रपट – कृष्णा पंडित
✓ चार कदम की दूरी पर चौकी और 500 मीटर के अंदर थाना क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण है चरम पर
✓ किसी एक थाना क्षेत्र का मामला नहीं लगभग सभी क्षेत्रों का है यही हाल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के थाना सिगरा अंतर्गत आप किसी चौराहे /तिराहे का हाल बनारसी बखूबी जानते हैं।
यही नहीं जहां पूरे प्रदेश में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बुलडोजर गरज रहा है वहीं वाराणसी की सबसे रिहायशी इलाका सिगरा क्षेत्र जहां अतिक्रमण अपने चरम पर है वजह सिर्फ हफ्ता वसुली है। अर्थात जिम्मेदार हुकूमत अपनी जेब भरना जानते हैं बाकी ना कोई आदेश का पालन ना हीं नियम कानून का पाठ याद है ! चाहे मुख्यमंत्री या मुखिया जो भी कहें लेकिन अतिक्रमण खुद-ब-खुद नहीं होता उसके पीछे कई तंत्र कार्य करते हैं लगाने से हटाने तक की जिम्मेदारी होती है।
नगर निगम द्वारा किए विकास की पोल पहली बारिश की बूंदों ने जमकर उपहास किया यही नहीं थोड़ी जमीर जगने पर पार्षदों ने अधिकारी से अपनी बात रखनी चाही तो साहब ने भी उनको उनकी अपनी ओर उंगली कर जिम्मेदारी का याद दिलाया !
विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार पुलिसिया गठजोड़ और दलाली का बड़ा रोल होता है जिसमें मोटी रकम वसूली के रूप में थाने तक पहुंचती है और ऊपर अधिकारी भी खूब रिश्ता निभाते हैं ! वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र अंतर्गत आप चाहे आईपी मॉल के आसपास से गुजरे या नगर निगम जाने वाले रास्ते पर आपको दर्जनों नहीं सैकड़ो अतिक्रमण दिखाई देगा जिसकी एक वजह जाम भी है लेकिन जिम्मेदार लोगों का क्या कहना उनको तो सिर्फ अपने से मतलब है कानून का पाठ याद नहीं सिर्फ टाइमपास के साथ क्रिया प्रतिक्रिया और अपनी जवाबदेही तय होती है !
जितने भी देश-विदेश से लोग काशी आते हैं उनका फीडबैक काशी के लिए अवैध अतिक्रमण और जाम को लेकर हमेशा से नकारात्मक रहा है जिसके लिए देश के प्रधानमंत्री को भी कई बार शर्मिंदा होना पड़ा !
यहां तक की जाम की समस्या को लेकर पूर्व के कमिश्नर भी नप चुके हैं।
लेकिन सबसे बड़ी बात है जहां कमिश्नरेट लागू होने के बाद कई सारे आईपीएस अधिकारी अपने ऑफिस में बैठे कानून के लंबे हाथों का सही इस्तेमाल करते हुए बखूबी भ्रष्टाचार और अवैध कब्जे का पैरोकार बने हुए हैं !
शाम होते ही इंग्लिशया लाइन क्षेत्र शराबियों और रथयात्रा की गलियों में लोग शराब बीयर का सेवन करते हुए सरेआम देखे जा सकते हैं ! होटल में चल रही रंगरेलिया का तो कोई पैमाना ही नहीं है, जब बड़ी घटनाएं घटती है तो सिर्फ जिम्मेदार हुक्मरान की मौजूदगी और फोटोशूट के साथ कहानी की समाप्ति हो जाती है। लेकिन इस पर रोक कैसे लगे काशी की अस्मिता को चोट पहुंचाने से कैसे बचाया जाए इस पर कोई गंभीर चिंतन या कार्य करने की ओर नेता से लेकर अधिकारी तक नहीं सोचते !
पूर्व के दिनों में एल आई यू की विशेष रिपोर्ट ने सबकी नींद उड़ा दी थी कि बनारस में सैकड़ो लॉज और होटल कुकुरमुते की तरह बिना किसी मानक के संचालित हो रहे हैं लेकिन कार्रवाई आज तक सिर्फ कागजों में ही बनी रही सब अपने जगह पर डटे हैं और अनैतिक रूप से मालामाल हो रहे हैं।
जिस तरह से बनारस में दर्शनार्थियों की संख्या पिछले दिनों बढ़ी है घर-घर में रुकने के लिए पेइंग गेस्ट हाउस और लॉज की व्यवस्था आम बात हो गई है, और तो और खाने-पीने की चीजों का भी बिना किसी तय मानक के लोगों को परोसा जा रहा है जो कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खतरनाक मज़ाक है।
जहां काशी में लोकसभा चुनाव के बाद विकास को लेकर लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं वहीं सबसे गंभीर मुद्दा अतिक्रमण और अवैध स्टैंड के साथ-साथ संचालित हो रहे धंधे हैं।
चाहे सेक्स रैकेट की बात हो या स्पा के नाम पर चल रही रंगरेलिया ,छोटे-छोटे बच्चे जिनकी उम्र काफी किताब में मन लगाने की है वह भी ऑनलाइन जाकर साइट से होटल की बुकिंग कर अपनी उभरती जवानी के जोश को ठंडा कर रहे हैं।
ज्यादातर लॉज और होटल जो सिर्फ मात्र पैसा कमाने का जरिया बन चुका है जो किसी भी मानक को तय नहीं करता बल्कि स्थानीय पुलिस की मदद से अनैतिक धंधे का संचालक बन बैठा हुआ है और खुलेआम वाराणसी में ट्रैफिकिंग भी जोरों पर है।
पुलिस का दखलअंदाजी सिर्फ मात्र टाइम पास और लोगों को सांत्वना देने का मंत्र बनकर रह गया है। दो दिन पूर्व मड़ूवाडीह थाना अंतर्गत चोरी में पकड़े गए युवक को 50 घंटे थाने पर बैठाया गया। परिजन द्वारा पूछे जाने पर पूछताछ की बात का हवाला दिया गया और जब उसके संबंधी ने चोरी में शामिल न होने की बात के साथ कोई सबूत ना होने की बात कही।जो थाना प्रभारी को नागवार लगा तो उसको भी थाने पर बैठा लिया गया सिर्फ यह पूछने पर कि क्या वीडियो में वह कहीं नहीं दिख रहा है बल्कि सिर्फ उस रास्ते से गुजर रहा है।जिसकी सूचना कमिश्नर के सीयूजी नंबर पर भी दी गई लेकिन उस गरीब की कोई मदद नहीं हो पाई क्योंकि कमिश्नर साहब का फोन तो कोई और ही उठाता है !
न्याय को एक पहेली बनाकर कचहरी से थाना और पीड़ित के मन की हाल को जाना फिर पीड़ित का ही परेशानी को बढ़ाना यह वर्तमान व्यव्स्था का कटु अनुभव और सत्य से सामना पीड़ित लोग हर दिन कर रहे हैं!
ऐसी कहावत को चरितार्थ कर रहा है जहां पुलिसिंग एक साधन होता था लोगों की समस्याओं को निदान के लिए।वही आज खुद एक समस्या बनकर लोगों के लिए खड़ा हो जा रहा है मदद तो दूर की बात सिर्फ मददगार होने का हुंकार भरने वाली वाराणसी पुलिस लोगों की सेवा में सदैव तत्पर है?




