(मुकेश शर्मा)
(ग्वालियर)
कैमिकल युक्त पानी के लिए सैम्पल, स्थानीय जनता के साथ विधायक देसाई रहे मौजूद
कैडबरी क्षेत्र में विकास का प्रतीक नही अपितु पर्यावरणीय विनाश का बन रही कारण: केशव देसाई
जाँच रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी कार्यवाही: चिकित्सा अधिकारी
भिंड जिले के मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थिति कैडबरी लिमिटेड कंपनी में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा और कंपनी से निकलने वाले गंदे पानी के सैम्पल लिए।
इस कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय विधायक केशव देसाई, ब्लॉक चिकत्सा अधिकारी गोहद डॉक्टर वासुदेव सिकारिया ओर कंपनी की तरफ से स्वास्थ्य एवं सेफ्टी मैनेजर शशांक के अलावा दर्जनों क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।
इस अबसर पर विधायक देसाई ने कहा कि कंपनी से निकलने वाले दूषित पानी से क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांव प्रभावित हो रहे हैं,गांवों की जनता में त्वचा रोग फ़ैल रहे हैं। विधायक ने कहा कि कैडबरी क्षेत्र के लिए विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय विनाश का कारण बन रही है,कंपनी प्रशासनिक लापरवाही और औद्योगिक मुनाफ़ाखोरी का काला अध्याय बन चुकी है।
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि यहाँ संचालित कई औद्योगिक इकाइयाँ खुलेआम पर्यावरण कानूनों को कुचलते हुए क्षेत्र की नदियों, नालों और खुले इलाकों में रासायनिक व चिकित्सीय अपशिष्ट फेंक रही हैं इसका दुष्परिणाम अब भयावह रूप ले चुका है।
लोगो में चर्चा है कि हजारों स्थानीय लोगों की परेशानी का कारण बनी इन कम्पनियों और सिस्टम में बैठे आला अफसर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
हाल ही में इंदौर में दूषित पानी से दो दर्जन से अधिक परिवारों में मातम छा गया, शायद ऐसे ही किसी बड़े हादसे के बाद प्रशासन की कुंभकर्णी नींद खुलेगी और फिर वहीं ड्रामा, मुआवजा, राहत, कमीशन, फलाना ढिमका आदि के साथ लाशों के ढेर पर चंद सफेदपोश राजनीतिक रोटियां सेकते नजर आएंगे।
कारखाने से निकलने वाला बिना शोधन का रसायनयुक्त दूषित जल नालियों के सहारे सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है। इस ज़हरीले पानी ने नदियों को जीवनदायिनी से मौत की धार में बदल दिया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार नदी में मछलियाँ और अन्य जलीय जीव मर रहे हैं व्यक्तियों में खाज खुजली जैसी बीमारियां फ़ैल रहीं हैं,पानी से दुर्गंध उठ रही है,और नदी किनारे की उपजाऊ जमीन तेजी से बंजर होती जा रही है।
यह प्रदूषण नहीं, बल्कि प्रकृति के विरुद्ध खुला अपराध है।
शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र अनिवार्य रूप से स्थापित होना चाहिए। लेकिन मालनपुर की कई फैक्ट्रियों में यह संयंत्र मौजूद ही नहीं है, या फिर केवल काग़ज़ों में दिखाया गया है। बिना शोधन का रसायनयुक्त जल सीधे बाहर निकाला जा रहा है। इससे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिना शोधन संयंत्र के इन फैक्ट्रियों को संचालन की अनुमति किसके संरक्षण में मिली ?
इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की चुप्पी कई संदेह खड़े करती है।
मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डीवीएस जाटव से उनके मोबाईल पर विभाग का पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्होंने मोबाइल काल रिसीव नहीं किया।
क्या जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं या फिर औद्योगिक इकाइयों और अधिकारियों के बीच कोई सांठगांठ है।
जनता के बीच यह चर्चा आम हो चली है कि कानून आम लोगों के लिए है, कारखानों के लिए नहीं!
कारखाना संचालक मुनाफ़ा कमाने की अंधी दौड़ में पर्यावरण, पशुधन और जनस्वास्थ्य की बलि दे रहे हैं। यदि यही हाल रहा, तो आने वाले वर्षों में मालनपुर क्षेत्र गंभीर जल संकट,भूमि की उर्वरता खत्म होने और स्वास्थ्य आपदा का सामना करेगा।
यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो मालनपुर का यह ज़हरकांड आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिशाप बन जाएगा।
इस बाबत चिकित्सा अधिकारी ब्लॉक गोहद डॉक्टर वासुदेव सिकारिया का कहना है कि कैडबरी कंपनी से निकलने वाले पानी की शिकायत मिली थी, जिसके आज सैम्पल लिए गए सैम्पल जांच के लिए भेज दिए गए हैं जांच रिपोर्ट आने के वाद कार्रवाई की जायेगी।




