लेखक: मुकेश सेठ
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की स्वतंत्रता की 100 वीं वर्षगांठ 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। देश के राज्यों में सातवीं अर्थव्यवस्था वाले राज्य राजस्थान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को पूरा करने के लिए सबसे पहले कदम बढ़ाया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विकसित राजस्थान दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को 4.3 ट्रिलियम अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य पर ले जाकर प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करेगी।
राजस्थान विजन डॉक्यूमेंट में 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि, उद्योग, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, जल प्रबंधन, आवास, बुनियादी ढांचा, आर्थिक विकास, कानून और सुरक्षा एवं जलवायु अनुकूलता जैसे सेक्टर को राज्य के विकास का आधार स्तंभ बनाया गया है। राज्य के समावेशी विकास की परिकल्पना को साकार करने वाले इस विजन डॉक्यूमेंट में दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2030, 2035 और 2040 के मध्यावधि लक्ष्य को भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तय किया है। उनका स्पष्ट कहना हैं कि हर चरण में विकास के उच्च मानको को स्थापित किया जाएगा।
राजस्थान सरकार ने इस दस्तावेज में इस बात पर जोर दिया हैं कि आर्थिक प्रगति राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। इसका सीधा अर्थ यह है कि विकास केवल शहरों तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बे भी नए-नए अवसरों के इंजन बनेंगे। काबिलेगौर है कि राजस्थान भारत में सीमेंट, जस्ता, संगमरमर और सौर ऊर्जा के उत्पादन में पहले पायदान पर है। सरकार ने 2047 तक राज्य में दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के विकास के साथ भिवाडी, अलवर और जोधपुर में नए औद्योगिक परिक्षेत्रों के विकास का वादा किया है। औद्योगिक विकास के साथ सरकार एक करोड़ रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। विजन डॉक्यूमेंट में दावा किया गया हैं कि राजस्थान के सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्योगधंधों को भी व्यापक तौर पर बढ़ावा दिया जाएगा।
राइजिंग राजस्थान 2047 के लक्ष्य की प्राप्ती के लिए सरकार ने पांच नए क्षेत्रों की पहचान भी की है। जिसमे विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, खनन, पर्यटन और सर्विस सेक्टर शामिल है। सरकार औद्योगिक विविधीकरण, निजी निवेश, नीतिगत सुधार और प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में भी सर्वाधिक जोर दे रही है। राजस्थान की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 197 अरब डॉलर है। भजनलाल सरकार 2028-29 तक इसे 350 अरब डॉलर पर ले जाने की दिशा में काम कर रही हैं। राजस्थान के विकास का जो रोडमैप उन्होंने प्रस्तुत किया है उसमें सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी को 20 प्रतिशत तक बढ़ाना है। राज्य में जीवन प्रत्याशा (औसत आयु) की दर को 77 वर्ष तक बढ़ाना और शिशु मृत्यु दर को 10 प्रतिशत कम करना है। विजन डॉक्यूमेंट में सरकार ने कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी को 60 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में राज्य को विकसित करने का भी लक्ष्य है। ताकि पर्यटन के क्षेत्र में राजस्थान अग्रणी राज्य बन सके। घरेलू पर्यटन में राज्य की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत बढ़ा कर सरकार रोजगार के नए अवसरों को पैदा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान 2047 विजन डॉक्यूमेंट को मंत्रीमंडल व्दारा अनुमोदित किया जा चुका है। यानि इस सपने को साकार करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सभी विभागों व्दारा वार्षिक कार्य योजना तैयार की जाएगी। प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा। सरकार ने अपने विकास के लक्ष्यों का निर्धारण जर्मनी जैसे विकसित देशों के मानकों के आधार पर तय किया है। यह विजन डॉक्यूमेंट चार थीम्स में बांटा गया है जिनमें जनकल्याण एवं सामाजिक सशक्तिकरण, त्वरित विकास एवं रोजगार सृजन, भविष्य उन्मुख राजस्थान और नीति एवं वित्त और शासन शामिल है।
विजन डॉक्यूमेंट में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु जैव विविधता का संरक्षण एवं कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य भी तय किया गया है। विकास की सबसे बड़ी जरूरत नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन को 33 गीगावाट से बढ़ाकर 290 गीगावाट करना भी राज्य को विकास के पथ पर लेकर जाएगा। विकसित राजस्थान 2047 विजन डॉक्यूमेंट भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी सोच है। इसके लक्ष्य को पाने के लिए सरकार समृद्ध और समावेशी विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है। मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के साथ निर्यात को प्रोत्साहन देने वाला यह डॉक्यूमेंट विजन सारे राजस्थान की भागिदारी से अपने तय लक्ष्य पर पहुंचेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की स्वतंत्रता की 100 वीं वर्षगांठ 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। देश के राज्यों में सातवीं अर्थव्यवस्था वाले राज्य राजस्थान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को पूरा करने के लिए सबसे पहले कदम बढ़ाया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विकसित राजस्थान दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को 4.3 ट्रिलियम अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य पर ले जाकर प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करेगी।
