★मुकेश सेठ★
★मुम्बई★
मुख्यातिथ्य पद से बोलते हुए केरल के राज्यपाल ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में कहा कि सभ्यता वहाँ से शुरू हुआ है जहाँ पर कमजोर की जिम्मेदारी ताक़तवर समाज की रही है
महामहिम ने कहा हिन्दू-मुस्लिम एकता की नही बल्कि राष्ट्रीयता की बात होनी चाहिए, राष्ट्र की एकता की बात होनी चाहिए
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में IFWJ का 121वां व PTI के 44वें नेशनल कॉन्फ्रेंस में गवर्नर ने वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव,राजेन्द्र नाइक व नीलकण्ठ पराड़कर को दिया लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
राज्यपाल ने कर्नाटक से आयी वरिष्ठ पत्रकार/लेखक शांताकुमारी के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के ऊपर लिखी पुस्तकें का भी किया विमोचन
♂÷जो लोग असंसदीय भाषा का प्रयोग संसद में करते हैं उनको यह समझना चाहिए कि आचार, व्यवहार, भाषा और रिश्तो को निभाना, सब आपस में जुड़े हुए हैं और इससे समाज, लोकतंत्र और मीडिया कोई भी अछूता नहीं है।
उक्त विचार केरल के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान ने इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट के 121 वें व PTI के 44 वें नेशनल कॉन्फ्रेंस में “असंसदीय भाषा का लोकतंत्र,मीडिया व सदन में बढ़ते चलन” विषय पर मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए कही।
छत्तीसगढ़ के रायपुर में स्थित बेबीलोन इन होटल में आयोजित कांफ्रेंस में राज्यपाल ने आगे कहा कि धरती लाखों वर्षों से है जिसे विज्ञान भी स्वीकार कर चुका है, सभ्यता का विकास आज से लगभग 10 हज़ार वर्षों से होना शुरू हुआ,सभ्यता वहां से शुरू हुआ है जहां पर कमजोर की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी ताकतवर समाज की रही है। उन्होंने आगे कहा कि जब दुनियां में यूरोपियन सभ्यता की शुरुआत नहीं हुई थी तब भी भारत दुनियां में ज्ञान का केंद्र था।हमने भी अतीत में भयंकर गलतियां की है किंतु ग्रीस, इजिप्ट की तरह हमारे संस्कृत का हास नहीं हुआ है, सारी गलतियों के बाद भी हमारी संस्कृति और सभ्यता बची हुई है। महामहिम ने गुरु रविंद्र नाथ टैगोर के बाबत कहा कि उन्होंने कहा था कि मैं भारत से अगाध प्रेम करता हूं और मेरा सौभाग्य है कि मैं भारत भूमि में पैदा हुआ।
स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि दुनियां को हमसे कोई ख़तरा नही है।

अल्लामा इकबाल ने कहा सदियों रहा दुश्मन जमाना हमारा, किंतु कुछ बात तो है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।किंतु इकबाल कहना क्या चाहते थे यह उन्होंने स्पष्ट नहीं किया।
मुख्यअतिथि ने आगे कहा इतिहास में जो चुका है वह तो हो चुका है, उसमें से हमको सबक सीख कर कोशिश करनी चाहिए कि ऐसी परिस्थितियां फिर ना हो। हमारे पास वह आधार, वह बुनियाद मौजूद है जिससे कि हम पुनर्जागरण का काम कर सकते हैं।
गवर्नर ने मीडिया के ऊपर गंभीर टिप्पणी की कि पहले पत्रकार संपादक होते थे अब मालिक संपादक होता है,पहले मालिक, संपादक के कमरे में जाया करते थे अब संपादक मालिक के कमरे में जाता है। यह बहुत बड़ा बदलाव मीडिया जगत में देखने को मिल रहा है जिस पर विचार करना आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि हिंदू मुस्लिम एकता की बात करना मुझे अटपटा लगता है, बात करनी है तो राष्ट्रीयता की होनी चाहिए,देश की होनी चाहिए,राष्ट्र की एकता की होनी चाहिए।मैं भारतीय हूं,मैं भारत का नागरिक हूं, यही मेरी पहचान है ,संविधान को सभी को मानना चाहिए। महामहिम ने मज़ेदार ढंग से मीडिया व पॉलिटिक्स पर अपनी बेबाक़ राय रखी कि भारत में नेताओं के चुनाव लड़ने व पत्रकारों को पत्रकारिता करने के लिए शायद ही कोई उच्च योग्यता, पात्रता की जरूरत होती होगी किन्तु दुनियां के अधिकतर देशों में पत्रकारों व नेताओं के लिए पात्रता,काबिलियत व योग्यता ही आधार बनता है ऐसे में मेरा मानना है कि यही दो क्षेत्र लोकतंत्र के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं और इसमें ही उच्च मानदण्ड की आवश्यकता होनी चाहिए। राजपाल ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान 1935 से संविधान में बहुत से हिस्से थे जो आज भी संविधान में हैं।

