लेखक~मुकेश सेठ
♂÷हो सकता है कि मैं इन शब्दों के रूप में लिखे सँदेश के चलते किस रूप और किस खाँचे में बहुतों के निगाह,विचार में गढ़े जाऊं किन्तु न जाने क्यूँ शायद अब यह मेरी महिंन सी शब्दस्वर मुखर हो उठी है।
किसी को ठेस पहुंचाने, निशाना बनाने की कल्पना से कत्तई मेरी उंगलियां नही तड़पी है।
हाल ही के दिनों में फ़िल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर जिन पर वामपंथी व देश विरोध के स्वर प्रस्फुटित करने के आरोप चस्पा होते रहते हैं ने समाजवादी पार्टी के युवानेता के साथ अदालत में जाकर लिखित अनुबंधित विवाह कह
लें या फ़िर निक़ाह कह ले जो मन मे आये सो तय कर लें, दोनों ने कर डाला।
सोशल मीडिया पर देखा गया कि इन प्लेटफॉर्म पर अनगिनत लोगों ने स्वरा भास्कर के द्वारा अपने नए बने शौहर को कोर्ट मैरिज के पहले पड़े जन्मदिन की बधाई भाई सम्बोधित कर दी गयी थी।
उसी ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर कोर्ट मैरिज के बाद तमाम शब्दों को बर्छी जैसे हथियार बनाकर इन दोनों ख़ासकर स्वरा भास्कर को निशाने पर लिया गया तो वहीं इस्लामिक क़ायदे के आलिम, फ़ाजिल मौलाना ने भी इस पर अपने सनसनाते राय विचार नवनिकाही या नवविवाहित जो समझे को यह समझाइश देने में देर न लगाई की यह निकाह इस्लामिक क़ानून की रौशनी में जायज़ नही नाजायज़ है।आप कहेंगे क्यो तो उन मौलाना साहेबान का कहना है कि स्वरा भास्कर ने कोर्ट मैरिज के पहले हिन्दू धर्म छोड़कर इस्लाम मज़हब नही अपनाया ऐसे में इस्लामी नियम के तहत यह निकाह जायज नही है।

उधर दूसरी ओर अयोध्या स्थिति हनुमान गढ़ी के महंत राजूदास ने भी स्वरा भास्कर के द्वारा एक मुस्लिम युवानेता से कोर्ट मैरिज के बाद अपने तर्कों में अंगारे उगलते दिखे।
इन दो सम्प्रदायों के धर्मगुरुओं से करबद्ध सादर निवेदन है कि स्वरा भास्कर जिस बॉलीवुडिया दुनियां में रहती और जीती है उनसे आप संस्कार,संस्कृति,धर्म-मज़हब के प्रति सम्बन्धो के प्रति अपनी तरह से ईमानदारी मत तय करिए।
इतिहास से लेकर वर्तमान तक न जाने कितनी अभिनेत्रियां कभी उनके साथ शादी करके छोड़ दूसरे के साथ धर्म परिवर्तन कर निकाह कर लेती है तो कोई तीसरी,चौथी करने के बाद भी तलाक़ लेकर अकेला जीवन जीने पर मजबूर हुई है क्यों,क्योंकि पता नही उन दोनों की क्या जरूरत रही होगी या आपस मे सामंजस्य की कमी रही हो,जो न पूरी हो सकी हो।
प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र जो कि पंजाबी हैं ने अपनी पहली पत्नी के रहते ड्रीमगर्ल के नाम से मशहूर हेमामालिनी के साथ सिख धर्म या हिन्दू धर्म त्याग कर दोनों ने इस्लाम मज़हब अपनाते हुए इस्लामी नाम रखते हुए निक़ाह किये हुए हैं।क्योंकि हिन्दू मैरीज़ एक्ट में एक पत्नी के रहते आप दूसरा विवाह नही कर सकते।ऐसे तमाम उदाहरण फिल्मी दुनियां में मिल जायेंगे।
हेमामालिनी आज मथुरा से बीजेपी सांसद हैं लगातार दो बार से और भक्तिगीतों पर भव्य कार्यक्रम में मोटी रक़म लेकर कभी मीरा तो कभी शक्ति के स्वरूप में मनमोहक शास्त्रीय नृत्य भी प्रस्तुत करती है।हा इन कारणों के चलते इन हस्ती को कोई भी इस्लामिक विद्वान,मौलवी मौलाना फ़तवे देकर इस्लाम से ख़ारिज करने की ज़ुर्रत न जाने क्यूँ नही जुटा पाते,इसी प्रकार सलमान खान गणपति पूजा करे,आमिर खान शाहरुख़ खान फिल्मों में या असल मे मंदिरों में पूजा करे,तिलक लगाएं कोई भी बड़े से बड़े मौलाना हो इन हस्तियों के ख़िलाफ़ मज़हबी फ़तवा निकाल इस्लाम से ख़ारिज करने की धमकी देकर तौबा नही करवाते किन्तु अगर कोई अन्य साधारण मुस्लिम या कोई साधारण मुस्लिम नेता हो मंदिर चला जाये की साम्प्रदायिक एकता मजबूत बने तो फट से उसके ख़िलाफ़ फ़तवा जारी कर दिया जाता है,इससे बचा जाना चाहिए,राष्ट्र की एकता की जरूरत के हिसाब से।
