(मुकेश सेठ)
(मुम्बई)
ग्वालियर में “नकली जीरा कांड”को लीपापोती करने में जुटा प्रशासन
प्रकरण मेरी जानकारीमें नहीं है कहा पूर्व विधायक मुन्ना लाल गोयल ने
सीएसपी कृष्णपाल सिंह बोले कि मैं आपको बताने को बाध्य नहीं कि गोडाउन है किसका
ग्वालियर में खाद्य पदार्थों में मिलावट का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने कथित रूप से सौंफ के बीज में सीमेंट और रसायन मिलाकर नकली जीरा तैयार करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में तीन नामजद आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें एक आरोपी भाजपा नेता पूर्व विधायक एवं बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष मुन्नालाल गोयल के साढू का बेटा है और जिस गोडाउन से नकली जीरा पकड़ा है वह भी पूर्व विधायक के पुत्र मयंक गोयल एवं आरोपी मनोज गोयल की भागीदारी की संपत्ति है।
बता दें कि तीन दिन पूर्व बहोड़ापुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शहर में संचालित एक अवैध मिलावट गिरोह का खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी सस्ती सौंफ खरीदकर उसमें सीमेंट व अन्य रासायनिक पदार्थ मिलाकर उसे जीरे जैसा स्वरूप देते थे और बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने की तैयारी थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने लगभग आधा सैकड़ा बोरे में संदिग्ध नकली जीरा बरामद किया हैं।
यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय माना जा रहा है। खाद्य पदार्थों में इस प्रकार की मिलावट से जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
राजनीतिक कनेक्शन की चर्चा
प्रकरण में नामजद आरोपियों में शामिल मनोज गोयल के बारे में स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि उनका संबंध भारतीय जनता पार्टी के नेता, बीज निगम के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल के रिश्तेदारी पक्ष से बताया जा रहा है।
कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि आरोपी पूर्व में चुनावी प्रबंधन से जुड़ा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है।
जब इस संबंध में पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने संक्षिप्त रूप से कहा कि “प्रकरण मेरी जानकारी में नहीं है” और कॉल समाप्त कर दी।
वहीं इस मामले में नगर पुलिस अधीक्षक कृष्णपाल सिंह से जानना चाहा कि जिस गोडाउन से नकली जीरा पकड़ा बो गोडाउन किसका है तो उन्होंने कहा कि में आपको क्यों बताऊं कि उक्त गोडाउन किसका है.तीन दिन पहले जहाँ
थाना प्रभारी, बहोड़ापुर
पुलिस की इस कार्रवाई को मिलावटखोरों के विरुद्ध बड़ी सफलता माना जा रहा है।वहीं अबतक आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई न होनेसे निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में सही तथ्य सामने आयेंगे या सत्ता के दबाव में लीपापोती हो जाएगी यह देखना दिलचस्प होगा।