राजस्थान विजन डॉक्यूमेंट में 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि, उद्योग, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, जल प्रबंधन, आवास, बुनियादी ढांचा, आर्थिक विकास, कानून और सुरक्षा एवं जलवायु अनुकूलता जैसे सेक्टर को राज्य के विकास का आधार स्तंभ बनाया गया है। राज्य के समावेशी विकास की परिकल्पना को साकार करने वाले इस विजन डॉक्यूमेंट में दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2030, 2035 और 2040 के मध्यावधि लक्ष्य को भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तय किया है। उनका स्पष्ट कहना हैं कि हर चरण में विकास के उच्च मानको को स्थापित किया जाएगा।
राजस्थान सरकार ने इस दस्तावेज में इस बात पर जोर दिया हैं कि आर्थिक प्रगति राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। इसका सीधा अर्थ यह है कि विकास केवल शहरों तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बे भी नए-नए अवसरों के इंजन बनेंगे। काबिलेगौर है कि राजस्थान भारत में सीमेंट, जस्ता, संगमरमर और सौर ऊर्जा के उत्पादन में पहले पायदान पर है। सरकार ने 2047 तक राज्य में दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के विकास के साथ भिवाडी, अलवर और जोधपुर में नए औद्योगिक परिक्षेत्रों के विकास का वादा किया है। औद्योगिक विकास के साथ सरकार एक करोड़ रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी। विजन डॉक्यूमेंट में दावा किया गया हैं कि राजस्थान के सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्योगधंधों को भी व्यापक तौर पर बढ़ावा दिया जाएगा।
राइजिंग राजस्थान 2047 के लक्ष्य की प्राप्ती के लिए सरकार ने पांच नए क्षेत्रों की पहचान भी की है। जिसमे विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, खनन, पर्यटन और सर्विस सेक्टर शामिल है। सरकार औद्योगिक विविधीकरण, निजी निवेश, नीतिगत सुधार और प्रौद्योगिकी को अपनाने की दिशा में भी सर्वाधिक जोर दे रही है। राजस्थान की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 197 अरब डॉलर है। भजनलाल सरकार 2028-29 तक इसे 350 अरब डॉलर पर ले जाने की दिशा में काम कर रही हैं। राजस्थान के विकास का जो रोडमैप उन्होंने प्रस्तुत किया है उसमें सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी को 20 प्रतिशत तक बढ़ाना है। राज्य में जीवन प्रत्याशा (औसत आयु) की दर को 77 वर्ष तक बढ़ाना और शिशु मृत्यु दर को 10 प्रतिशत कम करना है। विजन डॉक्यूमेंट में सरकार ने कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी को 60 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में राज्य को विकसित करने का भी लक्ष्य है। ताकि पर्यटन के क्षेत्र में राजस्थान अग्रणी राज्य बन सके। घरेलू पर्यटन में राज्य की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत बढ़ा कर सरकार रोजगार के नए अवसरों को पैदा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान 2047 विजन डॉक्यूमेंट को मंत्रीमंडल व्दारा अनुमोदित किया जा चुका है। यानि इस सपने को साकार करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सभी विभागों व्दारा वार्षिक कार्य योजना तैयार की जाएगी। प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा। सरकार ने अपने विकास के लक्ष्यों का निर्धारण जर्मनी जैसे विकसित देशों के मानकों के आधार पर तय किया है। यह विजन डॉक्यूमेंट चार थीम्स में बांटा गया है जिनमें जनकल्याण एवं सामाजिक सशक्तिकरण, त्वरित विकास एवं रोजगार सृजन, भविष्य उन्मुख राजस्थान और नीति एवं वित्त और शासन शामिल है।
विजन डॉक्यूमेंट में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु जैव विविधता का संरक्षण एवं कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य भी तय किया गया है। विकास की सबसे बड़ी जरूरत नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन को 33 गीगावाट से बढ़ाकर 290 गीगावाट करना भी राज्य को विकास के पथ पर लेकर जाएगा। विकसित राजस्थान 2047 विजन डॉक्यूमेंट भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी सोच है। इसके लक्ष्य को पाने के लिए सरकार समृद्ध और समावेशी विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है। मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के साथ निर्यात को प्रोत्साहन देने वाला यह डॉक्यूमेंट विजन सारे राजस्थान की भागिदारी से अपने तय लक्ष्य पर पहुंचेगा।




