लेखक~नीरज सिंह
♂÷पूरी दुनिया को हर क्षेत्र में हजारों होनहार देने वाले तिलकधारी सिंह कालेज (#टीडी_कालेज) नींव 1914 में एक विद्यालय के रूप में रखी गई। 1916 में हाई स्कूल और 1940 में इंटरमीडिएट कॉलेज में अपग्रेड किया गया। जिले के पहले स्नातक तिलकधारी सिंह इसके संस्थापक रहे। आजादी से ठीक पहले जुलाई 1947 में कालेज को स्नातक की मान्यता मिल गई थी। समय के साथ स्नाकोत्तर भी यह कालेज हो गया। आज जिले का सबसे अपग्रेड और सबसे ज्यादा फैकल्टी वाला यह कालेज देश और दुनिया को हजारों होनहार दे चुका है। जो पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन कर रहे है। कालेज का इतिहास सभी युवाओं को गर्व का अहसास कराता है।
इस कालेज के साथ बहुत सी यादें जुड़ी हुईं हैं। इसके मैदान में हमारी टीम ने बहुत ही पसीना बहाया है। खासतौर से एनसीसी ट्रेनिंग के दौरान न दिन देखा न रात। इतना लगाव रहता था कि कोर्स पूरा करने के बाद भी अपने आने वाले युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए कालेज के मैदान में ही सुबह से शाम तक रहता था। समय कब बीत जाता था, पता ही नहीं चलता था। गुरुजनों का स्नेह हमेशा हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा।
काफी दिनों बाद जब कालेज परिसर में जाना हुआ तो पुराने दिनों की यादें फिल्म की तरह चलने लगी। अगली पीढ़ी को भी कहानियों के माध्यम से उन यादाें का अहसास कराता हूं।
कालेज के गुरुजनों को चरणस्पर्श 🙏🏻
साथियों को ढेर सारा स्नेह ❤️
नवप्रवेशीय युवाओं को भविष्य की शुभकामनाएं🌹
÷लेखक दैनिक जागरण लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार हैं÷