हालांकि मैं इस्लामिक विद्वान नही हूँ न ही किसी को ठेस पहुँचाने या निम्न दिखाने की नीयत से यह लिखा गया है।हिंदुस्तान की आवाम के ज़िगर में अपनी अदाकारी से ख़ास मुक़ाम हासिल करने वाले भारत रत्न से सम्मानित और पाकिस्तान के सर्वोच्च इम्तियाज ए निशान के उपाधि से नवाज़े गए मरहूम दिलीप कुमार अरे नही असली नाम युसुफ साहब ने जीते जी सैकड़ो करोड़ की सम्पदा कमाई बॉलीवुड में ग़रीब अमीर मजदूर आदि के सशक्त किरदार निभाकर।जिसको देखकर दर्शकों की नेत्रों से अश्रुधार भी फूट पड़ती थी किन्तु जब उनका इंतकाल हुआ तो उन्होंने अपने खर-खानदान के गरीब गुरबों को इन सम्पत्तियों से अमीर बनाने या कौम को बेहतर रूप से शिक्षा,चिकित्सा देने के लिए भी वह स्कूल-कॉलेज अस्पताल खुलवा सकते थे की बजाय सबकुछ वक़्फ़ कर डाला कर सकते हैं यह उनका अधिकार था।इसी प्रकार से हजारों करोड़ के मालिक अमिताभ बच्चन के तमाम रिश्तेदार आज भी बेहद तंगहाली, गुरबत में अपनी जीवन को परिजनों समेत घसीटने में लगे हैं मगर महानायक।का एक एक दिन की कीमत करोड़ो में होती है तो ऐसे में बेचारे उन बदकिस्मत रिश्तेदारों के भलमनसाहत के लिए सोचने का समय कब निकाले, आखिर अब उनकी उम्र भी तो हो चली है।
मिस्टर परफेक्शनिस्ट के नाम से मशहूर अरबपति अभिनेता आमिर खान जो कि फिल्में हो या फ़िर सत्यमेव जयते जैसे नैतिकता ईमानदारी वाली उनके द्वारा दर्षकों को ख़ूब घुट्टी पिलाने वाले सीरियल रहे हो मगर आमिर खान साहब अपने खूबसूरत, ईमानदार,नैतिकता वाली छवि के पीछे दोहरे चेहरे वाले शै हैं।
ये मैं नही कहता न ही आरोप लगाकर उनकी छवि ख़राब करने का प्रयास कर रहा हूँ।उनके भाई आये दिन सोशल मीडिया, मीडिया यहाँ तक सुना गया कि उन्होंने अपने भाई पर सम्पत्ति का लालची होने का आरोप लगाते हुए सरेआम कहा था कि आमिर खान ने फ्रॉड करके उनके हिस्से की सम्पत्ति दबाए बैठे हैं और मुझे इलाज के नाम पर पागल बनाने की भी कोशिश की गई।सच्चाई अल्लाह जाने।मेरे पास लिखित सबूत नही है मगर यह सारी बाते सार्वजनिक रूप में है, कोर्ट में है।
मरहूम दिलीप कुमार(यूसुफ साहब ) ने अपनी फिल्म देवदास में जिस तरीके से प्रेम में मात खाये दिन रात शराब में डूबे रहने वाले शराबी प्रेमी की भूमिका को जीवंत कर दिया हो या फ़िर मजदूर फ़िल्म में मजदूर बने,आप सबको मानना होगा और साथ ही समझना भी होगा कि इन अभिनेता,अभिनेत्रियों व अत्यंत धनाढ़्य वर्ग के ताकतवर लोगों के ऊपर समाज के बंधन,क़ायदे क़ानून लागू नही होते।ऐसे लोग जो हर तरह से सम्पन्न सक्षम होते हैं अपने आर्थिक,सामाजिक,दैहिक ताकत आनन्द के लिए कुछ भी करते हैं, कर डालते हैं।अभी कुछ दिनों पहले ही सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की राज्यसभा सांसद पत्नी ने अपनी नातिन नव्या नवेली को समझाईश सगर्व से दी थी कि वह शादी के पहले अगर सबकुछ कर लेगी तो भी कुछ फ़र्क नही पड़ता।भाई इन लोगो को नही पड़ता,मगर हम लोगो को इनको आदर्श मानते हुए पारिवारिक संस्कार,रिश्तों की गम्भीरता,जिम्मेदारी की उम्मीद पालना सिवाय दिवास्वप्न के कुछ भी नही हो सकता।
मुआफ़ी के साथ कहना चाहता हूँ मेरा इरादा उनके निर्णय व शान में गुस्ताखी का नही वरन मैं कहना चाहता हूँ कि यह फ़िल्मी लोग हैं, इनसे आप अपने अनुसार चाल चलन चलवाने,मनवाने,धमकियाँने का काम मत करिए।
शांतप्रिय देश भारत व उसके अमनपसंद सभी धर्मों,मजहब,पन्थो के धर्मगुरुओं, अगुआ लोगो से मेरी इल्तिजा है कि इन तरह के विवादों में न पड़कर आपस मे समझदारी जिम्मेदारी दिखाते हुए प्रेमधार बहनी चाहिए,राष्ट्रीय एकता मजबूत होनी चाहिए।
÷लेखक तहलका न्यूज़ के ऑथर हैं÷




