लेखक~राघवेन्द्र पाठक
♂÷बिहार की राजधानी पटना में बाबा बागेश्वर धाम बाबा उर्फ़ पंडित धीरेन्द्र शास्त्री का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ रहे श्रद्धालुओं के जनसमुद्र से दस किलोमीटर तक जाम लग जा रहा है।
इस स्थिति से बचने के लिए उन्होंने कल यानी 14 मई को घोषणा की थी कि 15 मई को प्रवचन नहीं होगा लेकिन प्रवचन हुआ और भक्तों की भीड़ भी खासी जुटी। स्पष्ट है कि पंडित शास्त्री का खासा क्रेज है, जिनके प्रवचन नहीं होने की सूचना पर भी श्रद्धालु उमड़े रहे।
उधर, कथा सुनने का निमंत्रण सबको मिला है चाहे पूर्व मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव हों, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, मगर आरजेडी और जेडीयू ने बाबा के कार्यक्रम से दूरी बनाई हुई है। इन साहबों की बनाई गई दूरी बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की सक्रियता और मुस्लिम वोटरों की नाराज़गी से बचने का कारण माना जा रहा है।
भक्तों के सैलाब को देखकर लालू प्रसाद यादव के पुत्र व बिहार सरकार में मन्त्री तेजप्रताप यादव ने भी खामोशी ओढ़ ली जो पहले चुनौती देने की मुद्रा में थे। जबकि भाजपा नेताओं ने कार्यक्रम से नाता जोड़ लिया।
विदित हो कि बीजेपी सांसद व पूर्व दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज़ तिवारी पण्डित धीरेन्द्र शास्त्री को गाड़ी में बिठाकर गाड़ी खुद चलाकर ले गए थे।
यदि भक्तों की उमड़ रही भारी भीड़ को कोई संकेत माना जाए तो यह महागठबंधन के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। पर लाख टके का सवाल है कि क्या बिहार में जाति की राजनीति पर धर्म और सनातन वाले मुद्दे हावी होंगे?
सवाल यह भी है कि क्या प्रदेश में पहली बार भाजपा को अलादीन का चिराग हाथ लग गया है!
इस सबका फैसला तो आगामी लोकसभा चुनाव परिणामों पर ही निर्भर करेगा,लेकिन इतना तो तय है कि आने वाले 11-12 महीने बिहार की राजनीति हंगामेदार होने वाली है।

÷लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं÷




