(आलोक तिवारी)
(मथुरा)
✓ उच्च न्यायालय ने प्रिंसिपल की विशेष अपील खारिज कर पूर्व पद पर नियुक्त करने का दिया आदेश, मामला चम्पा अग्रवाल कालेज का
मथुरा जनपद के एक कॉलेज में कार्यरत लिपिक को उसके प्रिंसिपल ने चपरासी बना दिया। जिस पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली और न्यायालय ने लिपिक पद पर पुनः नियुक्त करने के आदेश दिए। प्रिंसिपल ने अपनी तौहीन जान उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अपील दायर की। न्यायालय ने प्रधानाचार्य की अपील को खारिज कर दिया है।
यह मामला शहर के चंपा अग्रवाल इंटर कॉलेज का है।
इस कॉलेज में वृंदावन से अपना ट्रांसफर करा कर आए राकेश महेश्वरी ने कॉलेज के लिपिक गिरधारी लाल को चपरासी बना दिया।
पीड़ित कर्मचारी ने अपने डिमोशन के खिलाफ शासन,प्रशासन हर जगह प्रत्यावेदन दिया जब किसी भी स्तर पर कर्मचारी की सुनवाई नहीं हुई तो उसने उच्च न्यायालय की शरण ली। जहा पर न्यायालय ने सारा मामला सुना और गिरधारी लाल को लिपिक पद पर बने रहने के आदेश दिए।
प्रिंसिपल राकेश महेश्वरी ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विशेष अपील दायर की। उच्च न्यायालय ने राकेश महेश्वरी की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया। राकेश महेश्वरी की तरफ से पैरवी अधिवक्ता वशिष्ठ तिवारी ने एवं गिरधारी लाल की पैरवी अधिवक्ता कमल किशोर केसरवानी ने की।
केसरवानी ने बताया कि प्रत्यावेदन को अगर जिला विधालय निरीक्षक भास्कर मिश्रा द्वारा सुना जाता तो छोटे कर्मचारी को उच्च न्यायालय की शरण नहीं लेनी पड़ती। छोटे कर्मचारी पावरफुल लोगो द्वारा नियम विरुद्ध किए जाने वाले उत्पीड़न को सहन करते है यदि छोटे कर्मचारी सही है तो उन्हें डरने की जरूरत नहीं है।




