★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
{नोटबन्दी पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा प्रोसेस में भी गड़बड़ी नही,आर्थिक फ़ैसले को पलटा नही जा सकता}
[संविधान पीठ ने नोटबन्दी के ख़िलाफ़ दाख़िल 58 याचिकाएं ख़ारिज की और कहा कि नोटबन्दी से पहले सरकार और RBI के बीच हुई थी बातचीत]
(प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 8 नवम्बर 2016 को की थी नोटबन्दी कि घोषणा,1000 व 500 के 15.52 लाख करोड़ के नोट हुए थे चलन से बाहर)
♂÷ भारत सरकार के नोटबंदी के फैसले को उच्चतम न्यायालय ने सही ठहराते हुए केंद्र की मोदी सरकार के द्वारा 8 नवम्बर वर्ष 2016 में की गयी नोटबन्दी के फ़ैसले को जायज़ ठहराते हुए उसके ख़िलाफ़ में दायर 58 याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया है।संविधान पीठ ने कहा कि आर्थिक फ़ैसले को पलटा नही जा सकता,केन्द्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने आपस मे बातचीत की थी।
आज सोमवार को बहुप्रतीक्षित नोटबन्दी के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट नें मोदी सरकार व सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी को काँग्रेस समेत विपक्षी दलों पर हमलावर होने का मौका दे दिया है।
पाँच जजों की संविधान बेंच ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। बेंच ने कहा कि 500 और 1000 के नोट बंद करने की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। बेंच ने यह भी कहा कि आर्थिक फैसले को पलटा नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा नोटबंदी से पहले सरकार और RBI के बीच बातचीत हुई थी। इससे यह माना जा सकता है कि नोटबंदी सरकार का मनमाना फैसला नहीं था। संविधान पीठ ने इस फैसले के साथ ही नोटबंदी के खिलाफ दाखिल सभी 58 याचिकाएं खारिज कर दीं।
संविधान पीठ ने यह फैसला चार एक के बहुमत से सुनाया। नोटबंदी केस की सुनवाई करने वाली पांच जजों की बेंच में जस्टिस एस अब्दुल नजीर, बीआर गवई, एएस बोपन्ना, वी रामसुब्रमण्यम और जस्टिस बीवी नागरत्ना शामिल हैं। इनमें से जस्टिस बीवी नागरत्ना ने नोटबंदी की प्रोसेस पर बाकी चार जजों की राय से अलग फैसला लिखा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का फैसला अध्यादेश की जगह कानून के जरिए लिया जाना था।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा था कि RBI की सलाह पर की थी नोटबंदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2016 में 1000 और 500 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ 58 कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि किस कानून के तहत 1000 और 500 रुपए के नोट बंद किए गए थे। कोर्ट ने इस मामले में सरकार और RBI से जवाब तलब किया था।
केंद्र सरकार ने पिछले साल 9 नवंबर को दाखिल हलफनामे में कहा था कि 500 और 1000 के नोटों की तादाद बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। इसीलिए फरवरी से लेकर नवंबर तक RBI से विचार-विमर्श के बाद 8 नवंबर को इन नोटों को चलन से बाहर करने यानी नोटबंदी का फैसला लिया गया था।
संविधान पीठ की अगुआई कर रहे जस्टिस एस अब्दुल नजीर फैसला सुनाने के दो दिन बाद 4 जनवरी, 2023 को रिटायर हो जाएंगे।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की धारा 26 (2) किसी विशेष मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों को पूरी तरह से रद्द करने के लिए सरकार को अधिकृत नहीं करती है। धारा 26 (2) केंद्र को एक खास सीरीज के करेंसी नोटों को रद्द करने का अधिकार देती है, न कि संपूर्ण करेंसी नोटों को।
उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार ने कहा था कि काले धन से निपटने के लिए की थी नोटबंदी।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने नोटबंदी के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह जाली करंसी, टेरर फंडिंग, काले धन और कर चोरी जैसी समस्याओं से निपटने की प्लानिंग का हिस्सा और असरदार तरीका था। यह इकोनॉमिक पॉलिसीज में बदलाव से जुड़ी सीरीज का सबसे बड़ा कदम था। केंद्र ने यह भी कहा था कि नोटबंदी का फैसला रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश पर ही लिया गया था।
केंद्र ने अपने जवाब में यह भी कहा कि नोटबंदी से नकली नोटों में कमी, डिजिटल लेन-देन में बढ़ोत्तरी, बेहिसाब आय का पता लगाने जैसे कई लाभ हुए हैं। अकेले अक्टूबर 2022 में 730 करोड़ का डिजिटल ट्रांजैक्शन हुआ, यानी एक महीने 12 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन रिकॉर्ड किया गया है। जो 2016 में 1.09 लाख ट्रांजैक्शन, यानी करीब 6,952 करोड़ रुपए था।
♀कोर्ट में नोटबंदी के खिलाफ सुनवाई की टाइमलाइन~
2016 में विवेक शर्मा ने याचिका दाखिल कर सरकार के फैसले को चुनौती दी। इसके बाद 57 और याचिकाएं दाखिल की गईं। अब तक सिर्फ तीन याचिकाओं पर ही सुनवाई हो रही थी। अब सब पर एक साथ सुनवाई चल रही है।
16 दिसंबर 2016 को ही ये केस संविधान पीठ को सौंपा गया था, लेकिन तब बेंच का गठन नहीं हो पाया था। 15 नवंबर 2016 को उस समय के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने मोदी सरकार के इस फैसले की तारीफ की थी।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकीलों ने सरकार की नोटबंदी की योजना में कई कानूनी गलतियां होने की दलील दी थी, जिसके बाद 16 दिसंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 5 जजों की संविधान पीठ के पास भेज दिया था।
तब कोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया था। यहां तक कि कोर्ट ने तब नोटबंदी के मामले पर अलग-अलग हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई से भी रोक लगा दी थी।
8 नवंबर 2016 को PM मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को देश के नाम संदेश में रात 12 से 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने का ऐलान किया था। उस समय सरकार को उम्मीद थी कि नोटबंदी से कम से कम 3-4 लाख करोड़ रुपए का काला धन बाहर आ जाएगा। हालांकि, पूरी कवायद में 1.3 लाख करोड़ रुपए का काला धन ही सामने आया।
♀नोटबंदी की लाइन में जन्मे बच्चे खजांची लाल का हुआ एडमिशन~
पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नोटबन्दी के दौरान बैंक की लाइन में लगी गर्भवती महिला से जन्मे बच्चे खजांची लाल का एडमिशन कानपुर देहात के जाने-माने रामा इंटरनेशनल स्कूल में कराया है।
नोटबंदी के दौरान बैंक की लाइन में जन्मा खजांचीनाथ 6 साल का हो चुका है। वह कानपुर देहात में रहता है। हर साल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उसका जन्मदिन धूमधाम से मनाते हैं।
वर्तमान में चल रहे 2000 के नोट ना ATM से निकल रहे है, ना ही बैंक से मिल रहे है,इसको लेकर नागरिकों में तमाम तरह की चर्चाएं होती रहती है।
6 साल पहले यानी 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपए के 15.52 लाख करोड़ रुपए अर्थव्यवस्था से बाहर हुए। फिर एंट्री हुई 500 रुपए के नए और 2000 रुपए के बड़े नोट की। इनमें से 500 वाले नोट तो मार्केट में हैं, लेकिन 2000 वाले गायब हो गए। देश में साल 2017-18 के दौरान 2000 के नोट सबसे ज्यादा चलन में रहे।
♀नोटबंदी के बाद छपे 500-2000 के 1680 करोड़ नोट गायब…RBI के पास हिसाब नही~
2016 की नोटबंदी के समय केंद्र सरकार को उम्मीद थी कि भ्रष्टाचारियों के घरों के गद्दों-तकियों में भरकर रखा कम से कम 3-4 लाख करोड़ रुपए का काला धन बाहर आ जाएगा। पूरी कवायद में काला धन तो 1.3 लाख करोड़ ही बाहर आया…मगर नोटबंदी के समय जारी नए 500 और 2000 के नोटों में से अब 9.21 लाख करोड़ गायब जरूर हो गए हैं।




