(विनोद मिश्रा)
(छतरपुर)
भू-माफियाओं की शिकायत के बाद ADM ने SDM को सौंपी जांच
रेरा और डायवर्सन बिना प्लॉटिंग पर प्रशासन सख्त, रिपोर्ट के बाद बड़ी कार्रवाई संभव
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विकसित मध्य प्रदेश की मंशा को छतरपुर के निडर भू-माफिया खुलेआम ठेंगा दिखा रहे हैं।
जिले में अवैध और अविकसित कॉलोनियों का जाल इस कदर फैल चुका है कि यहाँ कॉलोनाइजर एक्ट महज एक किताबी शब्द बनकर रह गया है। शहर के चारों ओर कृषि भूमि पर बिना किसी वैध लाइसेंस, बिना डायवर्सन और बिना रेरा रजिस्ट्रेशन के छोटे-छोटे प्लाट काटकर आम जनता को ठगा जा रहा है।
छतरपुर के इन अवैध कॉलोनाइजरों का कार्य करने का तरीका किसी संगठित अपराध से कम नहीं है। ये भू-माफिया विज्ञापनों और लुभावने वादों के जरिए मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ते प्लाट का लालच देते हैं, लेकिन हकीकत में वे उन परिवारों के जीवनभर की जमा-पूंजी के साथ खिलवाड़ कर रहे होते हैं। बिना रेरा रजिस्ट्रेशन के बेचे जा रहे ये प्लाट कानूनी रूप से इतने उलझे हुए होते हैं कि भविष्य में खरीदार को न तो बैंक लोन मिल पाता है और न ही मूलभूत सुविधाएं। जब तक प्रशासन की नींद खुलती है, तब तक ये सफेदपोश सौदागर अपनी जेबें भरकर गायब हो जाते हैं और जनता कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने को मजबूर हो जाती है।
अवैध प्लॉटिंग की हुई शिकायत
छतरपुर जिला न्यायालय के अधिवक्ता प्रशांत सिंह भदौरिया, पवित्र बाजेपयी, भूपेन्द्र पाल और कपिल तिवारी आदि ने जनसुनवाई में इस आशय का आवेदन दिया है। उनके द्वारा उठाए गए तथ्यों के अनुसार, तहसील छतरपुर के मौजा धमौरा, रगौलिया, सौंरा, गौरगाँय, बगौता, पलौठा और मौजा छतरपुर में अवैध प्लाटिंग का कारोबार चरम पर है। यहाँ न तो सड़कें हैं, न नालियां और न ही बिजली-पानी की व्यवस्था, लेकिन भू-माफिया कृषि भूमि को आवासीय बताकर भोले-भाले खरीदारों को बेच रहे हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी कृषि भूमि को आवासीय उपयोग में लाने के लिए उसका व्यवसायिक डायवर्सन अनिवार्य है, जिससे शासन को मोटा राजस्व मिलता है। लेकिन यहाँ कॉलोनाइजरों ने शॉर्टकट अपनाते हुए शासन के खजाने में सेंध लगा दी है। सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर उठता है, जिनकी नाक के नीचे ये कॉलोनियां कट रही हैं, लेकिन उनका डंडा केवल आम आदमी पर चलता है, इन रसूखदार भू-माफियाओं पर नहीं।
शिकायतकर्ताओं ने दिए सुबूत
शिकायतकर्ताओं ने साक्ष्य के तौर पर सैटेलाइट फोटोग्राफ्स प्रस्तुत किए हैं, जिनमें स्पष्ट दिख रहा है कि हरे-भरे खेतों के बीच अवैध रूप से सड़कें डाल दी गई हैं और प्लाटिंग कर दी गई है। यह तकनीकी साक्ष्य इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि मौके पर आवासीय प्रयोजन के लिए काम चल रहा है, जो कि पूरी तरह अवैध है। आवेदकों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि इन खसरा नंबरों की मौका मुआयना कर संबंधित कॉलोनाइजरों और लापरवाह राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण लेंगे। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इन अवैध कॉलोनियों के क्रय-विक्रय और नामांतरण पर तत्काल रोक लगाई जाए। कॉलोनियों का प्रबंधन सक्षम सरकारी अधिकारियों को सौंपा जाए और कॉलोनाइजर एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर एफआईआर दर्ज हो।
इन खसरा नंबरों पर धड़ल्ले से चल रही अवैध प्लॉटिंग
प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिन खसरा नंबरों पर धड़ल्ले से अवैध प्लॉटिंग की जा रही है, उनमें गौरगांय मौजा का खासरा नंबर 855/2/1, 855/2, 855/3, 855/1/1, 855/1/2, 851/1, 851/2/1, 851/2/2, 851/2, मौजा धमौरा का खसरा नंबर 1265, 1272,1255 के समकक्ष बटांक 1256 के समस्त बटांक 366/1, 641/1, 637 के समस्त बटांक 631, 628, 629, 326, 650 के समस्त बटांक, 635/2, 635, 641/2, मौजा रगौलिया का खसरा नंबर 126,127,109/19, 110/3, 110/2, 116/1, 116/2, 117/2, 110/11/1, 110/1/2, 119, 118 के समस्त बटांक 130, 120, 119 के समस्त बटांक, मौजा सौंरा का खसरा नंबर 1827/1/1, 1827/1/2,1828, 1823,1654/1/2, 1655, 1657, 1656 के समस्त बटांक, 1644, 1446, 1960, 1959, 1950, 12 के समस्त बटांक, मौजा गौरगाँय का खसरा नंबर 838/3, 838/2, 836, 839, मौजा बगौता का खसरा नंबर 2621, 276, 261, 259, 386, 387, 394, 216, 2516, 2518/4, 2519, 2524, 2525, 282, मौजा छतरपुर का खसरा नंबर 3664 और मौजा पलौठा का खसरा नंबर 1751 शामिल है।
अपर जिलाधिकारी छतरपुर मिलिंद नागदेवे का कहना है जनसुनवाई में आवेदन प्राप्त हुआ है, एसडीएम और सौंरा मंडल की नायब तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।



