★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
16 मार्च वर्ष 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने चंद्रोदय मन्दिर की रखी थी आधारशिला,2023 में भक्तों के दर्शनार्थ खुलेगा मन्दिर
इस्कॉन बेंगलुरु के श्रद्धालुओं नें वर्ष 2006 में इस मन्दिर को बनाने की बनाई योजना,2014 से शुरू हुआ निर्माण कार्य
♂÷उत्तरप्रदेश की पुण्यभूमि इतनी धन्य है कि वह इतराने का पूरा हक़ रखती है कि अयोध्या में मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम अवतरित हुए तो मथुरा के कारागार में गीता उपदेशक और महाभारत नायक भगवान श्रीकृष्ण ने अवतरण लिया।
वर्ष 2024 में जहाँ दुनियां के सबसे भव्य व अपने क्षेत्रफ़ल के चलते विशालकाय श्रीरामलला का मंदिर उनके जन्मस्थान पर बनकर दर्शनार्थियों के लिए खोला जाएगा तो वहीं वृंदावन में बन रहा है दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर।
दुनिया में अब तक का सबसे विशाल, भव्य और ऊंचा मंदिर वृंदावन में बनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण को समर्पित इस मंदिर का नाम चन्द्रोदय मंदिर है। यह मंदिर कुतुब मीनार से भी तीन गुना उंचा होगा। इतना ही नहीं, इस मंदिर की नींव दुनिया की सबसे उंची इमारत बुर्ज खलीफा से भी तीन गुना गहरी होगी।
वृंदावन चन्द्रोदय मंदिर की ऊंचाई 700 फुट अथवा 210 मीटर होगी। दिल्ली में 72.5 मीटर के कुतुब मीनार से इस इसकी ऊंचाई 3 गुना ज्यादा होगी, जिस के कारण पूर्ण होने पर, यह विश्व का सबसे ऊंचा धर्मालय बन जाएगा।
इसके गगनचुम्बी शिखर के अलावा इस मंदिर की दूसरी विशेष आकर्षण यह है की मंदिर परिसर में २६ एकड़ के भूभाग पर चारों ओर १२ कृत्रिम वन बनाए जाएंगे। मंदिर के वन क्षेत्र को कुछ वैसा ही बनाने का प्रयास किया जाएगा जैसा विवरण श्रीकृष्ण साहित्य में मिलता है। पूरी तरह से तैयार होने के बाद यह मंदिर कृष्ण भक्तों की वृंदावन की कल्पना को पूरी तरह से साकार करेगा।
इस मंदिर को बनाने में लगभग 700 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होंगे।
मंदिर की सबसे ऊंची मंजिला का नाम ब्रज मंडल दर्शन रखा गया है। यहां से ब्रज के 76 धार्मिक स्थानों और ताजमहल तक को दूरबीन से देखा जा सकेगा। पूरे मंदिर का भ्रमण करने में श्रद्धालुओं को तीन से चार दिन लगेंगे।
इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शियेसनेस (इस्कॉन), बेंगलुरु के श्रद्धालुओं ने 2006 में इस मंदिर को बनाने की योजना बनाई थी। 8 साल की तैयारियों के बाद वर्ष 2014 में इस मंदिर की नींव रखी गई थी।

साल 16 मार्च 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस मंदिर की आधारशिला रखी थी। यह मंदिर इसी वर्ष 2023 में भक्तों के दर्शनार्थ हेतु खुल जायेगा,किन्तु सम्पूर्ण कार्य 2026 तक पूरा कर लिया जायेगा ! फिलहाल एक हजार मजदूर यहां काम कर रहे हैं, एक साल बाद मजदूरों की संख्या तीन गुनी हो जाएगी।
पूरी बिल्डिंग में 511 पिलर होंगे। इन पर पूरी बिल्डिंग का वजन 5 लाख टन होगा, जबकि ये पिलर नौ लाख टन वजन सह सकते हैं।
मंदिर के लिए हाई स्पीड लिफ्ट तैयार की जा रही है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यदि किसी तूफान की वजह से बिल्डिंग एक मीटर झुक भी गई तो भी लिफ्ट सीधी चलती रहेगी। गति और दिशा में परिवर्तन नहीं होगा।
परंपरागत द्रविड़ और नागर शैली में बनाया जा रहा यह मंदिर, 200 सालों में अब तक का सबसे अत्याधुनिक मंदिर होगा, जिसमें 4डी तकनीक द्वारा देवलोक और देवलीलाओं के दर्शन भी किए जा सकेंगे।
इसके अलावा इसमें देवकी-वसुदेव नन्दन श्रीकृष्ण के जीवन लीलाओं को जानने के लिए लाइब्रेरी तथा अन्य माध्यम भी होंगे।
भगवान विष्णु के अवतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण को समर्पित चंद्रोदय मन्दिर वर्ष 2023 तो उन्ही के अवतार प्रभु श्रीराम का मन्दिर वर्ष 2024 में काशी सहित देश के मूर्धन्य ज्योतिषियों व पण्डितो से शुभ घड़ी पर विचार विमर्श कर भव्यतम तरीके से दुनियांभर के भक्तों के लिए खोल दिया जायेगा।

÷लेखक स्वतन्त्र पत्रकार हैं÷