गवर्नर ने कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के द्वारा पूछे गए तमाम प्रश्नों के विस्तार पूर्वक ढंग से तर्कपूर्ण जवाब दिया।
लखनऊ से आये वरिष्ठ पत्रकार संतोष चतुर्वेदी ने मुख्य अतिथि से देश में बढ़ते साम्प्रदायिक स्थित पर चिंता जताते हुए पिछले दिनों जमीयत उलेमा हिन्द के द्वारा दिये गए बयान को भी इंगित किया।
जिस पर राज्यपाल आरिफ़ मोहम्मद खान ने कहा कि भारत देश अब इस तरह के बातों को तवज्जों नही देता और आज़ादी के वक़्त का दौर अब नही लौट सकता, ऐसा मेरा मानना है और मैं आशावान भी हूँ।
इसी क्रम में डॉ सुधा राव द्वारा यह पूछने पर कि अधिकांश प्रदेशों में देखा जाता है कि जब प्रदेश में सरकारें बदलती है तो सरकार का मुखिया जिस जाति का होता है वह अमूमन बड़े पदों पर अपनी जाति बिरादरी वालों को ही बिठाने का काम करता है न कि अधिकारियों की काबिलियत व वरिष्ठता को प्रमुखता देता हो।ऐसे में यह स्वस्थ लोकतंत्र व सिस्टम के लिए बेहतर नहीं रहता।

इस पर राज्यपाल महोदय ने कहा कि यह गंभीर बीमारी वाकई में चिंताजनक है,इस पर राजनीतिक दलों के राजनेताओं को गंभीरतापूर्वक चिन्तन करना चाहिए।जातिवाद और संप्रदायवाद ने देश का बड़ा नुकसान किया है,हम कोई इससे निकलना चाहिए और देश मजबूत राष्ट्र बन सके।
कान्फ्रेंस को आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.के विक्रम राव समेत अन्य मंचासीन अतिथियों ने भी सम्बोधित किया।
मुख्य अतिथि राज्यपाल के हाथों इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. के.विक्रम राव, राजेंद्र नाथ पूर्व पत्रकार पीटीआई महाराष्ट्र, नीलकंठ पराड़कर को पत्रकार हितों के लिए लंबे समय से अनथक संघर्ष करने के लिए उनको लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।
इन इन तीनों हस्तियों के विराट व्यक्तित्व व संघर्ष पर विस्तृत परिचय वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती सुषमा दिक्षित ने अतिथियों व पत्रकार साथियों के समक्ष रखी। कार्यक्रम का संचालन झारखंड पीटीआई ब्यूरो इन चीफ इंदु कांत दीक्षित ने किया
राज्यपाल को विभिन्न प्रांतों से आए आईएफडब्ल्यू जेके प्रतिनिधियों ने स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्रम ओढ़ाकर कर उनका अभिनंदन व सम्मान किया।

जिनमें प्रमुख रूप से IFWJ उत्तराखंड से आये वरिष्ठ पत्रकार संजय श्रीवास्तव,केरल IFWJ की टीम ने उदयशंकर जी और कर्नाटक IFWJ टीम के साथ आई श्रीमती शांता कुमारी प्रमुख रहीं।
मालूम हो कि श्रीमती शांता कुमारी ने देश के विभिन्न राज्यों में स्थलीय दौरा व शोध कर स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण व अनन्तिम योगदान व बलिदान देने वाले सैकड़ो ज्ञात-अज्ञात माँ भारती के ऊपर महान बलिदानियों के बाबत सौ से भी ऊपर पुस्तक लिख चुकी हैं।जिसमें अनेक पुस्तकों पर उनको प्रादेशिक, राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय संस्थाओं द्वाराV पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
उनके द्वारा नवलिखित पुस्तक का विमोचन मुख्यातिथि राज्यपाल व मंचासीन अतिथियों द्वारा कांफ्रेंस के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट के बीच किया गया।
कान्फ्रेंस में प्रमुख रूप से नेशनल प्रेसिडेंट के साथ ही नेशनल वाइस प्रेसिडेंट मनोज मिश्र,नेशनल जनरल सेक्रेटरी विपिन धुलिया,लखनऊ से आये के. विश्वदेव राव,नितिन श्रीवास्तव,महाराष्ट्र प्रान्त प्रभारी व पश्चिम क्षेत्र सचिव मुकेश सेठ, मुम्बई से आये के.सुदेश राव समेत लगभग देश के सभी राज्यों से आये सैकड़ों IFWJ के प्रतिनिधियों ने 10-12 फ़रवरी तक चले नेशनल कॉन्फ्रेंस में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।




