★राजेश उंडी★
★मुम्बई★
गत 20 अप्रैल को अंकिती बोस नें बम्बई हाईकोर्ट में महेश मुर्ति के खिलाफ मानहानि का रूप में दायर किया है 820 करोड़ का दावा
♂÷फैशन ई-कॉमर्स स्टार्टअप यूनिकॉर्न जिलिंगो की पूर्व-सीईओ और सह-संस्थापक अंकिती बोस और जाने-माने निवेशक और उद्यमी महेश मूर्ति के बीच कुछ समय से आरोप-प्रत्यारोप एक दूसरे पर दागे जा रहे थे जो कि पिछले दिनों यह मामला अंकिती बोस के ज़रिए बम्बई हाईकोर्ट में जा पहुँचा है।
पिछले हफ्ते, यह बताया गया कि अंकिती बोस ने बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष महेश मूर्ति के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है, जिसमें मानहानि के हर्जाने के रूप में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी भारतीय रुपये में 820 करोड़ का दावा करते महेश मूर्ति से सार्वजनिक रूप से दिए गए बयानों के लिए माफी मांगने की मांग की गई है।
सूत्र बताते हैं कि मानहानि का मुकदमा होने की खबर के बाद,अंकिती बोस को नकारात्मक रूप में चित्रित करने के लिए कथित तौर पर एक पीआर एजेंसी द्वारा पत्रकारों के बीच एक व्हाट्सएप संदेश प्रसारित किया जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि व्हाट्सएप संदेश को ‘कई बार अग्रेषित’ किया गया है और यह इंगित करता है कि यह मामला बंद होने के करीब नहीं है, बल्कि और अधिक कटु होने वाला है।
बोस और मूर्ति ने अभी तक अग्रिम कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अतीत में दोनों एक दूसरे की आलोचना में मुखर रहे हैं।
अंकिती बोस ने मूर्ति पर उत्पीड़न और स्त्री द्वेष का आरोप लगाया है, जबकि महेश मूर्ति ने बोस को “नकली” और “धोखाधड़ी” कहा है। उनका झगड़ा सोशल मीडिया में फैल गया है, जहां दोंनो पक्ष के समर्थक गरमागरम बहस में लगे हुए हैं।
मालूम हो कि बम्बई हाईकोर्ट की वेबसाइट के अनुसार अंकिती बोस ने लॉ फ़र्म सिंघानिया एन्ड कम्पनी के एलएलपी के ज़रिए गत 20 अप्रैल को निवेशक व उधमी महेश मूर्ति के विरुद्ध 820 करोड़ रुपये के मानहानि के दावे करते हुए हर्जाना मांगने के साथ ही मीडिया कम्पनी”आउटलुक”बिजनेस को भी प्रतिवादी बनाया है।
बम्बई उच्च न्यायालय में दी गई फाईलिंग के मुताबिक अंकिती बोस एक “स्थायी निषेधाज्ञा”पारित करने की मांग की है।
फ़िलहाल दांव ऊंचे हैं, और यह देखा जाना बाकी है कि क्या इस झगड़े का असर स्टार्टअप इकोसिस्टम पर पड़ेगा जो पिछले कुछ समय से फंडिंग विंटर महसूस कर रहा है।




