष्ट्रविरोधी राजनीति देश को नही देखनी पड़ती जिससे विश्व मे देश का मस्तक झुकता है तो वहीं शत्रु देशों को विपक्षियों के हथकंडों से जाने-अनजाने फ़ायदा मिल जाता है।
अब माननीय चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ साहब को अनाप शनाप याचिकाओं को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए अन्यथा वह भी जाने अनजाने विपक्ष के राजनीतिक साजिशों में फंसते दिख जाते हैं जो कि ऐसा है नही। जिससे उनकी व माननीय उच्चतम न्यायालय की छवि देश के न्यायप्रिय जनमानस में छीजती है। माननीय CJI चंद्रचूड़ जी को पहल करनी चाहिए और देश के विपक्षी दलों एवं याचिकाकर्ताओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए देश के हुए नुक़सान की भरपाई के लिए मुकदमा चलाएं जिसका फैसला स्वयं सुप्रीम कोर्ट करे ,साथ ही जितना गम्भीर आरोप की याचिका लेकर कोर्ट पहुँचने वाले याचिकाकर्ता से यह शपथपत्र लेना चाहिए कि अगर जाँच में यह आरोप सरकार हो या कोई अन्य के ख़िलाफ़ झूठ निकलता है तो जितना भी नुकसान कम्पनी को होगा, संसद की कार्रवाई ठप्प होने से देश के टैक्सपेयर्स के करोड़ो,अरबों की रक़म पानी मे डूब जाती है उसकी वसूली की जाएगी।
ऐसा आदेश व परिपाटी बनाकर माननीय चीफ़ जस्टिस चंद्रचूड़ न्याय जगत के इतिहास में अमर हो सकते हैं और राजनीतिक दलों के इशारे पर याचिकर्ताओं की दुकानदारी भी बंद होने से देश की अर्थव्यवस्था व दुनियां में शाख मजबूत होगी।
फ़िर एम एल शर्मा एवं विशाल तिवारी और कोर्ट फ़िक्सर वकीलों की याचिकाएं अपने आप बंद हो जाएंगी जिससे अदालत का अमूल्य वक़्त भी बचेगा।
स्मरण हो कि वर्ष 2008 में काँग्रेस की नेतृत्व वाली मनमोहन सरकार में कांग्रेस -चीन कम्युनिस्ट पार्टी के MOU की जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं महेश जेठमलानी, सावियो रॉड्रिक्स और शशांक शेखर झा को तत्कालीन CJI बोबडे ने धमकी दी थी कि यदि आपका हलफनामा गलत साबित हुआ तो आपके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें वह याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में दायर करने के लिए कहा,ऐसी चेतावनी एम एल शर्मा, विशाल तिवारी और जया ठाकुर को दी गई होती तो वो लोग अपनी याचिका ही वापस ले लेते क्योंकि यह एक बड़े साज़िश के तहत दी गयी थी।
इसके लिए कुछ वर्षों पूर्व से ही इसके लिए इस झूठे राजनीतिक मुद्दे पर भूमिका बनाने के लिए मोदी-अडानी-अम्बानी के विरुद्ध काँग्रेस, राहुल गाँधी देश विदेश में मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए बहुतेरे झूठे आरोपों की झड़ी लगाने शुरू कर दिए थे।कहा भी जाता है कि एक झूठ को बार बार बोला जाय तो वह लोगों को सच लगने लगता है फ़िर सरकार किसकी भी हो सिस्टम तो हमारा है कि दर्प में रहने वाले दल इसको चुनावी मैदान में इन मुद्दों पर लाभ लेकर फ़िर एक नए मुद्दे गढ़ मैदान में आ जाते हैं।मालूम हो कि कई चुनावों को ध्यान में रख इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लिया, साथ ही देश की अर्थव्यवस्था, भारतीय उधोगपतियों का मनोबल तोड़ने व अडानी कम्पनी को कुछ लाख करोड़ की आर्थिक हैसियत को भी बर्बाद करने का काम किया।
मालूम हो कि कभी इन झूठे आरोपों के पहले अडानी की आर्थिक हैसियत पूरी दुनियां के अमीरों में दूसरे नम्बर तक जा पहुँची थी और वह चीन के भी तमाम प्रोजेक्ट को अन्य देशों में ऊंची बोली पर लेने शुरू कर दिए थे।यह लाखों करोड़ का जो नुकसान शेयर धारकों को हुआ है, देश की अर्थव्यवस्था का हुआ है, देश व उधोगपतियों की छवि विश्वस्तर पर ख़राब करने की कोशिश की गई है उसको माननीय सुप्रीम कोर्ट को इन लोगों से भरपाई करवाने की कार्रवाई करवानी चाहिए।
जिससे यह सख़्त सन्देश देश में अवश्य जाना चाहिए कि चाहे वह सत्ताधारी मोदी सरकार हो सोनिया गांधी,राहुल गांधी,प्रियंका गांधी,काँग्रेस हो या फ़िर कतिपय विपक्षी दल चीफ़ जस्टिस महोदय सभी के लिए एक ही इंसाफ़ का तराजू लेकर जस्टिस चेयर पर बैठते हैं।
याद होना चाहिए कि उस दौरान राहुल गाँधी ,काँग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता यह कह रहे थे शेयर गिरने से जितने भी नुकसान शेयरधारकों को हुआ है उसको मोदी सरकार भरपाई करे और चूँकि अडानी कम्पनी को भी जो भारी भरकम घाटा हिंडनबर्ग रिपोर्ट के चलते हुए है उसकी भी भरपाई सरकार को करनी चाहिए क्योंकि इन कम्पनियों में देश के नागरिकों का पैसा लगा हुआ है।
अब गाँधी परिवार समेत कतिपय विपक्षी दलों के दिग्गजों को देश के शेयरधारकों व अडानी की कम्पनी को हुए नुकसान के लिए पार्टी फण्ड से भरपाई कर देश की जनता की वाहवाही हासिल करनी चाहिए नही तो वह इस जाँच रिपोर्ट से एक सिरे से झूठे साबित हो चुके हैं कथित रूप से शत्रु देशों के लिए बैटिंग करने के लिए बीजेपी के आरोप के अनुसार।
कुल मिला कर देखा जाए तो कुछ ही दिनों में अमेरिका जाने वाले राहुल गांधी फिर क्या नया आरोप लगाने वाले हैं, क्या नया राग अलापने वाले है विदेशी मंच पर।
वैसे राहुल गांधी प्रियंका गाँधी काँग्रेस कुछ दिन पहले तक मोदी पर यह भी आरोप लगा रहे थे कि 20 हज़ार करोड़ रुपए की रक़म अदाणी कम्पनी में उनकी हो सकती है, पीएम को जवाब देना चाहिए।

(लेखक यह माननीय सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हुए एक सुझाव न्यायपालक नागरिक के तौर पर रखा है)




